मेरठ थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र में दर्दनाक हादसा 18 वर्षीय छात्र बंटी की मौत

मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में खिर्वा फ्लाईओवर के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में पावलीखास गांव के रहने वाले 18 वर्षीय छात्र बंटी की मौत हो गई है, जबकि मोटरसाइकिल पर सवार उसके तीन अन्य साथी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह भीषण हादसा देर रात करीब एक बजे उस समय हुआ जब चारों दोस्त एक पेट्रोल पंप पर तेल डलवाने के लिए आए थे, तभी एक अनियंत्रित तेज रफ्तार पिकअप गाड़ी ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और बंटी की मौके पर ही मौत हो गई,
जबकि उसके साथ मौजूद तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें राहगीरों की मदद से नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतक बंटी ने हाल ही में 12वीं कक्षा पास की थी और बीए में दाखिला लेने की तैयारी कर रहा था, जिसकी मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया है। दुर्घटना को अंजाम देने के बाद पिकअप गाड़ी का चालक वाहन सहित अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही कंकरखेड़ा थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल पंप और खिर्वा फ्लाईओवर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि फरार पिकअप गाड़ी के नंबर को ट्रेस कर आरोपी चालक को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

सातवीं मोहर्रम पर बिडौली की फिज़ाओं में ग़म का आलम, शिया सोगवारों ने निकाला मातमी जुलूस

बिड़ौली।सातवीं मोहर्रम पर बिडौली की गलियों में अज़ादारी की रवायती सदा गूंज उठी जब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के वफ़ादार भाई हज़रत अब्बास अलमदार की याद में एक पुरअसर मातमी जुलूस निकाला गया। यह जुलूस इमामबारगाह से बरामद हुआ और अपने मुक़र्रर रास्तों से गुज़रता हुआ दोबारा इमामबारगाह पर खत्म हुआ। मंगलवार को गांव बिड़ौली सादात में एक मातमी जलूस निकाला गया जलूस का आगाज मजलिस से हुआ जुलूस से पहले एक पुरमग़ज़ मजलिस का एहतमाम किया गया 

जिसमें मक़बूल आलिमे-दीन मौलाना फरहत हुसैन आजमगढ़) ने अपने बयान में कहा हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम ने कर्बला में अपने भाई इमामे मजलूम की खातिर अपनी जान कुर्बान करके वफ़ा का ऐसा मिसाल पेश किया जिसे रहती दुनिया तक याद किया जाएगा। उनकी सीरत हमें बताती है कि हमे अच्छाई को अपनाना और बुराई से बचना चाहिए मौलाना फरहत हुसैन ने भाईचारे, इंसानियत और हुसैनी उसूलों पर चलने की तालीम दी। उनके दिल को छू लेने वाले बयान पर मजलिस में बैठे सोगवार अश्कबार हो गए।मातमी जुलूस अलम, ताबूत और ज़ुलजनाह बरामद किया गया
इस जुलूस में हज़रत अब्बास अलमदार का अलम, ताबूत और कर्बला के वाक़े का प्रतीक ज़ुलजनाह बरामद किया गया। शिया सोगवारों ने इन निशानियों की ज़ियारत की और अकीदत के फूल पेश किए।जुलूस तस्लीम शाह, जिंदा शाह, जाकिर शाह, कम्बर, शौकीन शाह और हसन अली,सय्यद वसी हैदर, साहब की गलियों से गुज़रा और आख़िर में इमामबारगाह पर ही खत्म हुआ। नोहे और मातम जुलूस में नौहा-ख़्वानी का सिलसिला भी जारी रहा जिसमें सैय्यद वसी हैदर, गुड्डू मियां, अली रज़ा, शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, नफीस शाह और सैय्यद कमर अब्बास ने अपने पुरग़म अशआर से फिज़ा को रंज व ग़म से भर दिया। सबीलें और तबर्रुकअज़ादारी के इस रूहानी माहौल में सोगवारों द्वारा राहगीरों और अज़ादारों के लिए चाय, शरबत और तबर्रुक का इंतेज़ाम किया गया। ये सबीलें हुसैनी खिदमत और मेहमानदारी का बेहतरीन नमूना थीं। सुरक्षा के इंतेज़ामात इस मातमी जुलूस के दौरान पुलिस फोर्स तैनात रही जिससे अम्नो अमान का माहौल बरकरार रहा और जुलूस पुरअमन तरीके से सम्पन्न हुआ।इस पुरग़म मौके पर,सलीम शाह,सय्यद फजल अली,गुड्डू मिया,अब्बास, रजा, सज्जाद मेहदी,असग़र मेहदी,दानियाल जैदी, डॉक्टर रजी बाकर, मन्नन मिया,साबित अली,कमर रजा,हामिद शाह,नियाज़ हैदर,मेहताब मेहदी,मिन्हाल मेहदी,हमजा जैदी, डॉक्टर बाक़र, बाकिर,अली, हुसैन अली, हुसैन अब्बास समेत बडी तादाद में सोगवारों ने शिरकत की और कर्बला के शहीदों को अश्कों का नजराना पेश किया।मोहर्रम की यह अज़ादारी न सिर्फ कर्बला के ग़म को ताज़ा करती है बल्कि इंसानियत, सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलने का पैग़ाम देती है। "समझो भारत" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए पत्रकार ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट 
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हजरत कासिम की शहादत की याद में निकला मातमी जुलूस, अकीदतमंदों ने पेश की श्रद्धांजलि

