आशूरा पर बिडौली में निकला मातमी जुलूस, इमाम हुसैन की कुर्बानी को नम आंखों से किया गया याद

बिडौली (शामली, उत्तर प्रदेश):
मुहर्रम की 10वीं तारीख यानी यौमे आशूरा के अवसर पर शामली जनपद के बिडौली गांव में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शिया समुदाय द्वारा पारंपरिक श्रद्धा और अकीदत के साथ मातमी जुलूस निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शबी-ए-ताबूत, अलम और जुलजनाह के साथ जुलूस में हिस्सा लिया तथा मातम कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

जुलूस की शुरुआत पूर्व प्रधान फजल अली उर्फ अच्छू मियां के आवास स्थित इमामबाड़े से हुई। इसके बाद यह गांव की विभिन्न गलियों से होकर कर्बला तक पहुंचा, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। पूरे मार्ग में "या हुसैन" की सदाएं गूंजती रहीं और वातावरण गमगीन होने के साथ-साथ श्रद्धा से भी ओत-प्रोत दिखाई दिया।

इससे पूर्व आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मोहम्मद वसीम (बहराइच) ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने इंसानियत, न्याय और सत्य की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश हर दौर में अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े रहने और मानवता की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।

मातमी जुलूस के दौरान विभिन्न स्थानों पर अकीदतमंदों और सामाजिक संगठनों की ओर से शर्बत, चाय और लंगर की व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए और पुलिस बल तैनात रहा, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

इस अवसर पर अली रजा, हमजा जैदी, सैय्यद वसी हैदर, नफीस शाह, कमर अब्बास, फजल अली उर्फ अच्छू मियां, नियाज हैदर, हामिद शाह, डॉ. बाकर जैदी, आफताब मेहदी, सलीम शाह, साजिद शाह, मोहसिन रिजवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

आशूरा का यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि त्याग, सत्य, न्याय और इंसानियत के लिए दी गई महान कुर्बानी की याद को जीवंत रखने का माध्यम भी है। यही संदेश आज भी समाज को आपसी भाईचारे, धैर्य और मानव मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरित करता है।

रिपोर्ट: शाकिर अली, बिडौली सादात (जनपद शामली, उत्तर प्रदेश)
प्रकाशन: समझो भारत राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल

मेरठ थाना ब्रह्मपुरी क्षेत्र लव कुश कॉलोनी में संदिग्ध परिस्थितियों मैं युवक हुई मौत

मेरठ। थाना ब्रह्मपुरी क्षेत्र की लवकुश कॉलोनी स्थित गढ़वाल डेयरी पर कार्यरत एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान मनीष पुत्र धर्मपाल निवासी लिसाड़ी के रूप में हुई है, जो डेयरी पर नौकरी करता था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे मनीष डेयरी की ऊपरी मंजिल पर गया, जहां उसका शव फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही थाना ब्रह्मपुरी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस आत्महत्या और अन्य संभावित पहलुओं सहित हर एंगल से मामले की जांच कर रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल युवक की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

मया बाजार में श्रद्धा और अकीदत के साथ मनाया गया यौमे आशूरा, ताजियों का हुआ सुपुर्द-ए-खाक

अयोध्या, मया बाजार।मोहर्रम की 10वीं तारीख यानी यौमे आशूरा के अवसर पर अयोध्या जनपद के मया बाजार क्षेत्र में धार्मिक श्रद्धा, अनुशासन और शांतिपूर्ण वातावरण के बीच विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की शुरुआत मजलिस से हुई, जिसमें हाफिज मोहम्मद मेराज और हाफिज मोहम्मद इमरान ने इमाम हुसैन की शहादत और उनके संदेश पर आधारित नातिया कलाम एवं तकरीर पेश की। वक्ताओं ने कर्बला की घटना को सत्य, इंसाफ, सब्र और कुर्बानी की मिसाल बताते हुए लोगों से इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

मोहर्रम के अवसर पर दोपहर बाद से क्षेत्र में खिचड़ा और छबील (शरबत) का वितरण किया गया, जिसमें सभी समुदायों के लोगों ने भाग लिया। पूरे दिन धार्मिक श्रद्धा और सामाजिक सौहार्द का वातावरण देखने को मिला।

शाम करीब 6:30 बजे मया बाजार स्थित कनकपुर प्राइमरी स्कूल के पीछे बेलाताली कर्बला में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए, जिससे सभी कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुए।

कार्यक्रम में मास्टर मुबारक अली इदरीशी, मोहम्मद कैफ इदरीशी, अबरार आलम अंसारी, शमसुद्दीन, मोहम्मद नईम, मोहम्मद मुस्तकीम, मोहम्मद अली, दीन अली, वारिस अली, मोहर्रम अली, मोहम्मद शालू, मोहम्मद अरमान सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

यौमे आशूरा केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि इंसानियत, न्याय, त्याग और सत्य के लिए संघर्ष की उस ऐतिहासिक विरासत की याद भी है, जिसे इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अपने सर्वोच्च बलिदान से अमर कर दिया।

