जागो समाज: श्रद्धा के साथ विवेक, स्वाभिमान और समानता भी जरूरी

विशेष रिपोर्ट | रामलाल यादव, ब्यूरोचीफ, राजस्थान
समझो भारत | राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल

“जब श्रद्धा के साथ स्वाभिमान, समानता और स्वतंत्रता का सवाल सामने आए, तब हमें क्या करना चाहिए?”

महंत रामानंद साहेब झड़स का यह सवाल केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा प्रश्न नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और आत्मसम्मान से जुड़ा एक गंभीर विचार है। उनके अनुसार पंथ श्री हजुर आचार्य अर्धनाम साहेब के विश्व बंधुत्व तथा सद्गुरु कबीर के आत्मखोज और मानवतावादी संदेश को समझने की आवश्यकता आज पहले से कहीं अधिक है।

बुद्ध से लेकर संत कबीर, संत रविदास और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर तक अनेक सामाजिक चिंतकों और महापुरुषों ने मनुष्य की गरिमा, समानता और स्वतंत्रता पर जोर दिया। उनके विचारों की मूल भावना यही रही कि जन्म, जाति, सामाजिक स्थिति या किसी अन्य पहचान के आधार पर किसी मनुष्य को दूसरे से छोटा-बड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

श्रद्धा हो, लेकिन विवेक के साथ

समाज में श्रद्धा का अपना महत्व है। लोग धार्मिक परंपराओं, संतों और आध्यात्मिक मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान रखते हैं। लेकिन श्रद्धा का अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति अपना विवेक किसी दूसरे के हाथों सौंप दे।

किसी भी विचार, परंपरा या धार्मिक व्यवस्था को समझने के लिए सवाल करना गलत नहीं है। बल्कि कई बार सवाल ही व्यक्ति को सत्य के करीब ले जाते हैं।

यही कारण है कि समाज के सामने यह विचार रखने की जरूरत है कि क्या कहीं भेदभाव की पुरानी मानसिकता नए धार्मिक, सामाजिक या सांस्कृतिक रूपों में तो कायम नहीं है?

भेदभाव हमेशा खुले तौर पर दिखाई दे, यह जरूरी नहीं। कभी वह परंपरा के नाम पर सामने आता है, कभी सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर और कभी धार्मिक पदवी या कर्मकांड के आवरण में।

ऐसे में जरूरी है कि भावनाओं के साथ-साथ विवेक का भी इस्तेमाल किया जाए।

अगर सहयोग स्वीकार है तो सम्मान क्यों नहीं?

समाज में अक्सर धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों को लोग श्रद्धा और विश्वास के कारण अन्न, आर्थिक सहयोग, राशन अथवा अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं।

यह सहयोग समाज की उदारता और श्रद्धा का प्रतीक है।

लेकिन यदि किसी व्यक्ति या समूह को समाज का सहयोग स्वीकार है, तो उसी समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान और बराबरी को स्वीकार करना भी उतना ही आवश्यक होना चाहिए।

सवाल बिल्कुल सरल है—

अगर हमारा अन्न स्वीकार है तो हमारा सम्मान क्यों नहीं?

अगर हमारा सहयोग स्वीकार है तो हमारे साथ बराबरी का व्यवहार क्यों नहीं?

अगर हमारी श्रद्धा स्वीकार है तो हमारी मानवीय गरिमा का सम्मान क्यों नहीं?

इन सवालों का उद्देश्य किसी व्यक्ति का अपमान करना नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवहार में समानता की कसौटी को सामने रखना है।

व्यक्ति नहीं, मानसिकता पर सवाल

किसी व्यक्ति की जाति, वेशभूषा, धार्मिक पहचान या पदवी उसे दूसरे मनुष्य से ऊपर नहीं बनाती।

सम्मान विचारों का हो सकता है, आचरण का हो सकता है और मानवता का हो सकता है। लेकिन यदि कहीं मनुष्य को जन्म या पहचान के आधार पर छोटा समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो उस पर शांतिपूर्ण और तर्कपूर्ण सवाल उठना स्वाभाविक है।

समाज को किसी व्यक्ति के खिलाफ नफरत या बहिष्कार का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। इसके बजाय उसके विचार और आचरण को परखना चाहिए।

क्या वह समानता की बात करता है?

