आजादी के दीवानों की कुर्बानी को किया याद, योग साधकों ने मनाया स्वतंत्रता दिवस

शामली, उत्तर प्रदेश। स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का दिन नहीं, बल्कि उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन तक न्योछावर कर दिया। इसी भावना के साथ जन कल्याण योग सेवा ट्रस्ट द्वारा भूमिया खेड़ा स्थित योग केंद्र पर 15 अगस्त का कार्यक्रम हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गान के साथ हुई। इसके बाद योग साधकों ने योग साधना की और स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में देशभक्ति से जुड़े प्रसंगों, कविताओं और विचारों ने उपस्थित लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत किया।

इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक कोरियर ने कहा कि देश आज जिन उपलब्धियों और स्वतंत्रता का आनंद ले रहा है, उसके पीछे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष और बलिदान है। उन्होंने कहा कि आजादी के दीवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को स्वतंत्र कराया था। इसलिए नई पीढ़ी को स्वतंत्रता के इतिहास और उसके लिए किए गए संघर्ष को समझना चाहिए।

कार्यक्रम में ट्रस्ट की विभिन्न योग कक्षाओं के साधकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी की मौजूदगी में अध्यक्ष अशोक कोरियर के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया। तिरंगा फहराते ही पूरा परिसर देशभक्ति के भाव से भर उठा।

पदाधिकारियों का किया सम्मान

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान संस्था के पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया। साधकों ने ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी अरविन्द कौशिक और संगठन मंत्री सुनीत गुप्ता को पटका पहनाकर सम्मानित किया। इसके बाद संस्था के अध्यक्ष अशोक कोरियर को भी पटका पहनाकर सम्मान दिया गया।

कार्यक्रम में भूमिया खेड़ा योग केंद्र से केंद्र प्रमुख संजय गर्ग, अमन गोयल, डॉ. नरेश सैनी, अरविंद कौशिक, सुनीत गुप्ता, महिपाल, रूपेश, देशपाल, रेखा देवी, अंगूरी बहिन सहित अनेक साधक मौजूद रहे।

वहीं आनंद भवन केंद्र से केंद्र प्रमुख मनोज गोयल, अनिल कुमार, देवेन्द्र शर्मा, वेद पाल, उमेश खुरगान, कुलश्रेष्ठ सैनी, रामकुमार चक्की वाले सहित अन्य साधकों ने सहभागिता की। शुगर मिल योग केंद्र के केंद्र प्रमुख डॉ. कुलदीप सहित अन्य साधक भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

देशभक्ति के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति के गीतों और कविताओं ने माहौल को उत्साहपूर्ण बनाए रखा। अंत में वन्दे मातरम् के साथ समारोह का समापन हुआ। इसके बाद साधक संदीप मित्तल की ओर से उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।

पूरे कार्यक्रम में योग, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला। आयोजकों का कहना रहा कि ऐसे आयोजन लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा देते हैं।

रिपोर्ट: अरविंद कौशिक, शामली, उत्तर प्रदेश
“समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल के लिए विशेष रिपोर्ट

स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति के रंग में रंगा गढ़ी पुख़्ता सर्वहितकारी कन्या इंटर कॉलेज

गढ़ी पुख्ता/शामली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गरीब गुप्ता सर्वहितकारी कन्या इंटर कॉलेज में देशभक्ति और उत्साह से भरा कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय परिसर में सुबह से ही छात्राओं और शिक्षकों में खासा उत्साह देखने को मिला। तिरंगे की शान के बीच आयोजित समारोह में छात्राओं ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से देशप्रेम की भावना को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक नरेश सैनी द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके बाद छात्राओं ने देशभक्ति से ओतप्रोत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गीत, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया और पूरा वातावरण देशभक्ति के जज्बे से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. नीरज सैनी, जिला पंचायत सदस्य तथा विशिष्ट अतिथि राधेश्याम गिरी रहे। इस दौरान हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की टॉपर छात्राओं को सम्मानित किया गया। मेधावी छात्राओं का सम्मान कर उन्हें आगे भी इसी तरह मेहनत और लगन के साथ शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया गया।

विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष नीरज जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया। मुख्य अतिथि डॉ. नीरज सैनी और प्रबंधक नरेश सैनी ने छात्राओं को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

समारोह में डॉ. नीरज सैनी, मैनपाल सैनी, नरेश सैनी, नीरज जैन, महेश सैनी, संगीता सैनी, दीप्ति अरोड़ा, राधेश्याम गिरी, प्रवीण चौधरी, सुधीर फौजी, राजीव तोमर, कर्मवीर सभासद, सुखमाल सिंह, अंकित संगल, टेकचंद मित्तल, पंकज कौशिक, अशोक वर्मा, धर्मपाल शर्मा, अभिषेक अरोड़ा, अमित सैनी सभासद सहित कस्बे के अनेक वरिष्ठ नागरिक, शिक्षक-शिक्षिकाएं और सैकड़ों छात्राएं उपस्थित रहीं।

शिक्षा और देशभक्ति का सुंदर संगम

स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन छात्राओं के लिए केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना को समझने का अवसर भी रहा। मेधावी छात्राओं का सम्मान समारोह का खास आकर्षण रहा, जिसने अन्य विद्यार्थियों को भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दी।

विद्यालय परिसर में तिरंगे के नीचे गूंजते देशभक्ति के गीतों और छात्राओं की प्रस्तुतियों ने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को यादगार बना दिया।

— ज़मीर आलम, विशेष संवाददाता
गढ़ी पुख्ता, जिला शामली, उत्तर प्रदेश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल “समझो भारत” के लिए विशेष रिपोर्ट।

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हरियाली तीज पर सजी सावन की महफिल, महिलाओं ने झूले, गीत-संगीत और मेहंदी से मनाया उत्सव

गढ़ी पुख़्ता/शामली। सावन की रिमझिम फुहारों और हरियाली के बीच हरियाली तीज का पर्व कस्बे में उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। जैनपुरी मोहल्ले में ममता जैन के आवास पर आयोजित तीज कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक गीतों, झूलों, मेहंदी और नृत्य के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने उत्साहपूर्वक झूले की पींगें बढ़ाईं और एक-दूसरे को झुलाते हुए सावन के पारंपरिक गीत गाए। इसके साथ ही विभिन्न मनोरंजक खेलों और नृत्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

हरियाली तीज की खास रौनक उस समय देखने को मिली, जब मेहंदी प्रतियोगिता में महिलाओं ने अपने हाथों पर आकर्षक मेहंदी रचाई। सावन के गीतों पर महिलाओं ने शानदार नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को खुशनुमा बना दिया। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने एक-दूसरे को हरियाली तीज की शुभकामनाएं देते हुए आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।

आयोजन में

ममता जैन, रीना शर्मा, दिशा जैन, वंदना मित्तल, प्रीति सैनी, शिखा जैन, काजल, सीमा देवी, कविता संगल, मोनिका, स्मिता जैन, राधा रानी, नीलम जैन, ऋतु जैन, राधिका, सोनिया, प्रिया और रूबी सहित अनेक महिलाओं ने सहभागिता की।

सावन की परंपराओं से जुड़ा है तीज का उत्सव

हरियाली तीज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सावन की खुशियों, लोक परंपराओं और आपसी मेल-मिलाप से जुड़ा पर्व है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भी पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर मिलता है। गढ़ी पुख़्ता में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी खूबसूरत परंपरा की एक झलक रहा, जहां महिलाओं ने मिलकर त्योहार को यादगार बना दिया।

— ज़मीर आलम, विशेष संवाददाता
गढ़ी पुख़्ता, जिला शामली, उत्तर प्रदेश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल “समझो भारत” के लिए विशेष रिपोर्ट।

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पायल बेचकर 6 लावारिस शवों को दी अंतिम विदाई: इंसानियत की ऐसी मिसाल, जहां गहनों से ज्यादा अनमोल है एक बेबस इंसान का सम्मान

मुजफ्फरनगर। कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जिन्हें पढ़कर इंसान कुछ देर के लिए खामोश हो जाता है। यह कहानी भी ऐसी ही है—एक ऐसी महिला की, जिसने जिंदगी में शायद यह तय कर लिया है कि किसी इंसान को दुनिया से विदा होते समय अकेला नहीं छोड़ा जाएगा, चाहे इसके लिए उसे अपने गहने ही क्यों न बेचने पड़ें।

