नई दिल्ली/शामली। राजधानी दिल्ली के ओखला क्षेत्र स्थित बाबुल इल्म इमाम बारगाह-ए-हुसैनी में ईद-ए-गदीर के अवसर पर एक विशेष साहित्यिक एवं धार्मिक महफिल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए शायरों, साहित्य प्रेमियों और समाज के गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
महफिल के दौरान शायरों ने अपने कलाम पेश कर उपस्थित श्रोताओं को प्रभावित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य ईद-ए-गदीर के संदेश, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना रहा।
बिडोली सादात के शायरों ने बिखेरा कलाम का जादू
उत्तर प्रदेश के जनपद शामली स्थित बिडोली सादात से पहुंचे शायर मीसम मेहदी (हमजा) और हाशिम शाह ने भी महफिल में अपने कलाम पेश किए। उनकी प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने सराहा और कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
आयोजकों द्वारा दोनों शायरों को उनकी साहित्यिक प्रस्तुति के लिए सम्मानित भी किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद दोनों शायरों ने आयोजकों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
साहित्य और संस्कृति का संगम बनी महफिल
कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कई अन्य शायरों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। शायरी के माध्यम से प्रेम, भाईचारे, इंसानियत और सामाजिक एकता जैसे विषयों को अभिव्यक्त किया गया। महफिल के दौरान श्रोताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।
देश में शांति और सद्भाव की दुआ
महफिल के समापन पर देश की खुशहाली, अमन-चैन और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण बनकर उपस्थित लोगों की यादों में दर्ज हो गया।
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