क्या वह शिक्षा और स्वतंत्र सोच को प्रोत्साहित करता है?

क्या वह समाज को जोड़ने का प्रयास करता है?

क्या वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संवैधानिक अधिकारों की जानकारी देता है?

या वह लोगों को अंधानुकरण और निर्भरता की ओर ले जाता है?

यही कसौटी अधिक महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

कबीर, रविदास, बुद्ध और आंबेडकर की चेतना

संत कबीर ने अपने समय में पाखंड और बाहरी आडंबर पर सवाल उठाए। संत रविदास ने ऐसे समाज की कल्पना की जिसमें मनुष्य के साथ भेदभाव न हो। बुद्ध ने करुणा, प्रज्ञा और समता पर बल दिया। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों को आधुनिक भारत की लोकतांत्रिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार बनाया।

इन विचारों को केवल पुस्तकों या भाषणों तक सीमित रखने के बजाय जीवन में उतारने की जरूरत है।

यदि हम किसी महापुरुष को अपना मार्गदर्शक मानते हैं, तो हमें यह भी देखना चाहिए कि हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार में उनके मूल विचार कितने दिखाई देते हैं।

सवाल करना जागृति है

सवाल करना अपराध नहीं है।

सवाल करना जागृति है।

विवेक करना कमजोरी नहीं है।

विवेक करना स्वाभिमान है।

किसी दावे को प्रमाण के आधार पर परखना धर्म या परंपरा का अपमान नहीं, बल्कि स्वस्थ सामाजिक सोच का हिस्सा है।

आज के दौर में समाज को शिक्षा के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संवैधानिक चेतना की भी आवश्यकता है। बच्चों को केवल परंपराएँ याद कराने के बजाय उन्हें यह भी सिखाना होगा कि वे किसी भी बात को समझें, प्रश्न करें और तथ्य के आधार पर अपना निर्णय लें।

समाज की ताकत संख्या से ज्यादा चेतना में है

किसी समाज की वास्तविक शक्ति केवल उसकी जनसंख्या में नहीं होती।

उसकी असली ताकत होती है—

शिक्षा, संगठन, जागरूकता, स्वाभिमान, स्वतंत्र सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संवैधानिक चेतना।

जो समाज सवाल करना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे अपने निर्णय लेने की क्षमता दूसरों को सौंप सकता है।

इसलिए समाज को यह तय करना होगा कि श्रद्धा और विवेक एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों साथ चल सकते हैं।

दान देना मानवता है।

सहयोग करना उदारता है।

श्रद्धा रखना अधिकार है।

लेकिन अपने अपमान को स्वीकार करना किसी की मजबूरी नहीं होना चाहिए।

भेदभाव के खिलाफ रास्ता संविधान का हो

यदि किसी व्यक्ति को वास्तविक भेदभाव का सामना करना पड़ता है तो प्रतिक्रिया हिंसा, नफरत या भीड़ के रूप में नहीं होनी चाहिए।

पहले तथ्य जुटाए जाएँ।

स्थिति को समझा जाए।

सच्चाई की पुष्टि की जाए।

शांतिपूर्ण तरीके से सवाल किया जाए।

और आवश्यकता होने पर कानून तथा संवैधानिक संस्थाओं की मदद ली जाए।

यही लोकतांत्रिक और जिम्मेदार रास्ता है।

हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति या धर्म को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उस मानसिकता पर सवाल उठाना होना चाहिए जो एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य से छोटा समझती है।

बच्चों को श्रद्धा के साथ स्वाभिमान भी सिखाइए

आज की पीढ़ी को यह समझाना जरूरी है कि सम्मान दो और सम्मान लो।

किसी से घृणा मत करो।

किसी के साथ अन्याय मत करो।

लेकिन अपने साथ होने वाले अन्याय को भी सामान्य मत मानो।

गलत का जवाब हिंसा से नहीं, ज्ञान से दो।

नफरत से नहीं, समानता से दो।

अंधविश्वास से नहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दो।

और किसी परंपरा को केवल इसलिए सही मत मानो कि वह बहुत पुरानी है। उसे समझिए, परखिए और उसके मानवीय प्रभाव पर विचार कीजिए।

असली जागरण भीतर से शुरू होता है

सद्गुरु कबीर की चेतना का एक महत्वपूर्ण पहलू आत्मबोध भी है।

दूसरों की गलतियाँ तलाशने से पहले स्वयं के भीतर झाँकना भी जरूरी है।

क्या मैं स्वयं किसी दूसरे मनुष्य को छोटा समझता हूँ?

