शामली गौकशी प्रकरण: हाईकोर्ट ने NSA निरस्त किया, कहा- कथित घटना से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने के पर्याप्त आधार नहीं

शामली (उत्तर प्रदेश)। जनपद शामली के मोहल्ला काजीवाड़ा से जुड़े एक चर्चित गौकशी प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए एक आरोपी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को निरस्त कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कथित घटना घर के अंदर हुई थी और इससे सार्वजनिक व्यवस्था या सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने के पर्याप्त आधार रिकॉर्ड पर नहीं पाए गए।

मामला वर्ष 2025 में सामने आया था, जब शामली के मोहल्ला काजीवाड़ा में कथित गौकशी की सूचना के बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी। पुलिस का कहना था कि घटना कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है। इसी क्रम में कई व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

अदालती अभिलेखों के अनुसार, 23 अप्रैल 2025 को समीर के खिलाफ गौकशी से संबंधित एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में 21 जुलाई 2025 को जिला प्रशासन ने उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लागू कर दिया। इस कार्रवाई को समीर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि कथित घटना निजी परिसर के भीतर हुई थी तथा इससे सार्वजनिक शांति भंग होने या सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। वहीं प्रशासन की ओर से NSA लगाने के निर्णय को उचित ठहराने का प्रयास किया गया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर NSA लगाने के लिए आवश्यक परिस्थितियां स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं होती हैं। अदालत ने कहा कि कथित घटना का सार्वजनिक जीवन या कानून-व्यवस्था पर प्रत्यक्ष प्रभाव दर्शाने वाले पर्याप्त तथ्य सामने नहीं आए हैं। इसके बाद समीर पर लगाया गया NSA निरस्त कर दिया गया।

मामले से जुड़े अन्य आरोपियों को भी विभिन्न स्तरों पर राहत और जमानत मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, संबंधित मुकदमों की न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है और अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम जैसे कठोर कानूनों का उपयोग करते समय प्रशासन को ठोस और पर्याप्त आधार प्रस्तुत करने होते हैं। वहीं दूसरी ओर, किसी भी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि या निर्दोषता का अंतिम निर्णय केवल अदालत द्वारा ही किया जा सकता है।

यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय लोगों की निगाहें अब आगे की न्यायिक कार्यवाही पर टिकी हैं।

— विशेष रिपोर्ट समझो भारत

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