बागपत में नई मैग्नीशियम खाद का शुभारम्भ: किसानों की पैदावार में दिखा सकारात्मक असर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान जिले बागपत से किसानों के लिए एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। जगन्नाथ कम्पनी द्वारा जगन्नाथ ब्रांड मैग्नीशियम सल्फेट खाद के निर्माण और वितरण का औपचारिक शुभारम्भ किया गया। एक समारोह के दौरान इसकी शुरुआत की गई, जिसमें कंपनी प्रतिनिधियों और किसानों की उपस्थिति रही।

का नया कदम

कंपनी के निदेशक श्री मुकेश जैन ने जानकारी दी कि जगन्नाथ कम्पनी को इसी महीने कृषि विभाग लखनऊ से मैग्नीशियम सल्फेट खाद निर्माण का लाइसेंस प्राप्त हुआ है। लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी ने उत्पादन शुरू कर दिया है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल कंपनी की उत्पादन क्षमता सीमित है और अभी प्राथमिकता बागपत जिले के किसानों को यह खाद उपलब्ध कराने की है। धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाने की योजना है।

गांव-गांव पहुंची नई खाद

कंपनी की प्रतिनिधि मिली पांडे और हितेश कुमार ने खेकड़ा, बड़ागांव, सुन्हैड़ा, सतलावरपुर खेड़ी, तकरपुर, बसी, पाबला, बंदपुर, मऊ, सांकरौद, गौरीपुर निवाड़ा, काट्ठा सहित लगभग दो दर्जन गांवों में किसानों के साथ बैठकें कीं।

इन बैठकों के दौरान किसानों को नई मैग्नीशियम सल्फेट खाद के उपयोग की जानकारी दी गई और कई खेतों में इसका प्रयोग भी कराया गया।

किसानों का अनुभव: बेहतर परिणाम

प्रेसवार्ता में उपस्थित किसान प्रतिनिधि आदि प्रकाश, सोनू त्यागी और मोहित कुमार ने बताया कि उन्होंने इस खाद का प्रयोग गेहूं, धान, ज्वार, गन्ना और आलू जैसी फसलों में किया।

किसानों के अनुसार—

  • गेहूं और धान के दाने आकार में बड़े बने।
  • गन्ने की फसल मोटी और स्वस्थ दिखाई दी।
  • फसलों की समग्र गुणवत्ता में सुधार देखा गया।

किसानों का कहना है कि मैग्नीशियम सल्फेट पौधों में हरित लवक (क्लोरोफिल) निर्माण में सहायक होता है, जिससे फसल की वृद्धि और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है।

स्थानीय स्तर पर कृषि को मजबूती

बागपत जैसे कृषि आधारित जिले में स्थानीय स्तर पर खाद निर्माण की शुरुआत किसानों के लिए राहतभरी खबर मानी जा रही है। इससे न केवल समय पर खाद उपलब्ध होगी, बल्कि परिवहन लागत में भी कमी आने की संभावना है।

कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाकर अधिक किसानों तक इस उत्पाद को पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्रीय कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

बागपत (उत्तर प्रदेश) से पत्रकार ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट
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कोर्ट ने कसा शिकंजा: बेलेबल वारंट जारी होते ही गवाह पहुंचे अदालत, दर्ज कराई गवाही

हरियाणा के पानीपत स्थित सेशन कोर्ट में चल रहे बहुचर्चित मामले में आखिरकार वह मोड़ आ ही गया, जब अदालत की सख्ती के बाद मुख्य गवाह को पेश होना पड़ा। लगातार गैरहाजिरी से नाराज कोर्ट ने 10,000 रुपये का जमानती (बेलेबल) वारंट जारी किया, जिसके बाद गवाह महेंद्र सिंह चावला 2 मार्च को अदालत पहुंचे और अपनी गवाही दर्ज कराई।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मुख्य आरोपी और अन्य आरोपियों से जुड़ा हुआ है। इस केस में कार्तिक उर्फ राजू, तमराज उर्फ ताम्रध्वज उर्फ गोलू, नीरज उर्फ मोनू और नीलम उर्फ मोनू भी आरोपी हैं। सभी आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं और सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किए जा रहे हैं।

