अयोध्या (उत्तर प्रदेश): मुकद्दस महीने रमज़ान की रूहानी फिज़ा के बीच मया बाज़ार स्थित नूरानी जामा मस्जिद में तरावीह की नमाज़ के दौरान कुरान पाक मुकम्मल किया गया। यह मुकम्मल हाफिज़ व कारी हज़रत शोएब रज़ा की इमामत में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की और देश में अमन-ओ-अमान तथा खुशहाली के लिए खास दुआएं की गईं।
रमज़ान के इस पवित्र महीने में मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ का विशेष महत्व होता है। मया ब्लॉक क्षेत्र की अधिकांश मस्जिदों में भी तरावीह के दौरान कुरान पाक मुकम्मल होने का सिलसिला जारी है। नूरानी जामा मस्जिद में कुरान मुकम्मल होने के बाद सामूहिक रूप से दुआ की गई, जिसमें लोगों ने देश की तरक्की, भाईचारे और शांति के लिए हाथ उठाए।
इस मौके पर हाफिज़ व कारी हज़रत शोएब रज़ा ने अपने बयान में सदक़ा-ए-फितर और ऐतकाफ की फज़ीलत पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को ईद की खुशियों में शामिल करने का सबसे बेहतर तरीका सदक़ा-ए-फितर अदा करना है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष फितरे की राशि लगभग 60 रुपये प्रति व्यक्ति तय की गई है।
खिताब करते हुए हाफिज़ शोएब रज़ा ने कहा कि कुरान इंसानियत के लिए हिदायत की किताब है और मुसलमानों के लिए सीधी राह दिखाने का जरिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग कुरान को याद करके हाफिज़ बनते हैं, वे बेहद खुशनसीब होते हैं।कार्यक्रम के दौरान मास्टर मुबारक अली इदरीशी ने भी रमज़ान के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि रमज़ान रहमतों और बरकतों का महीना है और इसी पवित्र महीने में कुरान नाज़िल हुआ था, इसलिए रमज़ान और कुरान का आपस में गहरा रिश्ता है। उन्होंने शब-ए-कद्र की फज़ीलत का जिक्र करते हुए कहा कि इस रात में अल्लाह की इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए।
इस अवसर पर मास्टर मुबारक अली इदरीशी, मोहम्मद कैफ इदरीशी, शमशुद्दीन, मुअज्जिन वजहुल जमा, चांद बाबू, गुलाम रसूल (पप्पू), अली अहमद सहित बड़ी संख्या में नमाज़ी मौजूद रहे और सभी ने मिलकर तरावीह की नमाज़ अदा की।
(विशेष रिपोर्ट)
अयोध्या, उत्तर प्रदेश से
पत्रकार: ज़मीर आलम
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