कैराना/कांधला (शामली): कभी-कभी हालात ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करते हैं, जहां इंसान खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करने लगता है। थाना कांधला क्षेत्र के गांव मलकपुर से सामने आया यह मामला भी कुछ ऐसा ही है, जहां एक युवक की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
गांव मलकपुर निवासी श्रीमती सानो, पत्नी शराफत, ने क्षेत्राधिकारी (सीओ) कैराना को शिकायती पत्र सौंपकर अपने बेटे जुनैद की आत्महत्या के मामले में न्याय की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि युवक को झूठे मुकदमों में फंसाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे परेशान होकर उसने अपनी जान दे दी।
⚖️ क्या है पूरा मामला?
शिकायत के मुताबिक, जुनैद पिकअप वाहन चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। परिजनों का कहना है कि सामान ढुलाई के दौरान कैराना क्षेत्र की एक युवती से उसका विवाद हुआ। आरोप है कि युवती ने किराया देने में टालमटोल की और बाद में उससे नजदीकी बढ़ाने का प्रयास किया।
परिजनों के अनुसार, जब जुनैद ने इस तरह के किसी संबंध से इंकार किया, तो वर्ष 2025 में उसके खिलाफ थाना कैराना में मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इस मामले में परिवार ने उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश भी प्राप्त किया था।
🧾 आरोप: साजिश और लगातार दबाव
परिवार का आरोप है कि इसके बाद विरोधी पक्ष ने एक और गंभीर मुकदमा दर्ज कराकर युवक और उसके परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश की।
लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक तनाव के चलते जुनैद गहरे अवसाद में चला गया। परिजनों के मुताबिक, 7 फरवरी 2026 को उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
परिवार यह भी दावा करता है कि आत्महत्या से पहले जुनैद ने एक वीडियो बनाया था, जिसमें उसने कुछ लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है।
🛑 कार्रवाई की मांग और सुरक्षा की अपील
शनिवार को श्रीमती सानो ने सीओ कैराना को शिकायती पत्र देकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, निष्पक्ष जांच कराने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
उनका कहना है कि पहले भी कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
📌 क्यों अहम है यह मामला?
यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि
- क्या झूठे मुकदमों का दुरुपयोग किसी की जिंदगी छीन सकता है?
- क्या मानसिक उत्पीड़न को समय रहते रोका जा सकता था?
- और सबसे जरूरी, क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा?
🧠 ज़रूरी बात (डिस्क्लेमर)
यह रिपोर्ट परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। मामले की सच्चाई का अंतिम निर्णय संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।
✍️ निष्कर्ष
जुनैद की मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मानसिक दबाव और कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किसी इंसान को कितना तोड़ सकता है। अब सबकी नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं—कि क्या इस परिवार को न्याय मिल पाएगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
🖊️ रिपोर्ट: गुलवेज आलम, कैराना (शामली)
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