क्या मैं किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति, आर्थिक स्थिति या सामाजिक पहचान के आधार पर अलग व्यवहार करता हूँ?

क्या मैं अपने लिए समानता चाहता हूँ लेकिन दूसरों को समान अधिकार देने में संकोच करता हूँ?

यदि हम इन सवालों का ईमानदारी से जवाब तलाश लें, तो सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत वास्तव में हमारे भीतर से हो सकती है।

जागो समाज, लेकिन नफरत के लिए नहीं

समाज को जागना है, लेकिन किसी के खिलाफ नफरत के लिए नहीं।

जागना है अपने अधिकारों के लिए।

जागना है अपने स्वाभिमान के लिए।

जागना है शिक्षा के लिए।

जागना है समानता के लिए।

जागना है वैज्ञानिक सोच के लिए।

और जागना है उस हर मानसिकता के खिलाफ, जो मनुष्य को मनुष्य से कमतर समझती है।

महंत रामानंद साहेब झड़स का संदेश इसी व्यापक सामाजिक चेतना की ओर संकेत करता है कि श्रद्धा के साथ विवेक, धर्म के साथ मानवता और परंपरा के साथ प्रश्न करने की क्षमता भी जरूरी है।

किसी व्यक्ति की बात केवल इसलिए स्वीकार न करें कि उसके नाम के साथ कोई बड़ी पदवी जुड़ी है। उसके विचार और आचरण को भी देखिए।

सवाल कीजिए।
तर्क कीजिए।
प्रमाण माँगिए।
सत्य को समझिए।
और फिर अपना निर्णय स्वयं कीजिए।

क्योंकि स्वाभिमान का अर्थ किसी दूसरे का अपमान करना नहीं है। स्वाभिमान का अर्थ है—हर मनुष्य की गरिमा को स्वीकार करना और अपने साथ भी गरिमापूर्ण व्यवहार की अपेक्षा रखना।

मानवता सर्वोपरि हो, समानता जीवन का आधार हो, स्वतंत्रता स्वाभिमान बने और संविधान अधिकारों की रक्षा का मार्ग दिखाए—यही एक जागरूक समाज की पहचान हो सकती है।

सद्गुरु कबीर के संदेश को केवल मानने के बजाय उसे समझने, आत्मसात करने और जीवन में उतारने की जरूरत है। सत्य को सत्य के रूप में स्वीकार करने और असमानता को असमानता के रूप में पहचानने का साहस ही वास्तविक सामाजिक जागरण की शुरुआत है।

साहेब बंदगी साहेब!

विशेष रिपोर्ट: रामलाल यादव, ब्यूरोचीफ, राजस्थान
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रसोइया बहनों के सम्मान से लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा तक—शामली में मोहित बेनीवाल ने बांटे कैशलेस चिकित्सा कार्ड

शामली, 23 अगस्त 2026।
बच्चों की पढ़ाई की बात हो या उनके बेहतर स्वास्थ्य की, दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर बच्चे स्वस्थ रहेंगे, तभी वे मन लगाकर पढ़ सकेंगे और आगे चलकर समाज व देश के विकास में अपनी भूमिका निभा सकेंगे। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए शामली में पीएम पोषण योजना से जुड़े रसोइयों के सम्मान और उनके लिए कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सहारनपुर रोड स्थित राधा वाटिका, निकट साईं धाम, शामली में आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य मोहित बेनीवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी आलोक यादव ने की, जबकि संचालन अनुराग ने किया।

रसोइया बहनों के योगदान को मिला सम्मान

कार्यक्रम में पीएम पोषण योजना के अंतर्गत विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरित किए गए। इस दौरान मोहित बेनीवाल ने रसोइयों के काम की सराहना करते हुए कहा कि स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए तैयार होने वाला भोजन सिर्फ एक सरकारी योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा विषय है। विद्यालय में मिलने वाला पौष्टिक भोजन कई बच्चों के लिए उनके दैनिक पोषण का महत्वपूर्ण आधार भी बनता है।

