शामली/मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)। शामली जनपद में एक प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार से जुड़े कथित धर्म परिवर्तन के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस विषय को लेकर बघरा स्थित योग साधना यशवीर आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज ने सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताएं और आरोप सामने रखे हैं। वहीं दूसरी ओर संबंधित परिवार और पुलिस प्रशासन ने मामले को लेकर अपना पक्ष भी रखा है, जिसके चलते यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
स्वामी यशवीर महाराज द्वारा जारी वीडियो संदेश और लिखित बयान में दावा किया गया है कि शामली नगर के एक प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार के सदस्य का धर्म परिवर्तन कराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया स्वेच्छा से नहीं बल्कि कथित दबाव और ब्लैकमेलिंग के माध्यम से हुई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। स्वामी यशवीर महाराज ने यह भी आशंका जताई कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। उन्होंने प्रशासन से पूरे प्रकरण की गहन जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने पर विचार करेंगे।हालांकि, मामले में पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के अनुसार तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है। शामली के थाना प्रभारी सचिन शर्मा ने बताया कि जांच के दौरान संबंधित युवक आयुष मलिक ने पुलिस को बताया कि उसका इस्लाम धर्म की ओर झुकाव था और उसने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार किया है।
वहीं युवक के पिता देवराज मलिक ने परिवार के धर्म परिवर्तन संबंधी दावों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे स्वयं हिंदू धर्म का पालन करते हैं और हाल ही में विभिन्न हिंदू धार्मिक स्थलों की यात्रा भी कर चुके हैं। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कुछ तस्वीरें और अन्य जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।विशेषज्ञों का मानना है कि धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मामलों में कानून, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द—तीनों पहलुओं को संतुलित रूप से देखना आवश्यक है। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का धर्म अपनाने और उसका पालन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है, वहीं किसी प्रकार के अवैध दबाव, प्रलोभन या जबरदस्ती की शिकायत होने पर जांच और कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा। ऐसे में सभी पक्षों के दावों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।(नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए दावों पर आधारित हैं। पुलिस जांच जारी है और किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है।)
— ज़मीर आलम
विशेष संवाददाता, समझो भारत
शामली, उत्तर प्रदेश