मुजफ्फरनगर की क्रांतिकारी शालू सैनी लंबे समय से लावारिस और बेसहारा मृतकों के अंतिम संस्कार की सेवा से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति का दुनिया में कोई अपना नहीं बचा, उसकी अंतिम विदाई के समय समाज को उसका अपना बन जाना चाहिए।

हाल ही में अलग-अलग पुलिस थानों से 6 लावारिस शवों की सूचना मिली। अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे समय में शालू सैनी ने अपने पैरों की पायल उतारकर बेच दी और उससे प्राप्त धनराशि से इन छह मृतकों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया।

यह उनके लिए कोई पहला अवसर नहीं था। इससे पहले भी सेवा कार्य के लिए वह अपनी गले की चेन बेच चुकी हैं। उनका कहना है कि गहने दोबारा खरीदे जा सकते हैं, लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति को सम्मानजनक विदाई देने का अवसर बार-बार नहीं मिलता, जिसके लिए दुनिया में कोई आगे आने वाला न हो।

बेटी की शादी के लिए खरीदा था प्लॉट, बना दिया आश्रय का ठिकाना

शालू सैनी की सेवा की कहानी केवल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए एक प्लॉट लिया था। लेकिन बेसहारा माताओं और जरूरतमंदों की पीड़ा देखकर उनका मन बदल गया। उन्होंने उसी जमीन पर वृद्धाश्रम और अनाथालय तैयार करने का निर्णय लिया।

उनके इस फैसले में एक अलग ही सोच दिखाई देती है—अपने परिवार की जरूरत से पहले उन लोगों की चिंता, जिनके पास अपना कहने वाला कोई नहीं।

धर्म से ऊपर इंसानियत

शालू सैनी का दावा है कि पिछले कई वर्षों में वह 6,000 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करा चुकी हैं। इनमें अलग-अलग धर्मों से जुड़े लोग शामिल रहे हैं और उनके अनुसार अंतिम संस्कार संबंधित धर्म की परंपराओं के अनुरूप कराया जाता है।

उनकी सेवा का मूल भाव किसी जाति, धर्म या पहचान से नहीं, बल्कि इंसान होने से जुड़ा है। किसी अज्ञात व्यक्ति की आखिरी यात्रा में शामिल होना शायद समाज के सबसे कठिन और भावनात्मक कामों में से एक है।

“पैसे आते-जाते रहते हैं, लेकिन सम्मान सबसे बड़ा धर्म है”

शालू सैनी कहती हैं, “जिसका इस दुनिया में कोई नहीं होता, उसके लिए हमें ही तो बनना पड़ेगा। पैसे आते-जाते रहते हैं, लेकिन किसी लावारिस इंसान को सम्मान देना सबसे बड़ा धर्म है।”

उनका एक संदेश भी इस पूरी सेवा भावना को सरल शब्दों में बयान करता है—
“जीते जी सेवा, मरने के बाद सम्मान।”

दरअसल, अंतिम संस्कार केवल किसी मृत शरीर को विदा करना नहीं होता। यह उस इंसान के प्रति समाज की आखिरी जिम्मेदारी भी है। जिस व्यक्ति की जिंदगी की कहानी हम नहीं जानते, उसकी मौत के बाद कम से कम इतना जरूर किया जा सकता है कि उसे सम्मान के साथ विदा किया जाए।

समाज से सहयोग की अपील

इतने बड़े स्तर पर सेवा कार्य अकेले किसी एक व्यक्ति के लिए आसान नहीं है। अंतिम संस्कार, आश्रय और जरूरतमंदों की मदद जैसे कार्यों में संसाधनों की आवश्यकता होती है। शालू सैनी ने समाज के लोगों से इस सेवा अभियान में अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करने की अपील की है।

सहयोग एवं संपर्क: 8273189764

क्रांतिकारी शालू सैनी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट

“मुर्दों से प्रेम निभाना है”—एक सोच, जो समाज से सवाल करती है

हम अक्सर जीवन में अपने लोगों के लिए बहुत कुछ करने की बात करते हैं। लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति के लिए आगे आना, जिसका नाम तक हमें मालूम नहीं, शायद इंसानियत की सबसे कठिन परीक्षा है।

शालू सैनी की यह पहल समाज के सामने एक सवाल भी रखती है—अगर किसी इंसान के आखिरी सफर में उसके साथ चलने वाला कोई नहीं है, तो क्या समाज उसकी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त हो सकता है?