मोहित बेनीवाल ने कहा कि स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ समाज की नींव बनते हैं और आने वाली पीढ़ी को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और पोषण पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है।

स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहित बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि पीएम पोषण योजना का उद्देश्य केवल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उनके बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में भी काम करना है। उन्होंने रसोइया बहनों की मेहनत और सेवा भावना को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

कैशलेस चिकित्सा कार्ड इसी दिशा में एक उपयोगी कदम माना जा रहा है, जिससे संबंधित लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने में सहूलियत मिल सकती है।

योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे—मोहित बेनीवाल

मोहित बेनीवाल ने इस मौके पर कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका कहना था कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आज किए जा रहे प्रयासों का सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं की सफलता तभी मानी जाएगी, जब उनका लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचे जिनके लिए योजनाएं बनाई गई हैं।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य वीरेंद्र सिंह, विधायक प्रश्न चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, पीएम पोषण योजना से जुड़ी रसोइया बहनें और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान रसोइयों के योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य से जुड़े विषय को भी प्रमुखता से सामने रखा गया। अंत में आयोजकों की ओर से कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों, अधिकारियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।

बच्चों के भविष्य से जुड़ी है ऐसी हर पहल

शामली में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात की याद दिलाता है कि बच्चों के बेहतर भविष्य की चर्चा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं है। उनके लिए पौष्टिक भोजन, स्वस्थ वातावरण और शिक्षा—इन तीनों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

पीएम पोषण योजना के तहत विद्यालयों में अपनी जिम्मेदारी निभाने वाली रसोइया बहनों के सम्मान और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर उठाया गया यह कदम इसी व्यापक सोच का हिस्सा दिखाई देता है।

खास रिपोर्ट: सुरेन्द्र सिंह निर्वाल, शामली, उत्तर प्रदेश
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आजादी के दीवानों की कुर्बानी को किया याद, योग साधकों ने मनाया स्वतंत्रता दिवस

शामली, उत्तर प्रदेश। स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का दिन नहीं, बल्कि उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन तक न्योछावर कर दिया। इसी भावना के साथ जन कल्याण योग सेवा ट्रस्ट द्वारा भूमिया खेड़ा स्थित योग केंद्र पर 15 अगस्त का कार्यक्रम हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गान के साथ हुई। इसके बाद योग साधकों ने योग साधना की और स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में देशभक्ति से जुड़े प्रसंगों, कविताओं और विचारों ने उपस्थित लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत किया।

इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक कोरियर ने कहा कि देश आज जिन उपलब्धियों और स्वतंत्रता का आनंद ले रहा है, उसके पीछे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष और बलिदान है। उन्होंने कहा कि आजादी के दीवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को स्वतंत्र कराया था। इसलिए नई पीढ़ी को स्वतंत्रता के इतिहास और उसके लिए किए गए संघर्ष को समझना चाहिए।

कार्यक्रम में ट्रस्ट की विभिन्न योग कक्षाओं के साधकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी की मौजूदगी में अध्यक्ष अशोक कोरियर के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया। तिरंगा फहराते ही पूरा परिसर देशभक्ति के भाव से भर उठा।

पदाधिकारियों का किया सम्मान

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान संस्था के पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया। साधकों ने ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी अरविन्द कौशिक और संगठन मंत्री सुनीत गुप्ता को पटका पहनाकर सम्मानित किया। इसके बाद संस्था के अध्यक्ष अशोक कोरियर को भी पटका पहनाकर सम्मान दिया गया।

कार्यक्रम में भूमिया खेड़ा योग केंद्र से केंद्र प्रमुख संजय गर्ग, अमन गोयल, डॉ. नरेश सैनी, अरविंद कौशिक, सुनीत गुप्ता, महिपाल, रूपेश, देशपाल, रेखा देवी, अंगूरी बहिन सहित अनेक साधक मौजूद रहे।

वहीं आनंद भवन केंद्र से केंद्र प्रमुख मनोज गोयल, अनिल कुमार, देवेन्द्र शर्मा, वेद पाल, उमेश खुरगान, कुलश्रेष्ठ सैनी, रामकुमार चक्की वाले सहित अन्य साधकों ने सहभागिता की। शुगर मिल योग केंद्र के केंद्र प्रमुख डॉ. कुलदीप सहित अन्य साधक भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

