बिडौली (शामली): उत्तर प्रदेश के जनपद शामली के झिंझाना क्षेत्र स्थित गांव बिडौली सादात में मंगलवार को हजरत इमाम हुसैन के चेहलुम (चालीसवें) के अवसर पर शिया समुदाय द्वारा पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला गया। लगातार हो रही बारिश भी अकीदतमंदों के जज़्बे को कम नहीं कर सकी। बड़ी संख्या में सोगवार जुलूस में शामिल हुए और इमाम हुसैन की शहादत की याद में सीनाजनी करते हुए मातम किया। पूरे गांव में "या हुसैन" की सदाएं गूंजती रहीं, जिससे वातावरण गम और अकीदत से भर गया।
जुलूस का शुभारंभ पूर्व प्रधान सैय्यद फजल अली (अच्छू मियां) के आवास स्थित इमाम बारगाह से हुआ। शबी-ए-ताबूत, अलम और जुलजनाह के साथ निकला जुलूस गांव की विभिन्न गलियों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।मजलिस में दिया गया इंसानियत और सत्य का संदेश
जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना तस्दीक हुसैन लखनवी ने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने दीन, इंसाफ और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े होने की मिसाल है। इमाम हुसैन ने कठिन परिस्थितियों में भी अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाया और उनका जीवन आज भी पूरी मानवता को सच्चाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। मजलिस में अली रजा, सैय्यद वसी हैदर, नफीस शाह और सैय्यद गुलाम अली ने मर्सिया खानी की, जबकि जुलूस के दौरान शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, गुड्डू मियां और हसन अली जैदी ने नोहाखानी पेश कर माहौल को गमगीन बना दिया।श्रद्धालुओं के लिए सेवा व्यवस्था
जुलूस के पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए शर्बत, चाय और भोजन की व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों ने सेवा भाव के साथ अकीदतमंदों का स्वागत किया और मातमी जुलूस में शामिल लोगों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा।
पुलिस प्रशासन रहा मुस्तैद
धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया और पूरे कार्यक्रम पर प्रशासन की नजर बनी रही। इस अवसर पर सैय्यद फजल अली उर्फ अच्छू मियां, अली जौन, नियाज हैदर, जिंदा शाह, हामिद शाह, कमर अब्बास, कमर रजा जैदी, बाकिर अली, डॉ. बाकिर जैदी, आफताब मेहदी, सलीम शाह, साजिद शाह, साबिर शाह, डॉ. रजी बाकिर, मेहताब मेहदी, मिन्हाल मेहदी, मोहसिन रिजवी और सज्जाद मेहदी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।कर्बला का संदेश आज भी प्रासंगिक
चेहलुम का यह आयोजन केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि कर्बला की उस महान कुर्बानी की याद है, जिसने सत्य, न्याय, धैर्य और इंसानियत के मूल्यों को हमेशा के लिए अमर कर दिया। हर वर्ष की तरह इस बार भी बिडौली सादात में आयोजित मातमी जुलूस ने लोगों को शांति, भाईचारे और इंसानी मूल्यों का संदेश दिया।— विशेष रिपोर्ट, समझो भारत
बिडौली (झिंझाना), जनपद शामली, उत्तर प्रदेश