मामले में महेंद्र सिंह चावला मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता हैं। उनकी गवाही इस केस में बेहद अहम मानी जा रही है, लेकिन बीते कुछ समय से वे अदालत में पेश नहीं हो रहे थे।

6 फरवरी: मेडिकल आधार पर ली थी छूट

6 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान गवाह ने अपने वकील के माध्यम से अदालत से पेशी में छूट मांगी। आवेदन में बताया गया कि उनके बाएं कंधे में गोली लगने के पुराने घाव के कारण तेज दर्द है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए एक दिन की छूट दे दी और शेष गवाही के लिए 17 फरवरी की तारीख तय की।

17 फरवरी: कोर्ट का सख्त रुख

17 फरवरी को जब दोबारा सुनवाई हुई और सभी आरोपी वीसी से जुड़े, तब महेंद्र चावला ने फिर से कंधे के दर्द का हवाला देते हुए पेशी से छूट की अर्जी दी। इस बार उन्होंने कोई मेडिकल प्रमाण पत्र अदालत में पेश नहीं किया।

अदालत ने पिछली तारीखों का रिकॉर्ड देखा और पाया कि 15 जनवरी 2026 को भी वे स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थित रहे थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ‘सीआरपीसी की धारा 311 के तहत अर्जी खारिज होने के बाद से गवाह जानबूझकर अपनी गवाही से बचते प्रतीत होते हैं।’ इसके साथ ही छूट की अर्जी नामंजूर कर दी गई।

जारी हुआ 10 हजार का बेलेबल वारंट

गवाह के रवैये से नाराज अदालत ने 10,000 रुपये का जमानती वारंट जारी कर दिया। साथ ही 27 फरवरी 2026 के लिए समान राशि का जुर्माना भी तय किया गया।

अदालत की सख्ती का असर साफ दिखाई दिया। 2 मार्च को महेंद्र सिंह चावला पानीपत सेशन कोर्ट में उपस्थित हुए और अपनी गवाही दर्ज कराई।

आगे क्या?

कोर्ट ने आगे की गवाही की प्रक्रिया जारी रखते हुए अगली सुनवाई 5 मार्च के लिए निर्धारित की है।

यह घटनाक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि न्यायालय गवाही जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही को हल्के में नहीं लेता। कानून की प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने के लिए अदालत का यह सख्त रुख न्यायिक व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है।

पानीपत (हरियाणा) से पत्रकार ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट
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ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की राष्ट्रीय बैठक में बड़ा ऐलान

ई-चालान के दुरुपयोग और टोल वसूली के खिलाफ 15 मई से देशव्यापी चक्काजाम की चेतावनी

नई दिल्ली से – ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट

देश के सड़क परिवहन उद्योग में उबाल साफ दिखाई दे रहा है। राजधानी नई दिल्ली में आयोजित (AIMTC) की तीसरी राष्ट्रीय गवर्निंग बॉडी बैठक में ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े शीर्ष नेताओं ने ई-चालान प्रणाली और टोल वसूली को लेकर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराते हुए 15 मई 2026 से राष्ट्रव्यापी चक्काजाम की तैयारी का संकेत दे दिया है।

बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने की, जबकि चेयरमैन डॉ. जी. आर. शनमुगप्पा सहित देशभर से आए पदाधिकारियों, राज्य इकाइयों और वरिष्ठ परिवहन प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।


राष्ट्रीय परिवहन नीति की मांग

बैठक में यह स्पष्ट कहा गया कि सड़क परिवहन देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन वर्तमान नीतिगत विसंगतियों ने इस क्षेत्र को संकट की स्थिति में ला खड़ा किया है।

मुख्य मांगें रहीं:

  • पूरे देश में समान मोटर वाहन कर व्यवस्था
  • कंसाइनर द्वारा ट्रांजिट इंश्योरेंस अनिवार्य किया जाए
  • परमिट नियमों का सरलीकरण
  • डिजिटल अनुपालन के लिए समग्र और व्यावहारिक नीति