देशभक्ति के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति के गीतों और कविताओं ने माहौल को उत्साहपूर्ण बनाए रखा। अंत में वन्दे मातरम् के साथ समारोह का समापन हुआ। इसके बाद साधक संदीप मित्तल की ओर से उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।

पूरे कार्यक्रम में योग, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला। आयोजकों का कहना रहा कि ऐसे आयोजन लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा देते हैं।

रिपोर्ट: अरविंद कौशिक, शामली, उत्तर प्रदेश
“समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल के लिए विशेष रिपोर्ट

स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति के रंग में रंगा गढ़ी पुख़्ता सर्वहितकारी कन्या इंटर कॉलेज

गढ़ी पुख्ता/शामली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गरीब गुप्ता सर्वहितकारी कन्या इंटर कॉलेज में देशभक्ति और उत्साह से भरा कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय परिसर में सुबह से ही छात्राओं और शिक्षकों में खासा उत्साह देखने को मिला। तिरंगे की शान के बीच आयोजित समारोह में छात्राओं ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से देशप्रेम की भावना को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक नरेश सैनी द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके बाद छात्राओं ने देशभक्ति से ओतप्रोत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गीत, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया और पूरा वातावरण देशभक्ति के जज्बे से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. नीरज सैनी, जिला पंचायत सदस्य तथा विशिष्ट अतिथि राधेश्याम गिरी रहे। इस दौरान हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की टॉपर छात्राओं को सम्मानित किया गया। मेधावी छात्राओं का सम्मान कर उन्हें आगे भी इसी तरह मेहनत और लगन के साथ शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया गया।

विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष नीरज जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया। मुख्य अतिथि डॉ. नीरज सैनी और प्रबंधक नरेश सैनी ने छात्राओं को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

समारोह में डॉ. नीरज सैनी, मैनपाल सैनी, नरेश सैनी, नीरज जैन, महेश सैनी, संगीता सैनी, दीप्ति अरोड़ा, राधेश्याम गिरी, प्रवीण चौधरी, सुधीर फौजी, राजीव तोमर, कर्मवीर सभासद, सुखमाल सिंह, अंकित संगल, टेकचंद मित्तल, पंकज कौशिक, अशोक वर्मा, धर्मपाल शर्मा, अभिषेक अरोड़ा, अमित सैनी सभासद सहित कस्बे के अनेक वरिष्ठ नागरिक, शिक्षक-शिक्षिकाएं और सैकड़ों छात्राएं उपस्थित रहीं।

शिक्षा और देशभक्ति का सुंदर संगम

स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन छात्राओं के लिए केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना को समझने का अवसर भी रहा। मेधावी छात्राओं का सम्मान समारोह का खास आकर्षण रहा, जिसने अन्य विद्यार्थियों को भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दी।

विद्यालय परिसर में तिरंगे के नीचे गूंजते देशभक्ति के गीतों और छात्राओं की प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को यादगार बना दिया।

— ज़मीर आलम, विशेष संवाददाता
गढ़ी पुख्ता, जिला शामली, उत्तर प्रदेश

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हरियाली तीज पर सजी सावन की महफिल, महिलाओं ने झूले, गीत-संगीत और मेहंदी से मनाया उत्सव

गढ़ी पुख़्ता/शामली। सावन की रिमझिम फुहारों और हरियाली के बीच हरियाली तीज का पर्व कस्बे में उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। जैनपुरी मोहल्ले में ममता जैन के आवास पर आयोजित तीज कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक गीतों, झूलों, मेहंदी और नृत्य के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने उत्साहपूर्वक झूले की पींगें बढ़ाईं और एक-दूसरे को झुलाते हुए सावन के पारंपरिक गीत गाए। इसके साथ ही विभिन्न मनोरंजक खेलों और नृत्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

हरियाली तीज की खास रौनक उस समय देखने को मिली, जब मेहंदी प्रतियोगिता में महिलाओं ने अपने हाथों पर आकर्षक मेहंदी रचाई। सावन के गीतों पर महिलाओं ने शानदार नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को खुशनुमा बना दिया। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने एक-दूसरे को हरियाली तीज की शुभकामनाएं देते हुए आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।

