यूपी में अंडों की राजनीति! सरकार ने लगाया ‘एक्सपायरी डेट’ नियम, विपक्ष ने योगी सरकार पर साधा निशाना

लखनऊ, 19 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता ताजगी सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से राज्य में बिकने वाले हर अंडे पर उत्पादन तारीख और एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं को ताजा और सुरक्षित अंडा उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है।

सरकारी निर्देशों के अनुसार, अब दुकानदार सिर्फ “ताजा” लिखकर अंडे नहीं बेच पाएंगे। हर अंडे पर स्पष्ट रूप से लेइंग डेट और एक्सपायरी डेट अंकित होना जरूरी होगा। आदेश का उल्लंघन करने पर अंडों को जब्त या नष्ट किया जा सकता है और जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

विपक्ष ने किया हमला

हालांकि, इस आदेश को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इसे “फालतू और दिखावटी नियम” करार दिया। उनका कहना है कि बड़े व्यापारी नियम का पालन कर लेंगे, लेकिन छोटे विक्रेता और ग्रामीण किसान, जिनके पास स्टैम्प मशीन या संसाधन नहीं हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अखिलेश यादव ने कहा, “सरकार अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए ऐसे दिखावटी नियम बना रही है। यह फैसला केवल अंडों तक सीमित नहीं, बल्कि जनता को भ्रमित करने की कोशिश है। शायद सरकार खुद अपनी ‘एक्सपायरी डेट’ देख रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि शासन को पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर और छोटे व्यापारियों की तैयारी सुनिश्चित करनी चाहिए थी, वरना नियम लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा।

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि यह आदेश जनता की सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए है। अधिकारियों का कहना है कि अब ग्राहक आसानी से देख पाएंगे कि अंडा कब दिया गया और कब तक सुरक्षित है।

पशुपालन और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पुराने या खराब अंडों की बिक्री रोकने के लिए यह कदम जरूरी है। बड़े पोल्ट्री फार्म और व्यापारी भी इसे सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा।

छोटे व्यापारियों की चिंता

वहीं, छोटे व्यापारी और ग्रामीण किसान इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं। उनका कहना है कि डेट स्टैम्प मशीन खरीदना महंगा है और हर अंडे पर तारीख अंकित करना छोटे स्तर पर व्यावहारिक रूप से कठिन होगा। कुछ विशेषज्ञों का भी कहना है कि राज्य में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज की कमी है, जिससे अंडों की ताजगी बनाए रखना मुश्किल होगा।

राजनीतिक पहलू

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश अब केवल खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा। यह राजनीतिक बयानबाजी और चुनावी रणनीति से भी जुड़ गया है। विपक्ष इसे सरकार की असफलताओं को छुपाने और दिखावटी कदम उठाने के रूप में देख रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे जनता की सुरक्षा और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम मान रहा है।

अब देखना यह होगा कि जनता को इसका वास्तविक लाभ मिलेगा या यह केवल सियासी विवाद का हिस्सा बनकर रह जाएगा। रिपोर्ट- गुलवेज़ आलम कैराना
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ईद से पहले देवबंद में क्या हुआ ऐसा कि ‘आयरन लेडी’ इरम उस्मानी को करनी पड़ी खास अपील? जानिए पूरी कहानी

देवबंद। ईद-उल-फितर से ठीक पहले देवबंद में एक ऐसी अपील सामने आई है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। समाज सेवा के क्षेत्र में मजबूत पहचान रखने वाली ‘आयरन लेडी’ इरम उस्मानी ने मुसलमानों से एक अहम और जिम्मेदारी भरी गुजारिश की है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईद की नमाज सड़कों पर अदा न करें, बल्कि ईदगाह और मस्जिदों में ही नमाज पढ़ें, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा और अव्यवस्था से बचा जा सके।

इरम उस्मानी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि त्योहारों की असली खूबसूरती शांति, अनुशासन और भाईचारे में होती है। अगर हम नियमों का पालन नहीं करेंगे तो यह त्योहार की भावना के खिलाफ होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि शासन-प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करें और एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें।

