हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा बनत, शिवभक्त कांवड़ियों पर नगर पंचायत ने की पुष्पवर्षा

बनत/शामली। श्रावण मास में कांवड़ यात्रा अपने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ जारी है। रविवार को बनत नगर में उस समय भक्तिमय माहौल बन गया, जब श्री गौमुख और हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर लौट रहे शिवभक्त कांवड़ियों का नगर पंचायत बनत की ओर से स्वागत किया गया। नगर पंचायत कार्यालय के सामने कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया गया।

कांवड़ियों के जत्थे जैसे ही नगर पंचायत कार्यालय के सामने पहुंचे, वातावरण “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से गूंज उठा। फूलों की वर्षा के बीच कांवड़ लेकर आगे बढ़ते शिवभक्तों के चेहरों पर उत्साह और आस्था साफ नजर आई।

फूलों से हुआ शिवभक्तों का स्वागत

नगर पंचायत बनत की ओर से कांवड़ियों के सम्मान के लिए विशेष स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। कांवड़ियों के गुजरने के दौरान उन पर पुष्पवर्षा की गई और उनकी यात्रा के सकुशल एवं मंगलमय पूर्ण होने की कामना की गई।

इस दौरान नगर पंचायत से जुड़े जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों और स्थानीय गणमान्य लोगों ने कांवड़ियों का स्वागत किया। श्रद्धा और उत्साह से भरे इस माहौल में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी देखने को मिली।

सेवा और श्रद्धा का नजर आया सुंदर संगम

कांवड़ यात्रा के दौरान जगह-जगह शिवभक्तों के स्वागत और सेवा के लिए लोग आगे आ रहे हैं। बनत में नगर पंचायत की ओर से किया गया यह स्वागत भी इसी सेवा भावना की एक झलक रहा।

पुष्पवर्षा के दौरान कांवड़ियों के जत्थे अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे और उनके जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया। स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक यात्राओं के दौरान श्रद्धालुओं का सम्मान और सहयोग समाज में आपसी सद्भाव तथा भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।

कांवड़ियों में दिखा गजब का उत्साह

गौमुख और हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों में भगवान भोलेनाथ के प्रति गहरी आस्था और उत्साह दिखाई दिया। लंबी यात्रा के बावजूद कांवड़ियों का जोश कम नहीं था। नगर पंचायत कार्यालय के सामने स्वागत के दौरान उन्होंने भी हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे लगाए।

श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के बीच बनत में हुआ यह स्वागत कार्यक्रम श्रद्धा, सेवा और सम्मान की भावना को सामने लाता नजर आया।

ये लोग रहे मौजूद

स्वागत कार्यक्रम में चेयरमैन प्रतिनिधि धर्मवीर सिंह, वरिष्ठ लिपिक ओम सिंह कश्यप, सभासद प्रतिनिधि प्रशांत चौहान, कृष्णा कुमार, सभासद योगेंद्र शर्मा, अजय कुमार, कल्लू, अमरेश देवी और बीरपाल सिंह सहित नगर पंचायत बनत के अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।


समझो भारत की खास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल “समझो भारत” के लिए शामली, उत्तर प्रदेश से ब्यूरो चीफ शौकिन सिद्दीकी के साथ कैमरामैन रामकुमार चौहान की खास रिपोर्ट।

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बोल बम के जयकारों से गूंजा झिमरान-बिड़ौली, रिमझिम बारिश में भी नहीं डिगी शिवभक्तों की आस्था

बिड़ौली/झिंझाना, शामली। सावन का महीना हो और सड़कों पर कांवड़ियों की टोली दिखाई न दे, ऐसा भला कैसे हो सकता है। शनिवार को रिमझिम बारिश के बीच भी शिवभक्तों की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे कांवड़ियों के ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से झिमरान-बिड़ौली क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय नजर आया।

मेरठ-करनाल हाईवे पर स्थित बिड़ौली झिमरान गांव के पास एक कांवड़ सेवा शिविर लगाया गया था। यहां से गुजरने वाले शिवभक्तों के लिए सेवा और विश्राम की व्यवस्था की गई। बारिश के बावजूद कांवड़ियों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई शिवभक्त नंगे पैर अपनी यात्रा पूरी करते हुए दिखाई दिए, जबकि उनके साथ चल रहे साथी लगातार बोल बम के जयकारे लगाकर वातावरण में श्रद्धा का रंग भर रहे थे।

बारिश के बीच भी जारी रही कांवड़ यात्रा

सावन की रिमझिम फुहारें कांवड़ियों के कदम रोक नहीं सकीं। गंगाजल से भरी कांवड़ को कंधे पर उठाए शिवभक्त अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। किसी के चेहरे पर थकान दिखाई दी तो किसी के चेहरे पर लंबी यात्रा पूरी करने का उत्साह साफ नजर आया।

कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे से गुजरने वाले शिवभक्तों के लिए लगाए गए सेवा शिविर में आराम, फल, भोजन, चिकित्सा सुविधा, गर्म पानी, चाय और प्रसाद जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। सेवा शिविर में कुछ समय रुककर कांवड़ियों ने आराम किया और फिर अपनी यात्रा आगे बढ़ाई।

सेवा शिविर में दिखाई दी सेवा और श्रद्धा की मिसाल

कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि इस दौरान जगह-जगह लगने वाले सेवा शिविर भी लोगों के बीच सहयोग और सेवा की भावना को सामने लाते हैं। बिड़ौली झिमरान में लगाए गए शिविर में भी कांवड़ियों की सुविधा का ध्यान रखा गया।

शिविर के दौरान गुलाब सिंह, फूल सिंह, नारायण सिंह, सुक्खा सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे और कांवड़ियों की सेवा में सहयोग करते दिखाई दिए।

हाईवे से गुजरते हर कांवड़िए के साथ गूंजता ‘बोल बम’ का जयघोष आसपास के माहौल को भक्तिमय बना रहा था। बारिश में भी कांवड़ियों के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे। श्रद्धालुओं का यही विश्वास और उत्साह सावन की कांवड़ यात्रा की सबसे खास तस्वीर बनकर सामने आया।

रिपोर्ट: शाकिर अली, शामली, उत्तर प्रदेश
खास रिपोर्ट — ‘समझो भारत’

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रक्तदान से बची घायल शिवभक्त की जान: गुलाब सिंह ने 12वीं बार किया रक्तदान, पेश की मानवता की मिसाल

बिडौली/झिंझाना (शामली, उत्तर प्रदेश): सेवा, संवेदनशीलता और मानवता का अनूठा उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब झिमरान बिडौली निवासी गुलाब सिंह ने अपने घायल ताऊ की जान बचाने के लिए तत्काल रक्तदान किया। यह उनका 12वां स्वैच्छिक रक्तदान था, जिसने एक बार फिर समाज के सामने मानव सेवा का प्रेरणादायक संदेश रखा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुलाब सिंह के ताऊ करण सिंह हरिद्वार से कांवड़ यात्रा पूरी कर वापस लौट रहे थे। रुड़की के समीप एक अज्ञात वाहन की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके साथ मौजूद शिवभक्तों ने बिना देरी किए उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। अधिक रक्तस्राव होने के कारण चिकित्सकों ने तत्काल रक्त की आवश्यकता बताई।

घटना की सूचना मिलते ही गुलाब सिंह शामली स्थित अम्बा ब्लड बैंक पहुंचे और रक्तदान किया। समय पर रक्त उपलब्ध होने से घायल करण सिंह के उपचार में महत्वपूर्ण सहायता मिली।

गुलाब सिंह ने बताया कि यह उनका 12वां रक्तदान है। उन्होंने कहा कि "रक्तदान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि इससे किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है।" उन्होंने सभी स्वस्थ लोगों से समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान करने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की।

रक्तदान के उपरांत अम्बा ब्लड बैंक की ओर से गुलाब सिंह को मेडल पहनाकर सम्मानित किया गया। ब्लड बैंक के अधिकारियों ने उनके इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे लोग समाज में मानवता और सेवा की भावना को मजबूत करते हैं।

गुलाब सिंह की यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि कठिन समय में किया गया छोटा-सा सहयोग भी किसी के जीवन को बचाने का माध्यम बन सकता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल "समझो भारत" के लिए शामली, उत्तर प्रदेश से पत्रकार शाकिर अली की विशेष रिपोर्ट।

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बारिश भी नहीं रोक सकी अकीदत: बिडौली सादात में इमाम हुसैन के चेहलुम पर निकला मातमी जुलूस, गूंजती रहीं 'या हुसैन' की सदाएं

बिडौली (शामली): उत्तर प्रदेश के जनपद शामली के झिंझाना क्षेत्र स्थित गांव बिडौली सादात में मंगलवार को हजरत इमाम हुसैन के चेहलुम (चालीसवें) के अवसर पर शिया समुदाय द्वारा पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला गया। लगातार हो रही बारिश भी अकीदतमंदों के जज़्बे को कम नहीं कर सकी। बड़ी संख्या में सोगवार जुलूस में शामिल हुए और इमाम हुसैन की शहादत की याद में सीनाजनी करते हुए मातम किया। पूरे गांव में "या हुसैन" की सदाएं गूंजती रहीं, जिससे वातावरण गम और अकीदत से भर गया।