आयोजन में

ममता जैन, रीना शर्मा, दिशा जैन, वंदना मित्तल, प्रीति सैनी, शिखा जैन, काजल, सीमा देवी, कविता संगल, मोनिका, स्मिता जैन, राधा रानी, नीलम जैन, ऋतु जैन, राधिका, सोनिया, प्रिया और रूबी सहित अनेक महिलाओं ने सहभागिता की।

सावन की परंपराओं से जुड़ा है तीज का उत्सव

हरियाली तीज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सावन की खुशियों, लोक परंपराओं और आपसी मेल-मिलाप से जुड़ा पर्व है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भी पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर मिलता है। गढ़ी पुख़्ता में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी खूबसूरत परंपरा की एक झलक रहा, जहां महिलाओं ने मिलकर त्योहार को यादगार बना दिया।

— ज़मीर आलम, विशेष संवाददाता
गढ़ी पुख़्ता, जिला शामली, उत्तर प्रदेश

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पायल बेचकर 6 लावारिस शवों को दी अंतिम विदाई: इंसानियत की ऐसी मिसाल, जहां गहनों से ज्यादा अनमोल है एक बेबस इंसान का सम्मान

मुजफ्फरनगर। कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जिन्हें पढ़कर इंसान कुछ देर के लिए खामोश हो जाता है। यह कहानी भी ऐसी ही है—एक ऐसी महिला की, जिसने जिंदगी में शायद यह तय कर लिया है कि किसी इंसान को दुनिया से विदा होते समय अकेला नहीं छोड़ा जाएगा, चाहे इसके लिए उसे अपने गहने ही क्यों न बेचने पड़ें।

मुजफ्फरनगर की क्रांतिकारी शालू सैनी लंबे समय से लावारिस और बेसहारा मृतकों के अंतिम संस्कार की सेवा से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति का दुनिया में कोई अपना नहीं बचा, उसकी अंतिम विदाई के समय समाज को उसका अपना बन जाना चाहिए।

हाल ही में अलग-अलग पुलिस थानों से 6 लावारिस शवों की सूचना मिली। अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे समय में शालू सैनी ने अपने पैरों की पायल उतारकर बेच दी और उससे प्राप्त धनराशि से इन छह मृतकों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया।

यह उनके लिए कोई पहला अवसर नहीं था। इससे पहले भी सेवा कार्य के लिए वह अपनी गले की चेन बेच चुकी हैं। उनका कहना है कि गहने दोबारा खरीदे जा सकते हैं, लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति को सम्मानजनक विदाई देने का अवसर बार-बार नहीं मिलता, जिसके लिए दुनिया में कोई आगे आने वाला न हो।

बेटी की शादी के लिए खरीदा था प्लॉट, बना दिया आश्रय का ठिकाना

शालू सैनी की सेवा की कहानी केवल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए एक प्लॉट लिया था। लेकिन बेसहारा माताओं और जरूरतमंदों की पीड़ा देखकर उनका मन बदल गया। उन्होंने उसी जमीन पर वृद्धाश्रम और अनाथालय तैयार करने का निर्णय लिया।

उनके इस फैसले में एक अलग ही सोच दिखाई देती है—अपने परिवार की जरूरत से पहले उन लोगों की चिंता, जिनके पास अपना कहने वाला कोई नहीं।

धर्म से ऊपर इंसानियत

शालू सैनी का दावा है कि पिछले कई वर्षों में वह 6,000 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करा चुकी हैं। इनमें अलग-अलग धर्मों से जुड़े लोग शामिल रहे हैं और उनके अनुसार अंतिम संस्कार संबंधित धर्म की परंपराओं के अनुरूप कराया जाता है।

उनकी सेवा का मूल भाव किसी जाति, धर्म या पहचान से नहीं, बल्कि इंसान होने से जुड़ा है। किसी अज्ञात व्यक्ति की आखिरी यात्रा में शामिल होना शायद समाज के सबसे कठिन और भावनात्मक कामों में से एक है।

“पैसे आते-जाते रहते हैं, लेकिन सम्मान सबसे बड़ा धर्म है”

शालू सैनी कहती हैं, “जिसका इस दुनिया में कोई नहीं होता, उसके लिए हमें ही तो बनना पड़ेगा। पैसे आते-जाते रहते हैं, लेकिन किसी लावारिस इंसान को सम्मान देना सबसे बड़ा धर्म है।”