देवबंद में इरम उस्मानी का नाम सिर्फ अपीलों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने कई मौकों पर अपनी सक्रियता से समाज में एक मिसाल कायम की है। खासकर सीएसए के प्रदर्शन में उनकी मुख्य भूमिका ने उन्हें एक मजबूत और बेबाक आवाज के रूप में स्थापित किया। उस दौरान उन्होंने जिस तरह नेतृत्व किया, उसकी चर्चा आज भी लोगों के बीच होती है।

गरीब, मजबूर और बेसहारा लोगों के लिए इरम उस्मानी हमेशा आगे खड़ी नजर आती हैं। किसी भी जरूरतमंद की मदद के लिए वह बिना किसी हिचक के मैदान में उतरती हैं, यही वजह है कि क्षेत्र में उनकी छवि एक सशक्त समाज सेविका के रूप में बनी हुई है।

ईद जैसे बड़े त्योहार पर उनकी यह अपील केवल एक सलाह नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और सोच को दर्शाती है। अब देखना यह है कि लोग उनकी इस अपील को कितना अपनाते हैं, लेकिन इतना तय है कि इरम उस्मानी का यह संदेश देवबंद में चर्चा का विषय बन चुका है।रिपोर्ट - गुलवेज़ आलम कैराना
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सिल्वर डेल पब्लिक स्कूल में सजी आर्ट एंड साइंस एग्ज़ीबिशन, छात्रों की प्रतिभा ने जीता दिल

झिंझाना/कैराना। सिल्वर डेल पब्लिक स्कूल में आर्ट एंड साइंस एग्ज़ीबिशन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों की रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच का शानदार संगम देखने को मिला।प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए अपने हुनर का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

एग्ज़ीबिशन के दौरान बच्चों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल, आकर्षक प्रोजेक्ट्स और कलात्मक प्रस्तुतियों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। छात्रों की मेहनत और कल्पनाशीलता को देखकर अभिभावकों और अतिथियों ने जमकर सराहना की।कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसके साथ दीनियात (धार्मिक ज्ञान) पर आधारित सवाल-जवाब प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और अपने ज्ञान व समझ का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कारी अहसान साहब ने छात्रों से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे और उनके सटीक जवाबों की प्रशंसा की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के बौद्धिक विकास, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय प्रबंधन एवं स्टाफ के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अंत में सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। समझो भारत के लिए शाकिर अली की ख़ास रिपोर्ट 
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देवबंद में ‘आयरन लेडी’ इरम उस्मानी का जलवा! एमएफआर स्कूल समारोह में बच्चों संग बिखेरी प्रेरणा की रोशनी

देवबंद। मोहल्ला पठानपुरा स्थित एमएफआर मेमोरियल स्कूल में आयोजित वार्षिक परीक्षा परिणाम समारोह उस समय खास बन गया, जब मंच पर समाजसेवा की मिसाल और ‘आयरन लेडी’ के नाम से विख्यात इरम उस्मानी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से पूरे कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी। उनके प्रेरणादायक शब्दों ने न केवल बच्चों, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों के दिलों में भी नई उम्मीद जगा दी।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता सलीम कुरैशी, कांग्रेस नेता राहत खलील और समाजसेविका इरम उस्मानी मौजूद रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल प्रबंधन द्वारा अतिथियों के भव्य स्वागत के साथ हुई। स्कूल के प्रबंधक खलील खान ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित किए गए और कक्षा में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को मेडल व ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। बच्चों की उपलब्धियों पर तालियों की गूंज से पूरा परिसर गूंज उठा।

इस मौके पर इरम उस्मानी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा ही वह सबसे मजबूत हथियार है, जो बच्चों के भविष्य को संवार सकता है। उन्होंने बच्चों को मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी का संदेश देते हुए कहा कि सफलता उन्हीं के कदम चूमती है, जो निरंतर प्रयास करते रहते हैं। उनके आत्मविश्वास से भरे शब्दों ने बच्चों के मन में नई ऊर्जा और कुछ बड़ा करने का जुनून भर दिया।

