बोध दिवस समागम के दूसरे दिन 6 दहेज मुक्त विवाह, 40 यूनिट रक्तदान
बिड़ौली/झिंझाना (शामली)। जनपद स्थित में संत शिरोमणि के पावन बोध दिवस पर आयोजित तीन दिवसीय समागम का दूसरा दिन सेवा, संस्कार और समाज सुधार की प्रेरणादायी गतिविधियों के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्ति और उत्साह से भर दिया।
यह आयोजन के मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है। दिन की शुरुआत नित्यनियम और सत्संग से हुई, जिसमें संत गरीबदास जी महाराज की शिक्षाओं, सत्यभक्ति और मानव कल्याण के संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम भी है।
दहेज मुक्त विवाह: समाज को सशक्त संदेश
समागम के दूसरे दिन 6 जोड़ों का दहेज मुक्त रमैणी विवाह सादगीपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराया गया। बिना किसी दहेज और आडंबर के हुए इन विवाहों ने समाज को एक मजबूत संदेश दिया कि वैवाहिक संस्कार प्रेम, विश्वास और समानता पर आधारित होने चाहिए, न कि लेन-देन की प्रथा पर। वैदिक मंत्रोच्चारण और संतवाणी के बीच नवदम्पतियों को आशीर्वाद प्रदान किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे दहेज प्रथा के विरुद्ध एक सार्थक पहल बताया।रक्तदान शिविर: सेवा ही सच्ची भक्ति
मानव सेवा को सर्वोपरि मानते हुए आश्रम परिसर में रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया। युवाओं और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कुल 40 यूनिट रक्तदान किया। यह रक्त जरूरतमंद मरीजों के उपचार के लिए समर्पित किया गया। राज्य सेवादार हरदेश दास ने कहा कि “रक्तदान महादान है, इससे बढ़कर कोई सेवा नहीं।”
आध्यात्मिक प्रदर्शनी और सेवा प्रकल्प
आश्रम में आयोजित आध्यात्मिक प्रदर्शनी में संत गरीबदास जी महाराज और के दिव्य मिलन, सतलोक दर्शन और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी झांकियां प्रदर्शित की गईं। श्रद्धालुओं ने इन झांकियों को विशेष रुचि से देखा और आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात किया। साथ ही अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत जरूरतमंद परिवारों के लिए बनाए जा रहे आवास सेवा प्रकल्प की जानकारी भी साझा की गई। यह पहल समाज के कमजोर वर्गों को सहारा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। समागम का दूसरा दिन यह संदेश देकर संपन्न हुआ कि जब भक्ति के साथ सेवा और समाज सुधार का संकल्प जुड़ जाता है, तब धार्मिक आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि परिवर्तन का माध्यम बन जाते हैं।"समझो भारत" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए
शामली, उत्तर प्रदेश से
पत्रकार शाकिर अली की खास रिपोर्ट
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