बिडौली/चौसाना (शामली)। मोहर्रम की आठवीं तारीख के अवसर पर जनपद शामली के चौसाना कस्बे में हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के भतीजे हजरत कासिम (अ.स.) की शहादत की याद में एक मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने भाग लेकर कर्बला के शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया।

जुलूस का शुभारंभ स्थानीय इमामबाड़े से हुआ, जो कस्बे के विभिन्न मार्गों और बाजारों से होकर कर्बला स्थल पर पहुंचकर सम्पन्न हुआ। जुलूस में अलम, ताबूत और जुलजनाह भी शामिल रहे, जिनकी अकीदतमंदों ने जियारत की। इस दौरान सबील-ए-कर्बला का विशेष प्रबंध किया गया तथा श्रद्धालुओं को मीठा शर्बत, चाय और अन्य जलपान वितरित किया गया।

जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मोहम्मद वसीम (बहराइच) ने इंसानियत, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, सद्भाव और नेक कार्यों को बढ़ावा देना ही इस्लाम की वास्तविक शिक्षा है।

मौलाना ने कर्बला की घटनाओं का उल्लेख करते हुए हजरत कासिम (अ.स.) सहित अहलेबैत की कुर्बानियों को याद किया और बताया कि कर्बला का संदेश सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए संघर्ष का प्रतीक है। मजलिस के दौरान उपस्थित सोगवारों ने भावुक होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके पश्चात निकाले गए मातमी जुलूस में विभिन्न अंजुमनों के नोहेख्वानों ने कर्बला के शहीदों की याद में नोहे पेश किए। जुलूस में युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी शामिल रहे तथा शांतिपूर्ण वातावरण में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। जुलूस की अध्यक्षता मंजर जैदी ने की। इस अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे।

मोहर्रम का महीना इस्लामी इतिहास में त्याग, बलिदान और मानवता के मूल्यों की याद दिलाने वाला माना जाता है। इसी संदेश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हर वर्ष ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल "समझो भारत" के लिए बिडौली सादात, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) से पत्रकार शाकिर अली की विशेष रिपोर्ट।

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बिड़ौली सादात में मोहर्रम की 6वीं तारीख पर निकला ताजिया अलम का जुलूस, सैकड़ों अकीदतमंद हुए शामिल

बिड़ौली सादात में अकीदत और एहतराम के साथ निकला ताजिया अलम का जुलूस, गूंजती रही नोहेखानी

शामली। मोहर्रम के पवित्र महीने की छठी तारीख पर बिड़ौली सादात में धार्मिक श्रद्धा, अनुशासन और आपसी भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सोमवार देर रात आयोजित मजलिस के बाद ताजिया अलम का जुलूस पूरी अकीदत और सम्मान के साथ निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य रात्रि में सय्यद इकबाल हैदर के आवास पर मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए उनके संदेशों पर प्रकाश डाला गया। मजलिस के समापन के बाद ताजिया अलम का जुलूस निकाला गया, जो सय्यद इकबाल हैदर के निवास से शुरू होकर इमाम बारगाह पहुंचकर सम्पन्न हुआ।

जुलूस के दौरान अकीदतमंदों ने ताजिया पर हाजिरी देकर अमन, सलामती और खुशहाली की दुआएं मांगीं। वातावरण में धार्मिक भावनाओं और श्रद्धा की विशेष झलक दिखाई दी। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और अपनी आस्था का इजहार किया।

कार्यक्रम में शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, सय्यद वसी हैदर सहित अन्य नोहेख्वानों ने दर्दभरे नोहे पेश किए, जिन्हें सुनकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। नोहेखानी के माध्यम से कर्बला की कुर्बानियों और इंसानियत के संदेश को याद किया गया।