उनका एक संदेश भी इस पूरी सेवा भावना को सरल शब्दों में बयान करता है—
“जीते जी सेवा, मरने के बाद सम्मान।”

दरअसल, अंतिम संस्कार केवल किसी मृत शरीर को विदा करना नहीं होता। यह उस इंसान के प्रति समाज की आखिरी जिम्मेदारी भी है। जिस व्यक्ति की जिंदगी की कहानी हम नहीं जानते, उसकी मौत के बाद कम से कम इतना जरूर किया जा सकता है कि उसे सम्मान के साथ विदा किया जाए।

समाज से सहयोग की अपील

इतने बड़े स्तर पर सेवा कार्य अकेले किसी एक व्यक्ति के लिए आसान नहीं है। अंतिम संस्कार, आश्रय और जरूरतमंदों की मदद जैसे कार्यों में संसाधनों की आवश्यकता होती है। शालू सैनी ने समाज के लोगों से इस सेवा अभियान में अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करने की अपील की है।

सहयोग एवं संपर्क: 8273189764

क्रांतिकारी शालू सैनी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट

“मुर्दों से प्रेम निभाना है”—एक सोच, जो समाज से सवाल करती है

हम अक्सर जीवन में अपने लोगों के लिए बहुत कुछ करने की बात करते हैं। लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति के लिए आगे आना, जिसका नाम तक हमें मालूम नहीं, शायद इंसानियत की सबसे कठिन परीक्षा है।

शालू सैनी की यह पहल समाज के सामने एक सवाल भी रखती है—अगर किसी इंसान के आखिरी सफर में उसके साथ चलने वाला कोई नहीं है, तो क्या समाज उसकी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त हो सकता है?

इस सवाल का उनका जवाब उनके काम में दिखाई देता है।

यह कहानी सिर्फ पायल बेचने की नहीं है। यह उस सोच की कहानी है, जिसमें इंसान की आखिरी जरूरत के सामने अपना सामान, अपना आराम और अपनी सुविधा छोटी लगने लगती है।

समझो भारत के लिए मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश से चीफ एडिटर ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

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बिडौली क्षेत्र में शान से लहराया तिरंगा, देशभक्ति के रंग में रंगे स्कूल और संस्थान

बिडौली/झिंझाना। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऊन ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों और कार्यालयों में देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। शनिवार को कई स्थानों पर तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान किया गया और विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से देश के प्रति अपने प्रेम और सम्मान का इज़हार किया।

झिंझाना क्षेत्र में एआईएमआईएम पार्टी कार्यालय, मदरसा अरबिया अजमातुल उलूम और उच्च प्राथमिक विद्यालय बिडौली सादात में स्वतंत्रता दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। विद्यालय में बच्चे तिरंगे के रंगों वाली वेशभूषा में पहुंचे तो पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में नजर आया।

कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्य वंदना अहलावत, पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज मोहम्मद इनाम, वार्ड अध्यक्ष मोहम्मद मुस्तकिम, अकरम खान, हाफिज आस मोहम्मद, हाफिज नवेद, पूर्व ग्राम प्रधान प्रत्याशी महबूब शाह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी दी और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान को याद किया। हाफिज मोहम्मद इनाम ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी विविधता में एकता है। देश में अलग-अलग बोलियां, वेशभूषाएं और परंपराएं होने के बावजूद हम सभी भारतीय होने के नाते एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

समारोह में बच्चों ने देशभक्ति गीतों पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। छोटी बच्चियों की देशभक्ति गीतों पर शानदार प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों पर विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

समारोह के समापन पर मुख्य अतिथियों ने विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित किए और सभी को मिठाई खिलाकर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं प्रधानाचार्य वंदना अहलावत ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर जयभगवान मास्टर, परशौकीन, अय्यूब, नफीस, शौकीन ग्राम महासचिव, मनव्वर, इकबाल, इस्माइल, तौफीक, सलमान, अशरफ ग्राम अध्यक्ष, चंदा, शाहनवाज, कय्यूम, इकबाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

खास रिपोर्ट: शाकिर अली, शामली, उत्तर प्रदेश
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