मोहर्रम की दूसरी मजलिस में गूंजा कर्बला का पैगाम, शहीदों की याद में नम हुईं आंखें

बिडौली (शामली)। मोहर्रम की दूसरी तारीख पर कस्बा बिडौली सादात के विभिन्न इमामबारगाहों में आयोजित मजालिस में कर्बला के शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस दौरान शिया समुदाय के लोगों ने इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों की कुर्बानी को याद करते हुए शहादत के संदेश पर प्रकाश डाला।

मजलिसों की शुरुआत मरसिया-खानी से हुई, जिसमें सय्यद वसी हैदर, नफीस शाह, मिन्हाल मेहदी और गुलाम अली जैदी सहित कई लोगों ने अपने कलाम पेश किए। पहली मजलिस सुबह इमामबारगाह में आयोजित हुई, जहां मौलाना वसीम साहब किबला (बहराइच) ने कर्बला की घटनाओं और उसके संदेश पर विस्तार से चर्चा की।

दूसरी मजलिस पूर्व प्रधान फजल अली उर्फ अच्छू मियां की कोठी में आयोजित की गई, जिसमें हुज्जतुल इस्लाम मौलाना फरहत हुसैन साहब (आजमगढ़) ने अपने संबोधन में इंसाफ, सब्र और मानवता के लिए इमाम हुसैन की कुर्बानी को प्रेरणास्रोत बताया।

दिन और रात में आयोजित अन्य मजालिसों में भी बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रमों के समापन पर नौहाखानी और सीनाज़नी का आयोजन किया गया। अंजुमन-ए-सज्जादिया के नौहाखानों हाशिम शाह, शौकीन हुसैन, हसन अली जैदी, सय्यद वसी हैदर और सहजाद शाह ने भावपूर्ण नौहे प्रस्तुत किए, जिन्हें सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे।

मजलिसों में सैय्यद मेहताब मेहंदी, सैय्यद आफताब मेहंदी, जिया मेहंदी, सलीम शाह, हामिद शाह, कमर अब्बास जैदी, मोहम्मद जैदी, हसन रजा, नियाज हैदर, अली हैदर, सज्जाद मेहदी, आगाज रजा, मंजर जैदी, बाकिर जैदी, डॉ. बाकिर तथा अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मोहर्रम की ये मजालिस केवल शोक व्यक्त करने का अवसर नहीं हैं, बल्कि सत्य, न्याय, त्याग और मानवता के उन मूल्यों को याद करने का माध्यम भी हैं, जिनके लिए कर्बला के मैदान में महान बलिदान दिए गए थे। यही संदेश आज भी समाज को भाईचारे, धैर्य और इंसाफ की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।

रिपोर्ट: शाकिर अली, बिडौली (झिंझाना), जिला शामली, उत्तर प्रदेश

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