इस सवाल का उनका जवाब उनके काम में दिखाई देता है।

यह कहानी सिर्फ पायल बेचने की नहीं है। यह उस सोच की कहानी है, जिसमें इंसान की आखिरी जरूरत के सामने अपना सामान, अपना आराम और अपनी सुविधा छोटी लगने लगती है।

समझो भारत के लिए मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश से चीफ एडिटर ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

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बिडौली क्षेत्र में शान से लहराया तिरंगा, देशभक्ति के रंग में रंगे स्कूल और संस्थान

बिडौली/झिंझाना। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऊन ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों और कार्यालयों में देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। शनिवार को कई स्थानों पर तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान किया गया और विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से देश के प्रति अपने प्रेम और सम्मान का इज़हार किया।

झिंझाना क्षेत्र में एआईएमआईएम पार्टी कार्यालय, मदरसा अरबिया अजमातुल उलूम और उच्च प्राथमिक विद्यालय बिडौली सादात में स्वतंत्रता दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। विद्यालय में बच्चे तिरंगे के रंगों वाली वेशभूषा में पहुंचे तो पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में नजर आया।

कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्य वंदना अहलावत, पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज मोहम्मद इनाम, वार्ड अध्यक्ष मोहम्मद मुस्तकिम, अकरम खान, हाफिज आस मोहम्मद, हाफिज नवेद, पूर्व ग्राम प्रधान प्रत्याशी महबूब शाह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी दी और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान को याद किया। हाफिज मोहम्मद इनाम ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी विविधता में एकता है। देश में अलग-अलग बोलियां, वेशभूषाएं और परंपराएं होने के बावजूद हम सभी भारतीय होने के नाते एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

समारोह में बच्चों ने देशभक्ति गीतों पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। छोटी बच्चियों की देशभक्ति गीतों पर शानदार प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों पर विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

समारोह के समापन पर मुख्य अतिथियों ने विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित किए और सभी को मिठाई खिलाकर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं प्रधानाचार्य वंदना अहलावत ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर जयभगवान मास्टर, परशौकीन, अय्यूब, नफीस, शौकीन ग्राम महासचिव, मनव्वर, इकबाल, इस्माइल, तौफीक, सलमान, अशरफ ग्राम अध्यक्ष, चंदा, शाहनवाज, कय्यूम, इकबाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

खास रिपोर्ट: शाकिर अली, शामली, उत्तर प्रदेश
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शामली में तिरंगे की शान में निकली भव्य पदयात्रा, राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा शहर

शामली। स्वतंत्रता दिवस के उत्साह और राष्ट्रप्रेम की भावना के बीच शामली शहर में ‘हर घर तिरंगा’ पदयात्रा का भव्य आयोजन किया गया। हाथों में लहराते तिरंगे, देशभक्ति के नारों और बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने शहर के माहौल को पूरी तरह राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया।

पदयात्रा का शुभारंभ प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री श्री दिनेश खटीक एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष/एमएलसी श्री मोहित बेनीवाल ने संयुक्त रूप से किया। यात्रा वीवी इंटर कॉलेज से शुरू हुई और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए वर्मा मार्केट, शिव चौक तथा भिक्की मोड़ से गुजरकर विश्वकर्मा पार्क पहुंची, जहां पदयात्रा का समापन हुआ।

यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ आम नागरिक भी तिरंगा हाथों में लेकर शामिल हुए। जगह-जगह लोगों ने देशभक्ति के नारों के साथ भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय गौरव का संदेश दिया। इस दौरान तिरंगे के प्रति लोगों का उत्साह और जुड़ाव साफ दिखाई दिया।