रिपोर्ट: ज़मीर आलम
उत्तर प्रदेश डेस्क

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मेरठ थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र में दर्दनाक हादसा 18 वर्षीय छात्र बंटी की मौत

मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में खिर्वा फ्लाईओवर के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में पावलीखास गांव के रहने वाले 18 वर्षीय छात्र बंटी की मौत हो गई है, जबकि मोटरसाइकिल पर सवार उसके तीन अन्य साथी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह भीषण हादसा देर रात करीब एक बजे उस समय हुआ जब चारों दोस्त एक पेट्रोल पंप पर तेल डलवाने के लिए आए थे, तभी एक अनियंत्रित तेज रफ्तार पिकअप गाड़ी ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और बंटी की मौके पर ही मौत हो गई,
जबकि उसके साथ मौजूद तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें राहगीरों की मदद से नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतक बंटी ने हाल ही में 12वीं कक्षा पास की थी और बीए में दाखिला लेने की तैयारी कर रहा था, जिसकी मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया है। दुर्घटना को अंजाम देने के बाद पिकअप गाड़ी का चालक वाहन सहित अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही कंकरखेड़ा थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल पंप और खिर्वा फ्लाईओवर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि फरार पिकअप गाड़ी के नंबर को ट्रेस कर आरोपी चालक को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

सातवीं मोहर्रम पर बिडौली की फिज़ाओं में ग़म का आलम, शिया सोगवारों ने निकाला मातमी जुलूस

बिड़ौली।सातवीं मोहर्रम पर बिडौली की गलियों में अज़ादारी की रवायती सदा गूंज उठी जब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के वफ़ादार भाई हज़रत अब्बास अलमदार की याद में एक पुरअसर मातमी जुलूस निकाला गया। यह जुलूस इमामबारगाह से बरामद हुआ और अपने मुक़र्रर रास्तों से गुज़रता हुआ दोबारा इमामबारगाह पर खत्म हुआ। मंगलवार को गांव बिड़ौली सादात में एक मातमी जलूस निकाला गया जलूस का आगाज मजलिस से हुआ जुलूस से पहले एक पुरमग़ज़ मजलिस का एहतमाम किया गया 

जिसमें मक़बूल आलिमे-दीन मौलाना फरहत हुसैन आजमगढ़) ने अपने बयान में कहा हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम ने कर्बला में अपने भाई इमामे मजलूम की खातिर अपनी जान कुर्बान करके वफ़ा का ऐसा मिसाल पेश किया जिसे रहती दुनिया तक याद किया जाएगा। उनकी सीरत हमें बताती है कि हमे अच्छाई को अपनाना और बुराई से बचना चाहिए मौलाना फरहत हुसैन ने भाईचारे, इंसानियत और हुसैनी उसूलों पर चलने की तालीम दी। उनके दिल को छू लेने वाले बयान पर मजलिस में बैठे सोगवार अश्कबार हो गए।मातमी जुलूस अलम, ताबूत और ज़ुलजनाह बरामद किया गया
इस जुलूस में हज़रत अब्बास अलमदार का अलम, ताबूत और कर्बला के वाक़े का प्रतीक ज़ुलजनाह बरामद किया गया। शिया सोगवारों ने इन निशानियों की ज़ियारत की और अकीदत के फूल पेश किए।जुलूस तस्लीम शाह, जिंदा शाह, जाकिर शाह, कम्बर, शौकीन शाह और हसन अली,सय्यद वसी हैदर, साहब की गलियों से गुज़रा और आख़िर में इमामबारगाह पर ही खत्म हुआ। नोहे और मातम जुलूस में नौहा-ख़्वानी का सिलसिला भी जारी रहा जिसमें सैय्यद वसी हैदर, गुड्डू मियां, अली रज़ा, शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, नफीस शाह और सैय्यद कमर अब्बास ने अपने पुरग़म अशआर से फिज़ा को रंज व ग़म से भर दिया। सबीलें और तबर्रुकअज़ादारी के इस रूहानी माहौल में सोगवारों द्वारा राहगीरों और अज़ादारों के लिए चाय, शरबत और तबर्रुक का इंतेज़ाम किया गया। ये सबीलें हुसैनी खिदमत और मेहमानदारी का बेहतरीन नमूना थीं। सुरक्षा के इंतेज़ामात इस मातमी जुलूस के दौरान पुलिस फोर्स तैनात रही जिससे अम्नो अमान का माहौल बरकरार रहा और जुलूस पुरअमन तरीके से सम्पन्न हुआ।इस पुरग़म मौके पर,सलीम शाह,सय्यद फजल अली,गुड्डू मिया,अब्बास, रजा, सज्जाद मेहदी,असग़र मेहदी,दानियाल जैदी, डॉक्टर रजी बाकर, मन्नन मिया,साबित अली,कमर रजा,हामिद शाह,नियाज़ हैदर,मेहताब मेहदी,मिन्हाल मेहदी,हमजा जैदी, डॉक्टर बाक़र, बाकिर,अली, हुसैन अली, हुसैन अब्बास समेत बडी तादाद में सोगवारों ने शिरकत की और कर्बला के शहीदों को अश्कों का नजराना पेश किया।मोहर्रम की यह अज़ादारी न सिर्फ कर्बला के ग़म को ताज़ा करती है बल्कि इंसानियत, सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलने का पैग़ाम देती है। "समझो भारत" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए पत्रकार ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट 
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हजरत कासिम की शहादत की याद में निकला मातमी जुलूस, अकीदतमंदों ने पेश की श्रद्धांजलि

