शामली। शनिवार सायं गीता सत्संग भवन में धार्मिक भक्त समाज द्वारा आयोजित सत्संग एवं प्रवचन कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संत स्वरूपानंद गिरी जी के श्रीमुख से आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ प्राप्त किया।
अपने प्रेरणादायी प्रवचन में संत स्वरूपानंद गिरी जी ने कहा कि मनुष्य को अपने मन को राग, द्वेष, चुगली, निंदा और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रखना चाहिए। भगवान के प्रति सच्चा और निष्काम प्रेम ही जीवन के कल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि ध्रुव और प्रह्लाद ने निष्काम भक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया था। यदि हम भी उसी प्रकार निष्काम भाव से ईश्वर की आराधना करें, तो हमारा जीवन सफल और सार्थक बन सकता है।
संत जी ने कहा कि मन और शरीर का गहरा एवं अटूट संबंध है। मन स्वभाव से अत्यंत चंचल होता है और सांसारिक आकर्षणों की ओर शीघ्र खिंच जाता है। ऐसे में व्यक्ति अच्छे और बुरे का विवेक खो बैठता है। इसलिए मन पर नियंत्रण रखना अत्यंत आवश्यक है। जब मन संयमित होगा, तभी सच्ची भक्ति और आत्मिक शांति प्राप्त होगी तथा जीवन का वास्तविक कल्याण संभव होगा।
सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भजनों का रसास्वादन किया। आनंद चंचल, उत्तम नारंग, रमेश चंद, संगीता, नीलम, रेखा एवं ममता सहित अन्य भक्तों ने मधुर भजनों के माध्यम से भगवान एवं गुरुदेव का गुणगान कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के समापन पर विधिवत आरती संपन्न हुई। इसके उपरांत श्रद्धालुओं को अमरीश मित्तल एवं मोहिनी शर्मा सहित अन्य भक्तों द्वारा प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर नगर अध्यक्ष विजय गुप्ता, डॉ. अशोक विश्वास, डॉ. मधु सूदन, प्रेमचंद वर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने अनुशासन एवं श्रद्धा के साथ संत प्रवचन को सुना और आध्यात्मिक संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। समझो भारत के लिए झिंझाना, शामली, उत्तर प्रदेश से पत्रकार प्रेमचंद वर्मा की ख़ास रिपोर्ट
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