तिरंगा केवल ध्वज नहीं, हमारी राष्ट्रीय पहचान है : मोहित बेनीवाल

प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी श्री मोहित बेनीवाल ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को केवल एक आयोजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह अभियान लोगों को अपने देश, उसकी स्वतंत्रता और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से जोड़ने का एक माध्यम है।

उन्होंने कहा कि तिरंगा प्रत्येक भारतीय के लिए सम्मान और गौरव का प्रतीक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के साथ आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गौरव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपने घरों पर तिरंगा फहराकर अभियान में सहभागी बनने की अपील की।

वीरों के बलिदान को याद करने का अवसर : दिनेश खटीक

प्रभारी मंत्री श्री दिनेश खटीक ने कहा कि तिरंगा देश की एकता और अखंडता के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा देश के वीर सैनिकों के त्याग और बलिदान की याद दिलाता है।

उन्होंने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से देशभर में राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूती मिल रही है। हम सभी का दायित्व है कि देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और वीर जवानों को याद करें तथा राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लें।

बड़ी संख्या में जुटे पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता

पदयात्रा में एमएलसी श्री वीरेंद्र सिंह, जिला अध्यक्ष श्री रामजी लाल, श्री अभय तोमर, श्री कपिल पंवार, श्री अमित विश्वकर्मा, श्री वरुण मलिक और श्री अंकित गोयल सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

शामली की सड़कों पर निकली इस पदयात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि राष्ट्रीय पर्व केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों और भावनाओं को याद करने का अवसर भी हैं। हाथों में तिरंगा लिए लोगों की भागीदारी ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को शहर में एक जनभागीदारी वाले उत्सव का रूप दे दिया।

समझो भारत की खास रिपोर्ट:

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल ‘समझो भारत’ के लिए शामली, उत्तर प्रदेश से पत्रकार सुरेन्द्र सिंह निर्वाल की खास रिपोर्ट।

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51 वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहीं श्याम लता मित्तल सम्मानित

बिड़ौली/झिंझाना। कस्बे में शिक्षा के क्षेत्र में पांच दशक से अधिक समय से योगदान दे रहीं वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती श्याम लता मित्तल को बुधवार को पत्रकारों ने उनके शिक्षण संस्थान पहुंचकर स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान उनके शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अतुलनीय योगदान की सराहना की गई।
श्रीमती श्याम लता मित्तल ने वर्ष 1970 में नेहरू शिशु निकेतन की स्थापना की थी। वर्ष 1971 में विद्यालय को मान्यता मिली। उन्होंने कस्बे में पहला मोंटेसरी स्कूल स्थापित कर शिक्षा की मजबूत नींव रखी। विद्यालय में आज तीसरी पीढ़ी के बच्चे भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
बीटीसी, बीएड और डबल एमए की उपाधि प्राप्त श्रीमती मित्तल ने 16 वर्षों तक सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षिका के रूप में सेवाएं दीं और प्रधानाध्यापिका पद से सेवानिवृत्त हुईं। सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षा के प्रति उनका समर्पण जारी है। वह आज भी विद्यालय में सक्रिय रहकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सीखने की ललक आज भी उसी तरह बनी हुई है, जैसी शिक्षा की विभिन्न डिग्रियां हासिल करने के दौरान थी।
वर्तमान में उनके पुत्र राहुल गुप्ता प्रधानाध्यापक के रूप में विद्यालय का संचालन कर रहे हैं और संस्था की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
हरियाणा हज कमेटी के पूर्व कोऑर्डिनेटर एवं कस्बा निवासी खुर्शीद आलम ने पत्रकार साथियों के साथ विद्यालय पहुंचकर श्रीमती मित्तल को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सर्वोपरि है। ऐसे समर्पित शिक्षकों का सम्मान नई पीढ़ी को शिक्षा के प्रति प्रेरित करता है।
इस दौरान पत्रकार प्रेम चंद वर्मा, राकेश कुमार वर्मा, योगेश चौहान, रवि गहलोत, हारुन सैफी, मेहरबान कुरैशी, सन्नी सैनी, तनवीर सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। समझो भारत से शाकिर अली की ख़ास रिपोर्ट 
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