बिडौली/चौसाना (शामली)। मोहर्रम की आठवीं तारीख के अवसर पर जनपद शामली के चौसाना कस्बे में हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के भतीजे हजरत कासिम (अ.स.) की शहादत की याद में एक मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने भाग लेकर कर्बला के शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया।

जुलूस का शुभारंभ स्थानीय इमामबाड़े से हुआ, जो कस्बे के विभिन्न मार्गों और बाजारों से होकर कर्बला स्थल पर पहुंचकर सम्पन्न हुआ। जुलूस में अलम, ताबूत और जुलजनाह भी शामिल रहे, जिनकी अकीदतमंदों ने जियारत की। इस दौरान सबील-ए-कर्बला का विशेष प्रबंध किया गया तथा श्रद्धालुओं को मीठा शर्बत, चाय और अन्य जलपान वितरित किया गया।

जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मोहम्मद वसीम (बहराइच) ने इंसानियत, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, सद्भाव और नेक कार्यों को बढ़ावा देना ही इस्लाम की वास्तविक शिक्षा है।

मौलाना ने कर्बला की घटनाओं का उल्लेख करते हुए हजरत कासिम (अ.स.) सहित अहलेबैत की कुर्बानियों को याद किया और बताया कि कर्बला का संदेश सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए संघर्ष का प्रतीक है। मजलिस के दौरान उपस्थित सोगवारों ने भावुक होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके पश्चात निकाले गए मातमी जुलूस में विभिन्न अंजुमनों के नोहेख्वानों ने कर्बला के शहीदों की याद में नोहे पेश किए। जुलूस में युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी शामिल रहे तथा शांतिपूर्ण वातावरण में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। जुलूस की अध्यक्षता मंजर जैदी ने की। इस अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे।

मोहर्रम का महीना इस्लामी इतिहास में त्याग, बलिदान और मानवता के मूल्यों की याद दिलाने वाला माना जाता है। इसी संदेश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हर वर्ष ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल "समझो भारत" के लिए बिडौली सादात, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) से पत्रकार शाकिर अली की विशेष रिपोर्ट।

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बिड़ौली सादात में मोहर्रम की 6वीं तारीख पर निकला ताजिया अलम का जुलूस, सैकड़ों अकीदतमंद हुए शामिल

बिड़ौली सादात में अकीदत और एहतराम के साथ निकला ताजिया अलम का जुलूस, गूंजती रही नोहेखानी

शामली। मोहर्रम के पवित्र महीने की छठी तारीख पर बिड़ौली सादात में धार्मिक श्रद्धा, अनुशासन और आपसी भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सोमवार देर रात आयोजित मजलिस के बाद ताजिया अलम का जुलूस पूरी अकीदत और सम्मान के साथ निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य रात्रि में सय्यद इकबाल हैदर के आवास पर मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए उनके संदेशों पर प्रकाश डाला गया। मजलिस के समापन के बाद ताजिया अलम का जुलूस निकाला गया, जो सय्यद इकबाल हैदर के निवास से शुरू होकर इमाम बारगाह पहुंचकर सम्पन्न हुआ।

जुलूस के दौरान अकीदतमंदों ने ताजिया पर हाजिरी देकर अमन, सलामती और खुशहाली की दुआएं मांगीं। वातावरण में धार्मिक भावनाओं और श्रद्धा की विशेष झलक दिखाई दी। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और अपनी आस्था का इजहार किया।

कार्यक्रम में शौकीन हुसैन, हाशिम शाह, सय्यद वसी हैदर सहित अन्य नोहेख्वानों ने दर्दभरे नोहे पेश किए, जिन्हें सुनकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। नोहेखानी के माध्यम से कर्बला की कुर्बानियों और इंसानियत के संदेश को याद किया गया।

मजलिस से पूर्व मोहम्मद अब्बास के आवास पर नजर का विशेष एहतमाम किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आजादारों ने भाग लिया। इस दौरान सभी ने खैर-ओ-बरकत, अमन और भाईचारे के लिए दुआएं कीं।

जुलूस में फजल अली उर्फ अच्छू मियां, मोहम्मद अब्बास, आगाज़, सलीम शाह, नियाज हैदर, गुड्डू मियां, जिया मेहदी सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और धार्मिक सौहार्द का माहौल बना रहा।

मोहर्रम के अवसर पर आयोजित ऐसे धार्मिक कार्यक्रम न केवल कर्बला के महान संदेश को जीवंत रखते हैं, बल्कि समाज में एकता, त्याग, इंसाफ और मानवता के मूल्यों को भी मजबूत करने का कार्य करते हैं।

रिपोर्ट: शाकिर अली 

बिड़ौली सादात, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश)

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