जुलूस का शुभारंभ पूर्व प्रधान सैय्यद फजल अली (अच्छू मियां) के आवास स्थित इमाम बारगाह से हुआ। शबी-ए-ताबूत, अलम और जुलजनाह के साथ निकला जुलूस गांव की विभिन्न गलियों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

मजलिस में दिया गया इंसानियत और सत्य का संदेश

जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना तस्दीक हुसैन लखनवी ने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने दीन, इंसाफ और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े होने की मिसाल है। इमाम हुसैन ने कठिन परिस्थितियों में भी अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाया और उनका जीवन आज भी पूरी मानवता को सच्चाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।

मजलिस में अली रजा, सैय्यद वसी हैदर, नफीस शाह और सैय्यद गुलाम अली ने मर्सिया खानी की, जबकि जुलूस के दौरान शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, गुड्डू मियां और हसन अली जैदी ने नोहाखानी पेश कर माहौल को गमगीन बना दिया।

श्रद्धालुओं के लिए सेवा व्यवस्था

जुलूस के पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए शर्बत, चाय और भोजन की व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों ने सेवा भाव के साथ अकीदतमंदों का स्वागत किया और मातमी जुलूस में शामिल लोगों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा।

पुलिस प्रशासन रहा मुस्तैद

धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया और पूरे कार्यक्रम पर प्रशासन की नजर बनी रही।

इस अवसर पर सैय्यद फजल अली उर्फ अच्छू मियां, अली जौन, नियाज हैदर, जिंदा शाह, हामिद शाह, कमर अब्बास, कमर रजा जैदी, बाकिर अली, डॉ. बाकिर जैदी, आफताब मेहदी, सलीम शाह, साजिद शाह, साबिर शाह, डॉ. रजी बाकिर, मेहताब मेहदी, मिन्हाल मेहदी, मोहसिन रिजवी और सज्जाद मेहदी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

कर्बला का संदेश आज भी प्रासंगिक

चेहलुम का यह आयोजन केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि कर्बला की उस महान कुर्बानी की याद है, जिसने सत्य, न्याय, धैर्य और इंसानियत के मूल्यों को हमेशा के लिए अमर कर दिया। हर वर्ष की तरह इस बार भी बिडौली सादात में आयोजित मातमी जुलूस ने लोगों को शांति, भाईचारे और इंसानी मूल्यों का संदेश दिया।

— विशेष रिपोर्ट, समझो भारत
बिडौली (झिंझाना), जनपद शामली, उत्तर प्रदेश

ऊन में राजकीय डिग्री कॉलेज की मांग: भाजपा एमएलसी मोहित बेनीवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की मुलाकात


शामली जिले के ऊन क्षेत्र में लंबे समय से राजकीय डिग्री कॉलेज की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) एवं प्रदेश उपाध्यक्ष श्री मोहित बेनीवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ में शिष्टाचार भेंट की और क्षेत्र में एक राजकीय डिग्री कॉलेज स्थापित करने की मांग रखी।

मुलाकात के दौरान श्री मोहित बेनीवाल ने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत पत्र सौंपते हुए बताया कि ऊन तहसील एवं ब्लॉक मुख्य रूप से कृषि प्रधान और ग्रामीण क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन राजकीय डिग्री कॉलेज नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और ग्रामीण छात्राओं को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि यदि ऊन में राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना होती है तो इसका लाभ केवल ऊन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों विद्यार्थियों को भी मिलेगा। स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होने से छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, पढ़ाई बीच में छोड़ने की घटनाओं में कमी आएगी तथा युवाओं को अपने घर के निकट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

श्री मोहित बेनीवाल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। प्रदेश में नए विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों और राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना के माध्यम से उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऊन क्षेत्र की इस मांग पर भी सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्र प्राप्त कर विषय पर गंभीरता से विचार करने तथा आवश्यक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।

मुलाकात के बाद श्री मोहित बेनीवाल ने कहा कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक युवा तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि ऊन में राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना से क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी तथा ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर और अधिक सुलभ होंगे।


लेखक: सुरेन्द्र सिंह निर्वाल, शामली (उत्तर प्रदेश)
प्रकाशन: समझो भारत राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल
संपर्क: 8010884848, 9528680561

🕊️ ग़मगीन ख़बर | एक और घर का चराग़ बुझ गया, बिरादरी ग़म में डूब गई


"إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ"
अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील नसीब फ़रमाए। आमीन।