इरम उस्मानी की सादगी, दृढ़ता और समाज के प्रति समर्पण ने कार्यक्रम में मौजूद हर व्यक्ति को प्रभावित किया। एक मजबूत और संवेदनशील महिला नेतृत्व की झलक उनके व्यक्तित्व में साफ दिखाई दी, जिसने उन्हें ‘आयरन लेडी’ की पहचान दिलाई है। शिक्षा, समाजसेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनका योगदान लगातार लोगों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

समारोह के अंत में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर स्कूल स्टाफ, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। रिपोर्ट - गुलवेज़ आलम कैराना
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2 महीने से वेतन नहीं, ऊपर से नौकरी से निकाला! थाना भवन के सफाई कर्मचारियों का फूटा गुस्सा

शामली। थाना भवन नगर पंचायत में स्वच्छता अभियान के तहत काम कर रहे सफाई कर्मचारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। कर्मचारियों ने ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनका दो महीने का वेतन रोका गया है और बिना किसी सूचना के उन्हें काम से हटा दिया गया।

जानकारी के अनुसार, थाना भवन कस्बे में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और सफाई कार्य में लगे करीब आधा दर्जन कर्मचारी 20 दिसंबर 2025 से ठेकेदार के माध्यम से कार्य कर रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि तय वेतन 11,000 रुपये प्रतिमाह होने के बावजूद उन्हें केवल 7,500 रुपये ही दिए गए, जबकि हर महीने 3,500 रुपये “फंड” के नाम पर काट लिए जाते रहे।

पीड़ित कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जनवरी और फरवरी 2026 का पूरा वेतन अब तक नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। इतना ही नहीं, ठेका समाप्त होने का हवाला देकर उन्हें अचानक सेवा से हटा दिया गया, जबकि उन्हें पहले से कोई सूचना तक नहीं दी गई।

कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने 7 मार्च 2026 को नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को लिखित शिकायत भी दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि न तो बकाया वेतन मिला है और न ही कटे हुए फंड का कोई हिसाब दिया गया है।

इस मामले में आशु, शंकर, सुमित, हर्ष, ललित और प्रीतम सहित अन्य कर्मचारियों ने श्रम विभाग से गुहार लगाई है कि उनका रुका हुआ वेतन दिलाया जाए, फंड की कटौती वापस कराई जाए और उन्हें दोबारा नौकरी पर रखा जाए।

वहीं, राष्ट्रीय वाल्मीकि समाज प्रतिनिधि मंच के पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए श्रम विभाग से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। चेतावनी: कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
रिपोर्ट - गुलवेज़ आलम कैराना
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करोड़ों की जमीन पर कब्जे की ‘साजिश’ का विस्फोट! फर्जी शिकायतों से प्रशासन को गुमराह करने का खेल, दिव्यांग वारिसों ने उठाई आवाज

शामली। जनपद के झिझाना क्षेत्र के ग्राम जमालपुर में मेरठ-करनाल राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी कीमती जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करोड़ों रुपये की बताई जा रही इस भूमि को लेकर अब खुलकर आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं। पीड़ित पक्ष ने कुछ लोगों पर सुनियोजित तरीके से फर्जी शिकायतें कर जमीन हड़पने की साजिश रचने और प्रशासन को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम जमालपुर स्थित खसरा संख्या 429 की भूमि, जिसका कुल रकबा 0.4900 हेक्टेयर है, में से 0.2850 हेक्टेयर भूमि वर्ष 2011 में सतपाल सिंह पुत्र गंगा द्वारा विधिवत बैनामा (रजि० संख्या 11991 दिनांक 26-11-2011) के माध्यम से खरीदी गई थी। यह भूमि अनिल कुमार उर्फ आलम एवं श्रीमती खेमो देवी निवासी मोहल्ला शेखामैदान, झिझाना से ली गई थी। बैनामा के बाद से ही परिवार उक्त भूमि पर काबिज रहा और सरकारी अभिलेखों में नाम दर्ज होता चला आ रहा है।

