मौला अली की दूसरी मजलिस पर फूट फूटकर रोए सोगवार

बिडौली/झिंझाना। बिडौली सादात में आयोजित मौला अली की शहादत पर मजलिस में मौलाना ऑन मोहम्मद मुजफ्फरनगरी ने लोगों को खिताब किया। मजलिस का संचालन सैय्यद वसी हैदर, सैय्यद फजल अली उर्फ अच्छू मियां ने संयुक्त रूप से किया। मजलिस में मुल्क की अमन शांति के लिए दुआ कराई गई। 

सोमवार की रात्रि पूर्व प्रधान फजल अली उर्फ अच्छू की आवास पर आयोजित मजलिस में मौलाना ऑन मोहम्मद मुजफ्फरनगरी ने हजरत अली की शहादत के बारे में बयान करते हुए कहा कि  मस्जिद-ए-कूफा में अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्ज़िम ने जहर में बुझी तलवार से पीछे से वार कर हजरत अली को जख्मी कर दिया था। नमाज के दौरान हुए इस हमले के बाद उनके बेटे, हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन उन्हें घर ले गए, जहां तबीब असीर इब्ने अमर ने उनकी शहादत की खबर दी। इस वाकये को सुनकर मजलिस में मौजूद अकीदतमंद फूट-फूट कर रोने लगे। 

मौलाना ने हजरत अली की जिंदगी के बारे में विस्तार से बयान किया। रात्रि में जागकर तथा मातम दारी की गई। मजलिस में नफीस शाह, सैय्यद गुलाम अली, सैय्यद वसी हैदर, ने नोहा खानी की, वहीं सैय्यद अली रजा, सैय्यद गुलाम अली ने अपना मंजूम कलाम पेश किया।

अजीम शाह, मिन्हाल मेहदी, हसन अली, शुएब, ने सोज खानी की। अंत में मौलाना ऑन मोहम्मद ने देश में अमन शांति के लिए दुआ कराई। मजलिस में सलीम शाह, मंसूर शाह हामिद शाह, मेहताब मेहदी, नियाज हैदर, बाकिर शाह, गुड्डू मियां, मौलाना मंजर अब्बास, दानियाल जैदी आदि लोग मौजूद रहे।

नई दिल्ली में Women’s Day Conclave: अभिनेता राकेश बेदी की मौजूदगी में महिला सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य पर हुई प्रेरक चर्चा

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजधानी नई दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में आयोजित Women’s Day Conclave एक प्रेरणादायक और यादगार कार्यक्रम के रूप में सामने आया। इस कार्यक्रम का आयोजन Cittamindful Trust द्वारा किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लेकर महिला सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रहे प्रसिद्ध अभिनेता राकेश बेदी, जिनकी उपस्थिति ने पूरे आयोजन को और भी खास बना दिया। अपने सहज और प्रभावशाली अंदाज़ के लिए पहचाने जाने वाले राकेश बेदी मंच पर पूरे उत्साह के साथ पहुंचे और उन्होंने अपनी बात की शुरुआत मशहूर अंदाज़ में “अस्सलाम-ओ-अलैकुम, ल्यारी दिल्ली में है!” कहकर की। उनके इस अभिवादन ने पूरे सभागार में जोश और तालियों की गूंज पैदा कर दी।

इसके बाद उन्होंने महिलाओं की शक्ति, संघर्ष और सम्मान को समर्पित एक भावनात्मक कविता सुनाई। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को गहराई से प्रभावित किया और महिला सशक्तिकरण के महत्व को एक संवेदनशील और प्रेरक रूप में सामने रखा।

राकेश बेदी वर्ष 2020 से Cittamindful Trust के साथ जुड़े हुए हैं और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता तथा भावनात्मक कल्याण के मिशन को समर्थन देते आ रहे हैं। यह संस्था मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने और जरूरतमंद लोगों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से कार्य कर रही है।

Cittamindful Trust की स्थापना डॉ. मणिका पाल और डॉ. अदिति ग्रोवर ने की थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना है। ट्रस्ट ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को निःशुल्क काउंसलिंग सेवाएँ प्रदान करता है, जिससे मानसिक और भावनात्मक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सहायता मिल सके।

अब तक यह संस्था 78,000 से अधिक लोगों को मानसिक और भावनात्मक सहयोग प्रदान कर चुकी है। इसके माध्यम से लोगों को अपनी भावनाएँ व्यक्त करने, मानसिक तनाव से उबरने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए एक सुरक्षित और सहायक मंच मिला है।

कार्यक्रम में वक्ताओं और प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि महिला सशक्तिकरण केवल एक विचार नहीं बल्कि समाज के विकास का महत्वपूर्ण आधार है। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना आज के समय की एक बड़ी आवश्यकता है।

