मोहर्रम पर रक्तदान शिविर का आयोजन, युवाओं से सहभागिता की अपील
बिडौली सादात में हजरत अली अकबर की शहादत की याद में निकला मातमी जुलूस, अमन और भाईचारे का दिया संदेश
बिडौली सादात (शामली)। मोहर्रम की पांचवीं तारीख पर झिंझाना क्षेत्र के गांव बिडौली सादात में नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के फरजंद हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम की शहादत की याद में अकीदत और एहतराम के साथ मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में शिया सोगवारों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
कार्यक्रम का आगाज मजलिस से हुआ, जिसमें बहराइच से तशरीफ लाए मौलाना मोहम्मद वसीम ने खिताब फरमाया। उन्होंने इंसानियत, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद करने की तालीम पर जोर देते हुए कहा कि मजलूम और लाचार लोगों की सहायता करना सबसे बड़ा नेक काम है। उन्होंने समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी एकता को बढ़ावा देने का पैगाम दिया।
मौलाना ने कर्बला के दर्दनाक वाकये और हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम के मसाएब बयान करते हुए कहा कि कर्बला के मैदान में मोहम्मद आले मोहम्मद ने दीन-ए-इस्लाम की रक्षा के लिए अपनी जानों की कुर्बानी पेश कर इंसानियत को हमेशा के लिए सत्य और न्याय का रास्ता दिखाया। मसाएब सुनकर उपस्थित सोगवार गमगीन हो उठे और उनकी आंखें नम हो गईं। मजलिस के बाद पूर्व प्रधान फजल अली उर्फ अच्छू मियां की कोठी से मातमी जुलूस निकाला गया, जो गांव की विभिन्न गलियों से होता हुआ पुनः कोठी दरगाह पर संपन्न हुआ। जुलूस में अलम, ताबूत और जुलजनाह भी बरामद किया गया, जिनकी श्रद्धालुओं ने अकीदत के साथ जियारत की। सोगवारों ने सीनाजनी कर कर्बला के शहीदों को याद किया। जुलूस के दौरान कई स्थानों पर सबीलों का आयोजन किया गया। सलीम शाह, खुर्रम, सय्यद कमर अब्बास, मोहर्रम अली और मोहम्मद अली आदि के यहां शर्बत, चाय और खाद्य सामग्री का वितरण किया गया। कार्यक्रम में बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।ग्राम प्रधान कपिल कुमार द्वारा जुलूस मार्ग की साफ-सफाई और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी की व्यवस्था की गई। वहीं स्थानीय पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा और जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सहयोग करता रहा।
जुलूस में नोहाख्वानों वसी हैदर, गुड्डू मियां, अली रजा, शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, मोहम्मद जैदी सहित अन्य ने नोहाख्वानी की। पूर्व प्रधान फजल अली उर्फ अच्छू मियां ने कहा कि मोहर्रम का महीना त्याग, बलिदान और इंसानियत के लिए संघर्ष की याद दिलाता है। कर्बला के शहीदों की याद में हर वर्ष यह जुलूस निकाला जाता है ताकि नई पीढ़ी को उनके आदर्शों और कुर्बानियों से अवगत कराया जा सके।इस अवसर पर सय्यद वसी हैदर, शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, नफीस शाह, सय्यद कमर अब्बास, डॉक्टर बाकिर जैदी, हुसैन अली, बाकिर शाह, हसन रजा, सज्जाद मेहदी, मंसूर शाह, कादिर अली, शाकिर अली, लियाकत शाह, अजीम शाह, फराज मेहदी, डॉक्टर रजी बाकिर जैदी, मन्नान मियां, अल्लन मियां, ओवैस अली, जावेद अली, मोहसिन अली, काजिम अली, असगर मेहदी, मोहर्रम अली, कमर रजा जैदी, जिंदा शाह, हामिद शाह, तस्लीम शाह, खालिद शाह, जिया मेहदी, इकबाल हैदर, आगाज रजा, जाकिर शाह, मेहताब मेहदी, गुलाम अली, आफताब मेहदी, फूल मियां, गुड्डू जैदी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
प्रेस लाइन :
शाकिर अली, विशेष संवाददाता
समझो भारत राष्ट्रीय समाचार पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल
बिडौली सादात, झिंझाना, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश)
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वेबसाइट : www.samjhobharat.com
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कैराना नगर पालिका के वर्षों पुराने प्रस्ताव पर अमल शुरू, थाना परिसर के सामने जल्द स्थापित होगा गगनचुंबी राष्ट्रीय ध्वज। पढ़ें पूरी खबर।
कैराना में वर्षों पुराना सपना होगा साकार, थाना परिसर के सामने लहराएगा गगनचुंबी तिरंगा
कैराना, उत्तर प्रदेश। नगर पालिका परिषद कैराना की एक महत्वपूर्ण योजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। कई वर्ष पूर्व नगर पालिका की बोर्ड बैठक में सभासद एवं अधिवक्ता शगुन मित्तल द्वारा नगर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर गगनचुंबी राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) स्थापित कराने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे उस समय बोर्ड के सभी सभासदों का समर्थन प्राप्त हुआ था और अध्यक्ष द्वारा स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई थी।