मजलिस से पूर्व मोहम्मद अब्बास के आवास पर नजर का विशेष एहतमाम किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आजादारों ने भाग लिया। इस दौरान सभी ने खैर-ओ-बरकत, अमन और भाईचारे के लिए दुआएं कीं।

जुलूस में फजल अली उर्फ अच्छू मियां, मोहम्मद अब्बास, आगाज़, सलीम शाह, नियाज हैदर, गुड्डू मियां, जिया मेहदी सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और धार्मिक सौहार्द का माहौल बना रहा।

मोहर्रम के अवसर पर आयोजित ऐसे धार्मिक कार्यक्रम न केवल कर्बला के महान संदेश को जीवंत रखते हैं, बल्कि समाज में एकता, त्याग, इंसाफ और मानवता के मूल्यों को भी मजबूत करने का कार्य करते हैं।

रिपोर्ट: शाकिर अली 

बिड़ौली सादात, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश)

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कर्बला के शहीदों की याद में रक्तदान का संदेश: बिडोली सादात में मोहर्रम पर लगा रक्तदान शिविर, युवाओं ने दिखाई इंसानियत की मिसाल

बिडोली सादात (शामली)। मोहर्रम का महीना त्याग, बलिदान, इंसानियत और मानव सेवा का संदेश देता है। इसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए जनपद शामली के गांव बिडोली सादात में छठी मोहर्रम के अवसर पर कर्बला के शहीदों, विशेष रूप से नवासे-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अज़ादार युवाओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान कर मानवता की सेवा का संदेश दिया।

यह रक्तदान शिविर गांव स्थित इमाम बारगाह-ए-हुसैनी में आयोजित किया गया, जिसका संचालन सर्वोदय जनकल्याण समिति ब्लड बैंक एवं अंजुमन-ए-सज्जादिया के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। शिविर के आयोजन में डॉ. मुजम्मिल, आस्था पांडे, डॉ. राशिद एवं आकाश कुमार सहित चिकित्सा टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

शिविर में लगभग 25 युवाओं और अज़ादारों ने रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। रक्तदाताओं को सर्वोदय जनकल्याण समिति ब्लड बैंक की ओर से प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने रक्तदान को मानव जीवन बचाने का सबसे प्रभावी और पुण्य कार्य बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता फजल अली उर्फ अच्छू मियां ने की, जबकि संचालन यमन जैदी, हाशिम शाह एवं कासिम शाह द्वारा किया गया। अपने संबोधन में फजल अली उर्फ अच्छू मियां ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का अवसर नहीं, बल्कि इंसानियत, न्याय और मानव सेवा के संदेश को अपनाने का भी समय है। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक ऐसा महादान है, जो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है। स्वस्थ व्यक्तियों को नियमित रूप से रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कर्बला की शहादत पूरी मानवता को सत्य, त्याग और सेवा का संदेश देती है। इसी भावना के साथ युवाओं ने रक्तदान कर समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

रक्तदान करने वालों में अम्मार हुसैन, सम्मी, दाऊद शाह, इब्राहीम, आस मोहम्मद, कासिम शाह, हाशिम शाह, हुसैन अब्बास, बाकिर अली, शब्बर हुसैन, कैफ जैदी, मोहम्मद जैदी, दानियाल जैदी, गालिब शाह, जाबिर, फुलमियां, मिन्हाल मेहदी सहित अन्य युवाओं ने भाग लिया।

ग्रामीणों और आयोजकों ने इस आयोजन को समाज में जागरूकता फैलाने और मानव सेवा की भावना को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। कार्यक्रम के अंत में सभी रक्तदाताओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल "समझो भारत" के लिए बिडोली सादात, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) से पत्रकार की विशेष रिपोर्ट।

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मोहर्रम पर रक्तदान शिविर का आयोजन, युवाओं से सहभागिता की अपील

बिडोली। मोहर्रम के अवसर पर कर्बला के शहीदों की याद में गांव बिडोली सादात में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। छठी मोहर्रम के मौके पर नवासे-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत को समर्पित यह शिविर सोमवार 22 जून को इमाम बारगाह-ए-हुसैनी में आयोजित होगा।

आयोजकों के अनुसार रक्तदान शिविर का आयोजन सर्वोदय जनकल्याण समिति एवं अंजुमन-ए-सज्जादिया के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। शिविर की अध्यक्षता फजल अली उर्फ अच्छू मियां करेंगे, जबकि संचालन यमन जैदी, हाशिम शाह एवं कासिम शाह द्वारा किया जाएगा।