Women’s Day Conclave ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि यदि समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और जागरूकता के साथ सामूहिक प्रयास किए जाएँ, तो सकारात्मक और स्थायी बदलाव संभव है।


(नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा महाना की रिपोर्ट)
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पर्यटन परिवहन की समस्याओं पर एआईएमटीसी की पहल, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से हुई महत्वपूर्ण मुलाकात

नई दिल्ली। देश में पर्यटन परिवहन से जुड़ी समस्याओं को लेकर ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट काँग्रेस (AIMTC) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर पर्यटन परिवहन क्षेत्र से जुड़े अहम मुद्दों को उनके सामने रखा और शीघ्र समाधान की मांग की।

मुलाकात के दौरान डॉ. हरीश सभरवाल ने बताया कि हाल के समय में कुछ राज्यों में लागू किए गए नियमों के कारण पर्यटन परिवहन से जुड़े संचालकों और यात्रियों को कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं का असर सीधे तौर पर पर्यटन गतिविधियों और देश के राजस्व पर भी पड़ सकता है।

राजस्थान में छोटे पर्यटक वाहनों पर लगेज कैरियर प्रतिबंध का मुद्दा

बैठक के दौरान राजस्थान में छोटे पर्यटक वाहनों पर रूफ-माउंटेड लगेज कैरियर (छत पर सामान रखने की व्यवस्था) पर लगाए गए प्रतिबंध का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया। डॉ. सभरवाल ने बताया कि छोटे पर्यटन वाहन जैसे अर्बानिया, टेम्पो ट्रैवलर और टोयोटा क्रिस्टा आदि में यात्रियों के सामान के लिए पर्याप्त अंदरूनी स्थान नहीं होता।

ऐसे में यदि लगेज कैरियर की व्यवस्था पूरी तरह बंद कर दी जाती है तो वाहन संचालकों के लिए यात्रियों का सामान ले जाना मुश्किल हो जाता है। कई जगहों पर वाहनों को रास्ते में रोककर कार्रवाई भी की जा रही है, जिससे देशी-विदेशी पर्यटकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआईएमटीसी यात्री वाहनों का उपयोग अवैध माल ढुलाई के लिए किए जाने का समर्थन नहीं करता और सरकार के नियमों का सम्मान करता है। लेकिन पर्यटकों के वैध सामान के लिए लगेज कैरियर की अनुमति पर्यटन संचालन के लिए आवश्यक है।

चारधाम यात्रा में ग्रीन कार्ड व्यवस्था पर भी उठी चिंता

बैठक के दौरान उत्तराखंड में होने वाली चारधाम यात्रा के दौरान बाहरी राज्यों के पर्यटक वाहनों के लिए लागू ग्रीन कार्ड व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया गया।

डॉ. सभरवाल ने बताया कि उत्तराखंड में पंजीकृत वाहनों को छह महीने की ग्रीन कार्ड वैधता मिलती है, जबकि अन्य राज्यों के वाहनों को केवल 15 दिन की वैधता दी जाती है। इससे अन्य राज्यों के वाहन संचालकों को बार-बार आवेदन और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा होती है, जिसे कई बार 15 दिनों में पूरा करना संभव नहीं होता। मौसम खराब होने, भूस्खलन या रास्ते बंद होने की स्थिति में यात्राएं और भी देर से पूरी होती हैं। ऐसी स्थिति में ग्रीन कार्ड की वैधता रास्ते में ही समाप्त हो सकती है, जिससे यात्रियों और ऑपरेटरों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।

इसके अलावा कई बार अगले ट्रिप के लिए 48 घंटे पहले आवेदन करने की प्रक्रिया भी व्यावहारिक नहीं हो पाती, जिससे यात्रियों की होटल या हेलीकॉप्टर बुकिंग तक प्रभावित हो जाती है।

पर्यटन क्षेत्र के हित में समाधान की मांग

डॉ. हरीश सभरवाल ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि पर्यटन क्षेत्र के हित में इन दोनों मुद्दों पर संबंधित राज्यों के साथ समन्वय कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। उनका कहना था कि यदि नियम संतुलित और व्यवहारिक होंगे तो देशभर से आने वाले पर्यटन वाहन संचालकों को भी सम्मानजनक माहौल मिलेगा और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बैठक के दौरान इन मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए भरोसा दिलाया कि इन समस्याओं का समाधान निकालने के लिए संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी, ताकि पर्यटन परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाया जा सके।

पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान होता है तो देश में पर्यटन गतिविधियों को और गति मिल सकती है, जिससे रोजगार और राजस्व दोनों में वृद्धि होगी।

— रिपोर्ट: पत्रकार ऊषा माहना, नई दिल्ली
राष्ट्रीय समाचार पत्र / पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल के लिए विशेष रिपोर्ट