अब लंबे इंतजार के बाद इस प्रस्ताव पर अमल शुरू होने जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना कैराना के सामने स्थित सार्वजनिक स्थल पर शीघ्र ही एक विशाल गगनचुंबी तिरंगा स्थापित किया जाएगा। यह स्थान सभासद रईस चौधरी के वार्ड क्षेत्र में आता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पहल से न केवल नगर की सुंदरता में वृद्धि होगी, बल्कि राष्ट्रीय एकता, गौरव और देशभक्ति की भावना को भी नई ऊर्जा मिलेगी। सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज की मौजूदगी युवाओं और आम नागरिकों को राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों की याद दिलाने का कार्य करती है।सभासद एवं अधिवक्ता शगुन मित्तल ने बताया कि उन्होंने नगर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज स्थापित करने का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रखा था। उस समय सभी सभासदों ने इसका समर्थन किया था और प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल गई थी। अब इस दिशा में कार्य शुरू होने से नगरवासियों में उत्साह का माहौल है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। ऐसे में सार्वजनिक स्थलों पर गगनचुंबी तिरंगे की स्थापना से आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना और मजबूत होगी।
नगरवासियों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे कैराना के लिए गौरवपूर्ण कदम बताया है। आने वाले समय में थाना परिसर के सामने लहराता विशाल तिरंगा नगर की नई पहचान बन सकता है।
ज़मीर आलम, पत्रकार, उत्तर प्रदेश डेस्क, "समझो भारत" (राष्ट्रीय समाचार पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल)
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बनत में हुआ भव्य आयोजन, योग के प्रति जागरूकता का दिया गया संदेश
बनत (शामली)। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर नगर पंचायत बनत द्वारा प्राथमिक विद्यालय बनत नंबर-1 में एक विशेष योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी श्री देवकीनंदन के सौजन्य से किया गया, जिसमें नगर पंचायत कर्मचारियों, शिक्षकों एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6:30 बजे योग अभ्यास के साथ हुआ। इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालय बनत नंबर-1 के सहायक अध्यापक श्री नवीन कुमार ने उपस्थित लोगों को योग के महत्व तथा उससे होने वाले शारीरिक एवं मानसिक लाभों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को स्वस्थ, संतुलित और तनावमुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देता है। योग कार्यक्रम में नगर पंचायत की वरिष्ठ लिपिक श्री ओम सिंह, श्री प्रताप सिंह, श्री शिवकुमार, श्री नर बहादुर सिंह, श्री अमित कुमार, श्री अर्जुन कुमार, श्री प्रवीण कुमार, मास्टर इमरान अहमद सहित नगर पंचायत के सफाई कर्मचारीगण एवं कस्बा बनत के अनेक सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कर स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को जलपान वितरित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इस आयोजन ने लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ स्वस्थ भारत के निर्माण के संदेश को भी मजबूत किया। उपस्थित लोगों ने ऐसे आयोजनों को समाज के लिए लाभकारी बताते हुए भविष्य में भी नियमित रूप से योग कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल "समझो भारत" के लिए शामली (उत्तर प्रदेश) से ब्यूरो चीफ शौकिन सिद्दीकी के साथ कैमरामैन रामकुमार चौहान की विशेष रिपोर्ट।📞 8010884848
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तीसरी मुहर्रम का पैगाम: इमाम हुसैन को केवल याद नहीं, उनके आदर्शों को जीवन में उतारने की जरूरत
उन्होंने कहा कि कर्बला की धरती पर जो संघर्ष हुआ, वह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि मानवता के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसने यह सिखाया कि अन्याय और अत्याचार के सामने झुकना नहीं चाहिए, चाहे उसके लिए कितनी भी बड़ी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।
फजल अली के अनुसार, हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों ने कठिन परिस्थितियों, प्यास और भूख के बावजूद सत्य का साथ नहीं छोड़ा। उनका बलिदान आज भी दुनिया को यह संदेश देता है कि इंसानियत और न्याय की रक्षा के लिए हर त्याग छोटा है।
उन्होंने कहा कि कर्बला हमें वफ़ा, सब्र, साहस और इंसानियत का पाठ पढ़ाती है। वफ़ा केवल किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि सत्य और नैतिक मूल्यों से निभाई जानी चाहिए। इसी तरह मोहब्बत केवल शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की मदद के रूप में दिखाई देनी चाहिए।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी की जुबान पर "या हुसैन" हो लेकिन उसके व्यवहार में छल, अन्याय या नफरत दिखाई दे, तो वह कर्बला के वास्तविक संदेश को नहीं समझ पाया है। हुसैनियत का असली अर्थ जरूरतमंद की मदद करना, भूखे को भोजन देना, कमजोर का सहारा बनना और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि आज समाज को केवल इमाम हुसैन (अ.स.) का नाम लेने वालों की नहीं, बल्कि उनके चरित्र, उनके साहस और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने वाले लोगों की आवश्यकता है। यही कर्बला का वास्तविक संदेश है और यही वह शिक्षा है जो हर दौर में इंसानियत को मजबूत बनाती है।
मोहर्रम का यह अवसर हमें आत्ममंथन करने का मौका देता है कि हम अपने जीवन में सत्य, न्याय, करुणा और मानवता के मूल्यों को कितना स्थान दे रहे हैं। कर्बला की याद तभी सार्थक होगी, जब उसके संदेश को व्यवहार में उतारा जाए और समाज को बेहतर बनाने में योगदान दिया जाए।रिपोर्ट: शाकिर अली, बिडौली (झिंझाना), जनपद शामली, उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल: समझो भारत�संपर्क: 8010884848 , ईमेल: samjhobharat@gmail.com