पुलिस की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल
मुजफ्फरनगर।
जिले के थाना भोराकला क्षेत्र के ग्राम मूँडभर में प्लॉट पर निर्माण को लेकर उपजा विवाद अब एक भयावह और जानलेवा हमले में तब्दील हो गया है। इस घटना ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी गहरी चिंता पैदा कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मूँडभर निवासी रेखा पत्नी स्वर्गीय जयकुमार, जो कि एक विधवा महिला हैं, ने लगभग चार माह पूर्व गांव में एक प्लॉट खरीदा था। उक्त प्लॉट पर पहले से ही पड़ोस के कुछ लोग अपनी बुग्गी खड़ी करते आ रहे थे। प्लॉट खरीदने के बाद जब रेखा ने इसका विरोध किया, तो उन्हें लगातार गाली-गलौच और मारपीट की धमकियों का सामना करना पड़ा।
रेखा का आरोप है कि विपक्षीगण प्रभावशाली हैं, जिनमें कुछ लोग पुलिस विभाग से जुड़े हुए हैं और कुछ सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। इसी कारण वे खुलेआम दबंगई करते हुए कानून को चुनौती देते रहे।
निर्माण शुरू होते ही बढ़ी रंजिश
जब रेखा ने अपने प्लॉट पर रहने के उद्देश्य से निर्माण कार्य शुरू कराया, तो पड़ोसियों ने इसका विरोध करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। ग्राम के समझदार लोगों और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद समझौता हुआ और निर्माण कार्य आगे बढ़ा, लेकिन रंजिश खत्म नहीं हुई।
दिनदहाड़े घर में घुसकर हमला
घटना 31 जनवरी 2026 की है। दिन करीब 11 बजे रेखा के घर में फर्श का काम चल रहा था, तभी विपक्षी परिवार के लोग घर में घुस आए और निर्माण कार्य रुकवा दिया। स्थिति बिगड़ती देख 112 पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ के लिए रेखा के जेठ रामकुमार तथा विपक्षी सुरेशपाल को थाने ले गई।
इसी दौरान रेखा का देवर डॉ. सत्यकुमार, जो गांव में चिकित्सक हैं और स्वयं हृदय रोग से पीड़ित हैं, घर पर अकेले मौजूद थे।
हथौड़े से सिर पर वार, हालत नाजुक
दोपहर करीब 3 बजे विपक्षी पक्ष के कई लोग—मोनू, रिंकू, नितिन, अनीता, संतोष, ब्रजेश सहित अन्य—घर में घुस आए और डॉ. सत्यकुमार पर लाठी, डंडे, सरिया और ईंटों से जानलेवा हमला कर दिया। आरोप है कि नितिन ने सत्यकुमार के सिर पर हथौड़े से वार किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हमलावर घर में तोड़-फोड़ कर धमकी देते हुए फरार हो गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल सत्यकुमार को पहले सीएचसी शाहपुर में भर्ती कराया, जहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें शामली स्थित एक निजी अस्पताल के आईसीयू में रेफर कर दिया गया। वर्तमान में वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
पीड़िता रेखा का आरोप है कि पहले से शिकायतों के बावजूद पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे दबंगों के हौसले बढ़े और यह गंभीर घटना घटित हुई। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम उठाए जाते, तो आज एक निर्दोष व्यक्ति ICU में जिंदगी की जंग न लड़ रहा होता।
बड़ा सवाल: आम आदमी की सुरक्षा कौन करेगा?
यह घटना कई अहम सवाल खड़े करती है—
क्या प्रभावशाली लोगों के आगे कानून बेबस है?
क्या आम, सीधे-साधे नागरिकों को अपनी ही जमीन पर रहने के लिए भी डर में जीना पड़ेगा?
और यदि न्याय नहीं मिला, तो कानून पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा?
पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और जान-माल की सुरक्षा की मांग की है।
समझो भारत
राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
ब्यूरो चीफ: शौकिन सिद्दीकी
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