नेताओं का कहना था कि यदि लॉजिस्टिक्स लागत कम नहीं की गई तो “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएगा।


ई-चालान प्रणाली पर गंभीर सवाल

ई-चालान को लेकर बैठक में सबसे तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

नेतृत्व का आरोप है कि:

  • कई मामलों में केवल स्थिर (स्टैटिक) फोटो के आधार पर चालान जारी किए जा रहे हैं।
  • वाहन किसी अन्य राज्य में होने के बावजूद अलग राज्य से चालान जारी हो रहे हैं।
  • वैज्ञानिक रूप से सत्यापित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का अभाव है।
  • शिकायत निवारण के लिए प्रभावी और समयबद्ध तंत्र नहीं है।

संगठन ने मांग रखी कि हर ई-चालान के साथ सीसीटीवी फुटेज या बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग जैसे प्रमाण अनिवार्य हों। केवल फोटो आधारित चालान को अवैध माना जाए और वाहन को ब्लैकलिस्ट करने की शक्ति केवल न्यायालय के पास हो।


टोल नीति पर पारदर्शिता की मांग

बैठक में टोल टैक्स वसूली को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया गया।

चेयरमैन डॉ. शनमुगप्पा ने कहा कि कई स्थानों पर पूंजी लागत वसूल होने के बाद भी 100% टोल वसूला जा रहा है, जबकि पहले नियम के अनुसार रख-रखाव हेतु 40% तक ही टोल लिया जाना चाहिए।

फास्टैग से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों पर भी चिंता व्यक्त की गई। संगठन ने सरकार से पारदर्शी और न्यायसंगत टोल नीति लागू करने की मांग की।


छोटे ऑपरेटरों की आजीविका पर संकट

देश में 80–85% वाणिज्यिक वाहन छोटे ऑपरेटरों और मालिक-चालकों के हाथों में हैं। बढ़ती ईंधन कीमतें, टोल दरें, ई-चालान जुर्माने और जब्ती की कार्यवाही ने उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।

नेतृत्व का कहना है कि यह सिर्फ उद्योग का संकट नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी का सवाल है।


अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे

बैठक में निम्न विषयों पर भी चर्चा हुई:

  • बॉर्डर चेकपोस्ट और आरटीओ फ्लाइंग स्क्वाड के उत्पीड़न का विरोध
  • बसों में वाणिज्यिक माल ढुलाई पर सुरक्षा और जीएसटी संबंधी चिंता
  • ए.आई.एस.-140 आधारित वी.एल.टी.डी. अनिवार्यता को अव्यावहारिक बताया गया
  • ऑटोमेटेड फिटनेस स्टेशन (ATS) की अनिवार्यता से हो रही परेशानी

जहां ATS उपलब्ध नहीं हैं, वहां मैनुअल फिटनेस परीक्षण जारी रखने की मांग दोहराई गई।


15 मई 2026: निर्णायक तारीख

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि 15 मई 2026 तक सरकार ने लंबित मुद्दों पर न्यायसंगत समाधान नहीं दिया, तो देशव्यापी अनिश्चितकालीन चक्काजाम और हड़ताल की जाएगी।

संगठन मीडिया के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान भी चलाएगा ताकि आम नागरिक इन व्यवस्थागत समस्याओं को समझ सकें।


निष्कर्ष

नई दिल्ली में हुई यह बैठक केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि सड़क परिवहन उद्योग की बढ़ती बेचैनी का संकेत थी।

ई-चालान, टोल नीति, फिटनेस नियम और कर संरचना जैसे मुद्दे अब प्रशासनिक फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगे। यदि समाधान नहीं निकला तो 15 मई 2026 देश की सड़कों पर बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।


लेखिका: ऊषा महाना
नई दिल्ली

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सतलोक आश्रम शामली में सेवा और संस्कार की मिसाल

बोध दिवस समागम के दूसरे दिन 6 दहेज मुक्त विवाह, 40 यूनिट रक्तदान

बिड़ौली/झिंझाना (शामली)। जनपद स्थित में संत शिरोमणि के पावन बोध दिवस पर आयोजित तीन दिवसीय समागम का दूसरा दिन सेवा, संस्कार और समाज सुधार की प्रेरणादायी गतिविधियों के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्ति और उत्साह से भर दिया।