नई दिल्ली / मुज़फ्फरनगर।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ बिरादरान-ए-मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) को यह दर्दनाक इत्तिला दी जाती है कि उत्तर प्रदेश के जनपद मुज़फ्फरनगर के गाँव महाददौ की मूल निवासी तथा हाल मुक़ीम मकान संख्या M-295, सुंदर नगरी, दिल्ली-110094 की रहने वाली मरहूमा अनीसा बी (उम्र तक़रीबन 50 वर्ष), अहलिया मरहूम जनाब अनवर साहब, का आज मंगलवार, 04 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 6:00 बजे सुंदर नगरी, दिल्ली में इंतिक़ाल हो गया।

यह ख़बर इसलिए भी दिलों को और ज़्यादा अश्कबार कर देने वाली है कि मरहूमा के शौहर जनाब अनवर साहब का भी महज़ 11 माह पहले इंतिक़ाल हुआ था। अभी वह सदमा पूरी तरह कम भी न हुआ था कि आज यह दूसरा बड़ा सदमा पूरे ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी पर टूट पड़ा।

मरहूमा अपने पीछे दो साहबज़ादे, छह साहबज़ादियाँ तथा पूरा ख़ानदान, रिश्तेदार, अहबाब और चाहने वालों को ग़मज़दा छोड़कर अपने ख़ालिक़-ए-हक़ीक़ी से जा मिलीं। मरहूमा का मायका शाहपुर, ज़िला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में था और अपने नेक अख़लाक़, सादगी तथा ख़ुशनुमां मिज़ाज की वजह से बिरादरी में अच्छी पहचान रखती थीं।

मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद आज नमाज़-ए-असर सुंदर नगरी, दिल्ली में ही सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरान-ए-इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके लिए ईसाल-ए-सवाब का एहतेमाम करें।

दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा की तमाम ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमाए, क़ब्र की तंगी और वहशत को आसान फ़रमाए, मुनकर-नकीर के सवालात में कामयाबी अता फ़रमाए, हश्र के दिन अपने ख़ास करम से साया-ए-रहमत नसीब फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में अपने नेक बंदों के साथ आला मुक़ाम अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

📌 नोट :
मय्यत के सिलसिले में किसी भी तरह की तफ़सील मालूम करने के लिए जनाब मोहम्मद नौशाद साहब (छुर वालों) से मोबाइल नंबर 9971840143 पर राब्ता किया जा सकता है।

— उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट
"मुल्तानी समाज"
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल।

बिडौली में चौथी मजलिस: कर्बला के शहीदों की याद में हुई नोहाखानी, मातम और इबादत


बिडौली (शामली): मोहर्रम के अवसर पर बिडौली सादात स्थित इमाम बारगाह में चौथी मजलिस श्रद्धा, अनुशासन और अकीदत के माहौल में आयोजित की गई। देर रात तक चली इस मजलिस में कर्बला के शहीदों को याद करते हुए नोहाखानी, मजलिस और सीनाजनी की गई। बड़ी संख्या में अज़ादारों ने इसमें भाग लेकर इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना जमन अब्बास ने कर्बला की ऐतिहासिक घटना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत इंसानियत, न्याय, सत्य और उसूलों की रक्षा का प्रतीक है। उनके अनुसार, कर्बला का संदेश हर दौर में इंसान को हक और नाहक के बीच फर्क समझने की प्रेरणा देता है।

मौलाना ने अपने बयान में कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों का भावपूर्ण उल्लेख किया, जिसे सुनकर मौजूद अज़ादार गमगीन हो गए। मजलिस के समापन के बाद अंजुमन-ए-सज्जादिया की ओर से कर्बला के शहीदों की याद में सीनाजनी की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन पाक से हुई। इसके बाद मर्सियाखानी और नोहाखानी का सिलसिला चला, जिसमें स्थानीय अंजुमनों और अज़ादारों ने अपनी अकीदत पेश की। पूरी रात इबादत, ज़िक्र और कर्बला की याद में धार्मिक गतिविधियाँ जारी रहीं।

मजलिस की अध्यक्षता फज़ल अली उर्फ अच्छू मियां ने की। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग, उलेमा और अज़ादार उपस्थित रहे तथा शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण वातावरण में धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ।

मोहर्रम के दौरान आयोजित होने वाली ऐसी मजलिसें केवल धार्मिक परंपरा का हिस्सा ही नहीं हैं, बल्कि त्याग, धैर्य, इंसाफ और मानवता के मूल्यों को याद करने का भी अवसर प्रदान करती हैं। कर्बला का संदेश आज भी समाज को सत्य, नैतिकता और अन्याय के विरुद्ध दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।

— शाकिर अली, विशेष संवाददाता
समझो भारत | शामली, उत्तर प्रदेश