वर्ष 2022 में सतपाल सिंह के निधन के बाद उक्त भूमि उनके पुत्रों कमल सैनी और सुधीर के नाम विरासत के आधार पर खतौनी में दर्ज हो गई। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी ही वैध खरीदी हुई भूमि में से कुछ हिस्सों के प्लॉट कर बैनामे किए हैं, जिन पर क्रेताओं का कब्जा भी है और इस पर किसी प्रकार का विवाद पहले नहीं था।

यहीं से शुरू हुआ विवाद और आरोपों का दौर

कमल सैनी का आरोप है कि जोगिंद्र निवासी अशरफपुर और शाहिद पुत्र वहीद खान निवासी जमालपुर गाड़ीवाला सहित कुछ लोग एक राय होकर उनकी जमीन को हड़पने की नीयत से लगातार झूठी शिकायतें उच्च अधिकारियों के पास भेज रहे हैं। इन शिकायतों में बैनामों को फर्जी बताया जा रहा है, जबकि पीड़ित पक्ष का दावा है कि सभी बैनामे उनकी अपनी भूमि से ही किए गए हैं और पूरी तरह वैध हैं।

पीड़ितों का कहना है कि विपक्षी लोगों का इस जमीन से कोई लेना-देना नहीं है और न ही उनके पास कोई वैध दस्तावेज है। इसके बावजूद वे प्रशासन पर दबाव बनाकर और झूठे आरोप लगाकर जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं।

दिव्यांग पीड़ित पर बढ़ा दबाव, प्रताड़ना के आरोप

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि कमल सैनी दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। उनका आरोप है कि विपक्षी उनकी शारीरिक स्थिति का फायदा उठाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और लगातार दबाव बना रहे हैं, जिससे वह बेहद परेशान हैं।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

पीड़ित पक्ष ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि फर्जी शिकायत करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और उन्हें न्याय मिल सके।

इलाके में चर्चा, बढ़ सकता है विवाद

यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हाईवे से सटी कीमती जमीन होने के कारण विवाद और भी गंभीर माना जा रहा है। यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।

अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर इस विवाद में सच्चाई किसके पक्ष में सामने आती है।
रिपोर्ट - गुलवेज़ आलम कैराना
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🕌 नूरानी मस्जिद, अजीजपुर में तरावीह मुकम्मल—अमन और भाईचारे की दुआओं से गूंजा माहौल

बिड़ौली/झिंझाना, शामली (उत्तर प्रदेश):

रमजान के पाक महीने की रूहानी फिज़ा में मंगलवार देर रात गांव अजीजपुर स्थित नूरानी मस्जिद में तरावीह की नमाज़ मुकम्मल होने के मौके पर एक खास दुआ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूरे गांव में इबादत, अदब और भाईचारे का खूबसूरत माहौल देखने को मिला।

तरावीह के दौरान हाफिज अशरफ ने कुरान-ए-मजीद की तिलावत बेहद सलीके और खूबसूरती के साथ पेश की, जिसे कारी शोएब और अन्य नमाजियों ने बड़े ध्यान और अकीदत के साथ सुना। मस्जिद के इमाम शमीम अहमद ने भी नमाज़ की अदायगी और व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई, जिससे पूरा कार्यक्रम बेहद अनुशासित और रूहानी बना रहा।

कार्यक्रम को सफल बनाने में गांव के वर्तमान बीडीसी तौफीक का विशेष सहयोग रहा। इस मौके पर क्षेत्र के कई सम्मानित लोग मौजूद रहे, जिनमें पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज मोहम्मद इनाम, कारी उस्मान, सुफियान, हाफिज जब्बार, हाफिज जुबेर, मुदस्सिर, राशिद, जावेद, गफ्फार, गुलफाम, मोदीराम, राकिब सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

कार्यक्रम के समापन पर मुल्क की तरक्की, अमन-चैन और आपसी भाईचारे के लिए सामूहिक दुआ की गई। इसके बाद हाफिज अशरफ के आवास पर नाश्ता एवं भोजन वितरण का भी इंतजाम किया गया, जिसमें सभी लोगों ने मिलकर शिरकत की।

इस तरह का आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और सौहार्द का संदेश भी देता है।


✍️ रिपोर्ट: शाकिर अली
📍 बिडौली सादात, झिंझाना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश)
📞 8010884848, 9528680561
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