यह आयोजन के मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है। दिन की शुरुआत नित्यनियम और सत्संग से हुई, जिसमें संत गरीबदास जी महाराज की शिक्षाओं, सत्यभक्ति और मानव कल्याण के संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम भी है।

दहेज मुक्त विवाह: समाज को सशक्त संदेश

समागम के दूसरे दिन 6 जोड़ों का दहेज मुक्त रमैणी विवाह सादगीपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराया गया। बिना किसी दहेज और आडंबर के हुए इन विवाहों ने समाज को एक मजबूत संदेश दिया कि वैवाहिक संस्कार प्रेम, विश्वास और समानता पर आधारित होने चाहिए, न कि लेन-देन की प्रथा पर। वैदिक मंत्रोच्चारण और संतवाणी के बीच नवदम्पतियों को आशीर्वाद प्रदान किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे दहेज प्रथा के विरुद्ध एक सार्थक पहल बताया।

रक्तदान शिविर: सेवा ही सच्ची भक्ति

मानव सेवा को सर्वोपरि मानते हुए आश्रम परिसर में रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया। युवाओं और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कुल 40 यूनिट रक्तदान किया। यह रक्त जरूरतमंद मरीजों के उपचार के लिए समर्पित किया गया। राज्य सेवादार हरदेश दास ने कहा कि “रक्तदान महादान है, इससे बढ़कर कोई सेवा नहीं।”

आध्यात्मिक प्रदर्शनी और सेवा प्रकल्प

आश्रम में आयोजित आध्यात्मिक प्रदर्शनी में संत गरीबदास जी महाराज और के दिव्य मिलन, सतलोक दर्शन और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी झांकियां प्रदर्शित की गईं। श्रद्धालुओं ने इन झांकियों को विशेष रुचि से देखा और आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात किया।

साथ ही अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत जरूरतमंद परिवारों के लिए बनाए जा रहे आवास सेवा प्रकल्प की जानकारी भी साझा की गई। यह पहल समाज के कमजोर वर्गों को सहारा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

समागम का दूसरा दिन यह संदेश देकर संपन्न हुआ कि जब भक्ति के साथ सेवा और समाज सुधार का संकल्प जुड़ जाता है, तब धार्मिक आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि परिवर्तन का माध्यम बन जाते हैं।


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केरटू उपकेंद्र पर मेंटेनेंस कार्य, 3 घंटे बाधित रहेगी बिजली आपूर्ति

बिड़ौली/झिंझाना (शामली)। क्षेत्रवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। विद्युत विभाग द्वारा 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र केरटू पर निर्धारित मेंटेनेंस कार्य के चलते शनिवार, 28 फरवरी 2026 को करीब तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।

विभाग की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार दोपहर 01:00 बजे से 04:00 बजे तक विद्युत सप्लाई पूरी तरह बंद रहेगी। इस दौरान उपकेंद्र पर आवश्यक रखरखाव और तकनीकी कार्य किए जाएंगे।

भविष्य में मिलेगी बेहतर सप्लाई

उपखंड अधिकारी झिंझाना जितेंद्र कुमार ने बताया कि यह मेंटेनेंस कार्य उपभोक्ताओं को भविष्य में बेहतर, सुरक्षित और सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र के सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि निर्धारित समय के दौरान अपनी वैकल्पिक व्यवस्था पहले से सुनिश्चित कर लें और विभागीय कार्य में सहयोग प्रदान करें।

इन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर

केरटू उपकेंद्र से जुड़े गांवों और मोहल्लों में इस अवधि के दौरान बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी। हालांकि विभाग ने आश्वस्त किया है कि निर्धारित कार्य पूरा होते ही सप्लाई तुरंत बहाल कर दी जाएगी।

ऐसे में उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि आवश्यक उपकरणों को पहले से चार्ज कर लें और जरूरी कार्य समय से पहले निपटा लें, ताकि असुविधा से बचा जा सके।


