झिंझाना/शामली। पवित्र माह रमजान के आगमन से पूर्व शहर में तैयारियों को लेकर धार्मिक एवं सामाजिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में खारे वाली मस्जिद में जमीयत उलेमा-ए-हिंद शहर इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें रमजान के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता शहर अध्यक्ष हाफिज अय्यूब ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि रमजान का महीना इबादत, संयम और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसे में आवश्यक है कि इफ्तार और सहरी के समय को लेकर पूरे शहर में एकरूपता बनी रहे, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
शहर महासचिव कारी इरशाद गोगवान ने प्रस्ताव रखा कि रमजान के दौरान इफ्तार और सहरी का ऐलान शहर की सभी मस्जिदों में एक निर्धारित टाइम टेबल के अनुसार किया जाए। यह प्रस्ताव मस्जिदों के इमामों और मुतवल्लियों की सहमति से पारित किया गया। तय किया गया कि समय सारणी का पालन सख्ती से किया जाएगा, जिससे अनुशासन और एकता दोनों कायम रहें।
बैठक का संचालन शहर उपाध्यक्ष मौलाना तैय्यब कासमी ने किया। उन्होंने सभी उपस्थित जनों से अपील की कि रमजान के महीने में आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत किया जाए।
इस अवसर पर मुफ्ती अरशद, इमाम शाह मुबारक मस्जिद, कारी अब्दुल खालिक, कारी मुंशाद, हाफिज शारिम, मास्टर हाशिम, राशिद कुरेशी, कासिम, मौलाना याकूब, मौलाना शुएब, शरीफ और ताहिर सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
बैठक के अंत में दुआ के साथ यह संकल्प लिया गया कि रमजान के दौरान शहर में धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराए जाएंगे।
📍 फोटो कैप्शन:
खारे वाली मस्जिद में रमजान को लेकर बैठक करते जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पदाधिकारी।
✍️ “समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए झिंझाना, शामली, उत्तर प्रदेश से पत्रकार शाकिर अली की खास रिपोर्ट
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