फजल अली उर्फ अच्छू मियां ने क्षेत्रवासियों, विशेषकर युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान शिविर में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्तदान महादान है और इससे जरूरतमंद लोगों को नया जीवन मिल सकता है। रक्तदान मानव सेवा का श्रेष्ठ माध्यम है, इसलिए सभी स्वस्थ लोगों को इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। समझो भारत से शाकिर अली की ख़ास रिपोर्ट 
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बिडौली सादात में हजरत अली अकबर की शहादत की याद में निकला मातमी जुलूस, अमन और भाईचारे का दिया संदेश

बिडौली सादात (शामली)। मोहर्रम की पांचवीं तारीख पर झिंझाना क्षेत्र के गांव बिडौली सादात में नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के फरजंद हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम की शहादत की याद में अकीदत और एहतराम के साथ मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में शिया सोगवारों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

कार्यक्रम का आगाज मजलिस से हुआ, जिसमें बहराइच से तशरीफ लाए मौलाना मोहम्मद वसीम ने खिताब फरमाया। उन्होंने इंसानियत, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद करने की तालीम पर जोर देते हुए कहा कि मजलूम और लाचार लोगों की सहायता करना सबसे बड़ा नेक काम है। उन्होंने समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी एकता को बढ़ावा देने का पैगाम दिया।

मौलाना ने कर्बला के दर्दनाक वाकये और हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम के मसाएब बयान करते हुए कहा कि कर्बला के मैदान में मोहम्मद आले मोहम्मद ने दीन-ए-इस्लाम की रक्षा के लिए अपनी जानों की कुर्बानी पेश कर इंसानियत को हमेशा के लिए सत्य और न्याय का रास्ता दिखाया। मसाएब सुनकर उपस्थित सोगवार गमगीन हो उठे और उनकी आंखें नम हो गईं।

मजलिस के बाद पूर्व प्रधान फजल अली उर्फ अच्छू मियां की कोठी से मातमी जुलूस निकाला गया, जो गांव की विभिन्न गलियों से होता हुआ पुनः कोठी दरगाह पर संपन्न हुआ। जुलूस में अलम, ताबूत और जुलजनाह भी बरामद किया गया, जिनकी श्रद्धालुओं ने अकीदत के साथ जियारत की। सोगवारों ने सीनाजनी कर कर्बला के शहीदों को याद किया।

जुलूस के दौरान कई स्थानों पर सबीलों का आयोजन किया गया। सलीम शाह, खुर्रम, सय्यद कमर अब्बास, मोहर्रम अली और मोहम्मद अली आदि के यहां शर्बत, चाय और खाद्य सामग्री का वितरण किया गया। कार्यक्रम में बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

ग्राम प्रधान कपिल कुमार द्वारा जुलूस मार्ग की साफ-सफाई और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी की व्यवस्था की गई। वहीं स्थानीय पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा और जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सहयोग करता रहा।

जुलूस में नोहाख्वानों वसी हैदर, गुड्डू मियां, अली रजा, शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, मोहम्मद जैदी सहित अन्य ने नोहाख्वानी की। पूर्व प्रधान फजल अली उर्फ अच्छू मियां ने कहा कि मोहर्रम का महीना त्याग, बलिदान और इंसानियत के लिए संघर्ष की याद दिलाता है। कर्बला के शहीदों की याद में हर वर्ष यह जुलूस निकाला जाता है ताकि नई पीढ़ी को उनके आदर्शों और कुर्बानियों से अवगत कराया जा सके।

इस अवसर पर सय्यद वसी हैदर, शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, नफीस शाह, सय्यद कमर अब्बास, डॉक्टर बाकिर जैदी, हुसैन अली, बाकिर शाह, हसन रजा, सज्जाद मेहदी, मंसूर शाह, कादिर अली, शाकिर अली, लियाकत शाह, अजीम शाह, फराज मेहदी, डॉक्टर रजी बाकिर जैदी, मन्नान मियां, अल्लन मियां, ओवैस अली, जावेद अली, मोहसिन अली, काजिम अली, असगर मेहदी, मोहर्रम अली, कमर रजा जैदी, जिंदा शाह, हामिद शाह, तस्लीम शाह, खालिद शाह, जिया मेहदी, इकबाल हैदर, आगाज रजा, जाकिर शाह, मेहताब मेहदी, गुलाम अली, आफताब मेहदी, फूल मियां, गुड्डू जैदी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

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