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🕉️ में संत शिरोमणि बोध दिवस समागम का भव्य शुभारंभ, पहले दिन उमड़ा आस्था का जनसैलाब

बिड़ौली/झिंझाना/शामली।

जनपद शामली स्थित सतलोक आश्रम में संत शिरोमणि संत गरीबदास जी महाराज के पावन बोध दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय भव्य आध्यात्मिक समागम का शुभारंभ गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और अनुशासनपूर्ण वातावरण में हुआ। पहले ही दिन सुबह से शामली सहित आसपास के जनपदों एवं विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु आश्रम पहुंचकर सत्संग, सेवा और भंडारे में सहभागी बने।

🌅 नित्य नियम से हुआ कार्यक्रम का आरंभ

समारोह का शुभारंभ प्रातःकालीन नित्य नियम, ध्यान एवं भक्ति पाठ से हुआ। इसके पश्चात मुख्य सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने संत गरीबदास जी महाराज के जीवन प्रसंगों, उनकी आध्यात्मिक साधना और बोध दिवस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि बोध दिवस आत्मिक जागृति का प्रतीक है, जो मानव को सच्ची भक्ति और सतमार्ग की ओर अग्रसर करता है।

📖 निर्गुण भक्ति परंपरा के अग्रदूत

सत्संग में बताया गया कि संत गरीबदास जी महाराज निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संतों में रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लगभग दस वर्ष की आयु में गौचारण के दौरान उन्हें परम संत का साक्षात्कार हुआ। नामदीक्षा प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने अपनी अमृतवाणी के माध्यम से मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य, सतभक्ति और मोक्ष मार्ग का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।

🎨 आध्यात्मिक प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

समागम के अवसर पर आश्रम परिसर में भव्य आध्यात्मिक प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में संत गरीबदास जी एवं कबीर साहेब के दिव्य मिलन, नामदीक्षा प्रसंग और सतलोक दर्शन को चित्रों एवं आकर्षक मॉडलों के माध्यम से दर्शाया गया। साथ ही सृष्टि रचना, शास्त्रसम्मत भक्ति और मानव जीवन के उद्देश्य जैसे विषयों को सरल और तथ्यपरक शैली में प्रस्तुत किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने गहरी रुचि से देखा।

🍛 विशाल भंडारा, सेवा में समर्पण

प्रथम दिवस पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें देशी घी से निर्मित लड्डू, जलेबी, हलवा, पूड़ी, सब्जी और रायता सहित सात्विक प्रसाद हजारों श्रद्धालुओं को वितरित किया गया। भोजन व्यवस्था में लगे सेवादारों ने अनुशासन और समर्पण भाव के साथ व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया, जिससे पूरे आयोजन में सुव्यवस्था का वातावरण बना रहा।

🙏 मार्गदर्शन में आयोजित समागम

यह तीन दिवसीय समागम जगतगुरु संत के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। प्रथम दिवस का समापन सायंकालीन सत्संग एवं भक्ति कार्यक्रमों के साथ हुआ।

आयोजकों के अनुसार यह आध्यात्मिक आयोजन 26, 27 और 28 फरवरी तक चलेगा। श्रद्धालुओं से परिवार सहित अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर सत्संग एवं भंडारे का लाभ उठाने की अपील की गई है।


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भोपाल में ट्रांसपोर्ट उद्योग की आवाज़: ए.आई.एम.टी.सी. की मध्य प्रदेश सरकार से अहम बैठक

नई दिल्ली/भोपाल। देश के ट्रांसपोर्ट उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर (ए.आई.एम.टी.सी.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भोपाल का दौरा किया। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और परिवहन मंत्री से विस्तृत चर्चा हुई। बैठक का केंद्र बिंदु था—स्टेज कैरिज बसों में वाणिज्यिक सामान ढुलाई का प्रस्ताव, ऑटोमेटेड फिटनेस स्टेशनों (ए.टी.एस.) की अनिवार्यता, और परिवहन व्यवसायियों से जुड़े अन्य व्यावहारिक मुद्दे।