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रमजान के तीसरे जुमे की नमाज़ अकीदत के साथ अदा, मस्जिदों में उमड़ी नमाज़ियों की भीड़

बिड़ौली/झिंझाना (शामली, उत्तर प्रदेश): पवित्र माह रमजान के तीसरे जुमे के अवसर पर क्षेत्र की सभी मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाज़ियों ने अकीदत और खुसू-खुज़ू के साथ जुमा की नमाज़ अदा की। इस मौके पर मस्जिदों में खास रौनक देखने को मिली और लोगों ने अल्लाह की इबादत में अपना समय बिताया।

जुमा की नमाज़ से पहले मस्जिदों के इमामों और आलिम-ए-दीन ने रमजान की अहमियत, रोज़े के फ़ज़ाइल और दीनी तालीमात पर बयान किया। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना सब्र, शुक्र और कुरान की तिलावत का महीना है। इस महीने में की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।

उलमा-ए-किराम ने अपने बयान में कहा कि जो व्यक्ति जानबूझकर रोज़ा छोड़ देता है, वह अगर पूरी ज़िंदगी भी रोज़े रखे तो उस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि नमाज़, ज़कात और हज के सवाब के बारे में इंसानों को जानकारी है, लेकिन रोज़े का असली सवाब केवल अल्लाह ही जानता है। रोज़ा इंसान को बुराइयों से बचने और नेक रास्ते पर चलने की हिदायत देता है।

बयान के बाद खुतबा हुआ और फिर जमाअत के साथ जुमा की नमाज़ अदा की गई। नमाज़ के बाद लोगों ने देश और समाज में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।

बिड़ौली की जामा मस्जिद में मौलाना अजीमुद्दीन, मुस्तफवी मस्जिद में मौलाना ओन मोहम्मद और आइसा मस्जिद में मौलाना आसिफ ने जुमा की नमाज़ अदा कराई।


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झिंझाना (शामली), उत्तर प्रदेश से पत्रकार शाकिर अली की खास रिपोर्ट

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होली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं

रंगों का पावन पर्व होली आप सभी के जीवन में प्रेम, सौहार्द, खुशहाली और नई ऊर्जा का संचार करे। यह मंगलमय अवसर आपके जीवन को खुशियों के रंगों से भर दे तथा आपके परिवार में सुख, समृद्धि और आपसी भाईचारे की मिठास बढ़ाए।

ईश्वर से प्रार्थना है कि होली 2026 का यह पावन त्योहार आपके जीवन में उन्नति, स्वास्थ्य और सफलता की नई किरणें लेकर आए तथा हर दिन को खुशियों की बौछार से सराबोर कर दे।

अनुपमा टंडन
प्रेसिडेंट – रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन
AIA, ब्लॉक जनकपुरी
वाइस प्रेसिडेंट – फेडरेशन ऑफ जनकपुरी, हरि नगर, न्यू दिल्ली

हरीश सभरवाल
राष्ट्रीय अध्यक्ष
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस

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नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा महाना का खास लेख

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बागपत में नई मैग्नीशियम खाद का शुभारम्भ: किसानों की पैदावार में दिखा सकारात्मक असर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान जिले बागपत से किसानों के लिए एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। जगन्नाथ कम्पनी द्वारा जगन्नाथ ब्रांड मैग्नीशियम सल्फेट खाद के निर्माण और वितरण का औपचारिक शुभारम्भ किया गया। एक समारोह के दौरान इसकी शुरुआत की गई, जिसमें कंपनी प्रतिनिधियों और किसानों की उपस्थिति रही।

का नया कदम

कंपनी के निदेशक श्री मुकेश जैन ने जानकारी दी कि जगन्नाथ कम्पनी को इसी महीने कृषि विभाग लखनऊ से मैग्नीशियम सल्फेट खाद निर्माण का लाइसेंस प्राप्त हुआ है। लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी ने उत्पादन शुरू कर दिया है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल कंपनी की उत्पादन क्षमता सीमित है और अभी प्राथमिकता बागपत जिले के किसानों को यह खाद उपलब्ध कराने की है। धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाने की योजना है।

गांव-गांव पहुंची नई खाद

कंपनी की प्रतिनिधि मिली पांडे और हितेश कुमार ने खेकड़ा, बड़ागांव, सुन्हैड़ा, सतलावरपुर खेड़ी, तकरपुर, बसी, पाबला, बंदपुर, मऊ, सांकरौद, गौरीपुर निवाड़ा, काट्ठा सहित लगभग दो दर्जन गांवों में किसानों के साथ बैठकें कीं।

इन बैठकों के दौरान किसानों को नई मैग्नीशियम सल्फेट खाद के उपयोग की जानकारी दी गई और कई खेतों में इसका प्रयोग भी कराया गया।

