झिंझाना कस्बे में शनिवार का दिन शिक्षा, सम्मान और उत्साह से भरा रहा, जब जामिया तुस्सालिहात में वार्षिक जलसे का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को डिग्रियां और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। जलसे का मुख्य उद्देश्य दीनी और दुनियावी तालीम की अहमियत को समाज के सामने मजबूती से रखना रहा।
कार्यक्रम के दौरान 11 छात्राओं को आलिमा की डिग्री, 7 छात्राओं को कुरान हिफ्ज की डिग्री तथा प्राइमरी शिक्षा पूर्ण करने वाली 43 बालिकाओं को डिग्रियां और पुरस्कार प्रदान किए गए। मंच पर जब इन छात्राओं को सम्मान मिला, तो पूरे परिसर में तालियों की गूंज और गर्व का माहौल देखने को मिला।
शिक्षा ही तरक्की की असली कुंजी
दिल्ली से तशरीफ लाए मौलाना फाजिल ने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा कि“शिक्षा समाज की मजबूती की नींव है। बिना तालीम के न तो व्यक्ति आगे बढ़ सकता है और न ही समाज।”
उन्होंने बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी दीनी और दुनियावी दोनों तरह की शिक्षा को अपनाने की नसीहत दी और कहा कि आज की तालीम ही आने वाले कल की पहचान तय करती है।
इन छात्राओं को मिली आलिमा की डिग्री
आलिमा की डिग्री हासिल करने वाली छात्राओं में
शबीना, सदफ, अरमान, हदिया, नबिया, कहकशा, नाजिया, उजमा, मंतशा, रुकैया और फायेजा के नाम प्रमुख रहे।
इसके अलावा कुरान हिफ्ज करने वाली सात बालिकाओं की दस्तारबंदी भी की गई, जो कार्यक्रम का बेहद भावुक और प्रेरणादायक पल रहा।
पुलिस प्रशासन का प्रेरणादायक संदेश
कार्यक्रम में मौजूद थाना प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कसाना ने बालिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि“निडर होकर शिक्षा ग्रहण करो और अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ती रहो, पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं।”
उनके शब्दों ने छात्राओं में आत्मविश्वास और हौसले का संचार किया।
कार्यक्रम की गरिमामयी उपस्थिति
जलसे में मौलाना फाजिल के साथ
मौलाना कुर्बान, मौलाना मोहम्मद अहमद और मौलाना आबिद सैफुल्लाह ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना इकराम रशीदी ने की, जबकि संचालन मुफ्ती अनवर शाह और छात्रा सलीहा ऐमन ने संयुक्त रूप से बेहद शानदार अंदाज़ में किया।
कार्यक्रम के अंत में मदरसे के प्रबंधक मौलाना तैय्यब कासमी और जनरल सेक्रेटरी गुलजार खान ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
एक प्रेरणादायक आयोजन
कुल मिलाकर जामिया तुस्सालिहात का यह वार्षिक जलसा न सिर्फ छात्राओं के लिए सम्मान का अवसर बना, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि शिक्षित बेटियां ही मजबूत भारत की असली पहचान हैं।
✍️ खास रिपोर्ट:
शाकिर अली
शामली, उत्तर प्रदेश
“समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
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