शामली। थाना भवन नगर पंचायत में स्वच्छता अभियान के तहत काम कर रहे सफाई कर्मचारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। कर्मचारियों ने ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनका दो महीने का वेतन रोका गया है और बिना किसी सूचना के उन्हें काम से हटा दिया गया।
जानकारी के अनुसार, थाना भवन कस्बे में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और सफाई कार्य में लगे करीब आधा दर्जन कर्मचारी 20 दिसंबर 2025 से ठेकेदार के माध्यम से कार्य कर रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि तय वेतन 11,000 रुपये प्रतिमाह होने के बावजूद उन्हें केवल 7,500 रुपये ही दिए गए, जबकि हर महीने 3,500 रुपये “फंड” के नाम पर काट लिए जाते रहे।
पीड़ित कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जनवरी और फरवरी 2026 का पूरा वेतन अब तक नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। इतना ही नहीं, ठेका समाप्त होने का हवाला देकर उन्हें अचानक सेवा से हटा दिया गया, जबकि उन्हें पहले से कोई सूचना तक नहीं दी गई।
कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने 7 मार्च 2026 को नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को लिखित शिकायत भी दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि न तो बकाया वेतन मिला है और न ही कटे हुए फंड का कोई हिसाब दिया गया है।
इस मामले में आशु, शंकर, सुमित, हर्ष, ललित और प्रीतम सहित अन्य कर्मचारियों ने श्रम विभाग से गुहार लगाई है कि उनका रुका हुआ वेतन दिलाया जाए, फंड की कटौती वापस कराई जाए और उन्हें दोबारा नौकरी पर रखा जाए।
वहीं, राष्ट्रीय वाल्मीकि समाज प्रतिनिधि मंच के पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए श्रम विभाग से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। चेतावनी: कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
रिपोर्ट - गुलवेज़ आलम कैराना
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