स्टेज कैरिज बसों में कार्गो ले जाने के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध

भोपाल स्थित में आयोजित बैठक में ए.आई.एम.टी.सी. प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि राज्य परिवहन उपक्रम (एस.टी.यू.) की स्टेज कैरिज बसों में वाणिज्यिक सामान ले जाने की अनुमति दी जाती है, तो इसका सीधा और गंभीर असर ट्रक व्यवसाय पर पड़ेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल  ने अपने तर्क रखते हुए कहा—

  • इससे ट्रक ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान होगा।
  • जीएसटी चोरी की आशंकाएँ बढ़ सकती हैं।
  • यात्रियों की सुरक्षा से समझौता हो सकता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सड़क सुरक्षा देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है, और किसी भी व्यवस्था में यात्री सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।

ए.आई.एम.टी.सी. ने इस प्रस्ताव के विरोध में विभाग को औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा और इसे तत्काल स्थगित करने की मांग की।


ऑटोमेटेड फिटनेस स्टेशन (ए.टी.एस.) और मैनुअल फिटनेस का मुद्दा

बैठक में एक अन्य प्रमुख विषय रहा—ऑटोमेटेड फिटनेस स्टेशनों की अनिवार्यता।

परिवहन व्यवसायियों का कहना है कि प्रदेश में ए.टी.एस. की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है, जबकि मैनुअल फिटनेस लगभग बंद कर दी गई है। इससे—

  • वाहन मालिकों को अनावश्यक देरी,
  • आर्थिक बोझ,
  • और प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया कि जब तक ए.टी.एस. की व्यवस्था पूरी तरह सुलभ और व्यवस्थित नहीं हो जाती, तब तक व्यवहारिक समाधान निकाला जाए।


परिवहन मंत्री से मुलाकात: समस्याओं का विस्तार से प्रस्तुतिकरण

ए.आई.एम.टी.सी. के प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री से भी मुलाकात की।

इस दौरान निम्न मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए—

  • स्टेज एवं कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में अवैध रूप से वाणिज्यिक सामान की ढुलाई
  • वाहन खरीद पर एम.आर.पी. के आधार पर जीएसटी लगाना, जबकि इनवॉइस वैल्यू अधिक तर्कसंगत आधार है
  • आर.टी.ओ. फ्लाइंग स्क्वाड द्वारा सड़क पर कथित उत्पीड़न
  • ट्रकों में वी.एल.टी.डी. की अनिवार्यता से जुड़ा आर्थिक दबाव


राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल ने इन सभी बिंदुओं पर मंत्री से हस्तक्षेप कर समाधान निकालने का आग्रह किया। मंत्री ने धैर्यपूर्वक सभी बातों को सुना और सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।


संयुक्त प्रयास से समाधान की सहमति

बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि ए.आई.एम.टी.सी. और मध्य प्रदेश परिवहन विभाग मिलकर इन विषयों को केंद्र सरकार के स्तर पर भी उठाएंगे, ताकि दीर्घकालिक और संतुलित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

प्रतिनिधिमंडल में मध्य प्रदेश टीम के सदस्य—विजय कालरा, हरीश डाबर, राकेश तिवारी, अमरजीत सिंह बग्गा, सी. एल. मुकाती, चतर सिंह भाटी, कमल पंजवानी, मोहित डाभी और दीपक खंडेलवाल—उपस्थित रहे।


निष्कर्ष: संतुलन, सुरक्षा और पारदर्शिता की मांग

यह दौरा केवल एक औपचारिक बैठक नहीं था, बल्कि ट्रांसपोर्ट उद्योग की जमीनी समस्याओं को नीति-निर्माताओं तक पहुँचाने का गंभीर प्रयास था।

ए.आई.एम.टी.सी. ने स्पष्ट कर दिया है कि वह—

  • ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के हितों की रक्षा,
  • सुरक्षित परिवहन व्यवस्था,
  • और पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रियाओं

के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य और केंद्र स्तर पर इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, भोपाल में हुई यह बैठक ट्रांसपोर्ट जगत के लिए एक अहम संकेत जरूर मानी जा रही है।


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नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट

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