एक मां अपने बच्चे को खो दे, तो उसकी पीड़ा शब्दों से परे होती है। लेकिन ज़रा सोचिए, उस मां के आंसुओं और पूरे परिवार के दर्द के बीच, अगर जिम्मेदार अधिकारी ही हंसते हुए यह कह दे कि "एक बच्चा मर गया है उसके लिए सब आ गए..हजार जिंदा है लड्डू खाने जाइए" तो उस पर क्या गुजरेगी?
जी हां, यह अमानवीय और चौंकाने वाला बयान किसी और का नहीं, बल्कि गोंडा की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रश्मि वर्मा का है। वीडियो में वे अपने शब्दों पर जोर देकर हंसते हुए यह टिप्पणी करती नजर आ रही हैं।
यह वही रश्मि वर्मा हैं जिन पर गोंडा की सातों विधानसभाओं के विधायकों ने पहले ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। ऐसे में इस तरह का संवेदनहीन बयान उनके चरित्र और मानसिकता को और उजागर कर रहा है।
गोंडा शहर में हाल ही में एक ही नर्सिंग होम में एक ही घंटे के भीतर दो नवजात शिशुओं की मौत ने मातम का माहौल बना दिया। जिसने भी यह दर्दनाक खबर सुनी, वह स्तब्ध रह गया। लेकिन जब CMO रश्मि वर्मा का यह बयान सामने आया, तो पूरे जिले के लोगों में आक्रोश और पीड़ा और गहरी हो गई।लोग पूछ रहे हैं—
क्या यही है हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की असल तस्वीर? क्या संवेदनशीलता और जिम्मेदारी अब अधिकारियों के लिए केवल शब्द बनकर रह गए हैं?
गोंडा की मासूम जिंदगियों के साथ हुई इस त्रासदी ने न सिर्फ दो परिवारों को उजाड़ा है, बल्कि पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब संवेदनशीलता मर जाती है, तो इंसान केवल कुर्सी और भ्रष्टाचार का गुलाम बन जाता है।
✍️ “समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश से पत्रकार ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
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