किसानों का अनुभव: बेहतर परिणाम

प्रेसवार्ता में उपस्थित किसान प्रतिनिधि आदि प्रकाश, सोनू त्यागी और मोहित कुमार ने बताया कि उन्होंने इस खाद का प्रयोग गेहूं, धान, ज्वार, गन्ना और आलू जैसी फसलों में किया।

किसानों के अनुसार—

  • गेहूं और धान के दाने आकार में बड़े बने।
  • गन्ने की फसल मोटी और स्वस्थ दिखाई दी।
  • फसलों की समग्र गुणवत्ता में सुधार देखा गया।

किसानों का कहना है कि मैग्नीशियम सल्फेट पौधों में हरित लवक (क्लोरोफिल) निर्माण में सहायक होता है, जिससे फसल की वृद्धि और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है।

स्थानीय स्तर पर कृषि को मजबूती

बागपत जैसे कृषि आधारित जिले में स्थानीय स्तर पर खाद निर्माण की शुरुआत किसानों के लिए राहतभरी खबर मानी जा रही है। इससे न केवल समय पर खाद उपलब्ध होगी, बल्कि परिवहन लागत में भी कमी आने की संभावना है।

कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाकर अधिक किसानों तक इस उत्पाद को पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्रीय कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

बागपत (उत्तर प्रदेश) से पत्रकार ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट
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कोर्ट ने कसा शिकंजा: बेलेबल वारंट जारी होते ही गवाह पहुंचे अदालत, दर्ज कराई गवाही

हरियाणा के पानीपत स्थित सेशन कोर्ट में चल रहे बहुचर्चित मामले में आखिरकार वह मोड़ आ ही गया, जब अदालत की सख्ती के बाद मुख्य गवाह को पेश होना पड़ा। लगातार गैरहाजिरी से नाराज कोर्ट ने 10,000 रुपये का जमानती (बेलेबल) वारंट जारी किया, जिसके बाद गवाह महेंद्र सिंह चावला 2 मार्च को अदालत पहुंचे और अपनी गवाही दर्ज कराई।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मुख्य आरोपी और अन्य आरोपियों से जुड़ा हुआ है। इस केस में कार्तिक उर्फ राजू, तमराज उर्फ ताम्रध्वज उर्फ गोलू, नीरज उर्फ मोनू और नीलम उर्फ मोनू भी आरोपी हैं। सभी आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं और सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किए जा रहे हैं।

मामले में महेंद्र सिंह चावला मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता हैं। उनकी गवाही इस केस में बेहद अहम मानी जा रही है, लेकिन बीते कुछ समय से वे अदालत में पेश नहीं हो रहे थे।

6 फरवरी: मेडिकल आधार पर ली थी छूट

6 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान गवाह ने अपने वकील के माध्यम से अदालत से पेशी में छूट मांगी। आवेदन में बताया गया कि उनके बाएं कंधे में गोली लगने के पुराने घाव के कारण तेज दर्द है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए एक दिन की छूट दे दी और शेष गवाही के लिए 17 फरवरी की तारीख तय की।

17 फरवरी: कोर्ट का सख्त रुख

17 फरवरी को जब दोबारा सुनवाई हुई और सभी आरोपी वीसी से जुड़े, तब महेंद्र चावला ने फिर से कंधे के दर्द का हवाला देते हुए पेशी से छूट की अर्जी दी। इस बार उन्होंने कोई मेडिकल प्रमाण पत्र अदालत में पेश नहीं किया।

अदालत ने पिछली तारीखों का रिकॉर्ड देखा और पाया कि 15 जनवरी 2026 को भी वे स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थित रहे थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ‘सीआरपीसी की धारा 311 के तहत अर्जी खारिज होने के बाद से गवाह जानबूझकर अपनी गवाही से बचते प्रतीत होते हैं।’ इसके साथ ही छूट की अर्जी नामंजूर कर दी गई।

जारी हुआ 10 हजार का बेलेबल वारंट

गवाह के रवैये से नाराज अदालत ने 10,000 रुपये का जमानती वारंट जारी कर दिया। साथ ही 27 फरवरी 2026 के लिए समान राशि का जुर्माना भी तय किया गया।

अदालत की सख्ती का असर साफ दिखाई दिया। 2 मार्च को महेंद्र सिंह चावला पानीपत सेशन कोर्ट में उपस्थित हुए और अपनी गवाही दर्ज कराई।

आगे क्या?

कोर्ट ने आगे की गवाही की प्रक्रिया जारी रखते हुए अगली सुनवाई 5 मार्च के लिए निर्धारित की है।

यह घटनाक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि न्यायालय गवाही जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही को हल्के में नहीं लेता। कानून की प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने के लिए अदालत का यह सख्त रुख न्यायिक व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है।

पानीपत (हरियाणा) से पत्रकार ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट
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