जनजाति उपयोजना क्षेत्र में सामाजिक न्याय पर शोध को मिली नई दिशा डॉ. पुंजीलाल यादव को गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि

बाँसवाड़ा। राजस्थान के जनजाति उपयोजना क्षेत्र में सामाजिक न्याय की जमीनी हकीकत को सामने लाने वाले महत्वपूर्ण शोध के लिए डॉ. पुंजीलाल यादव को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह उपाधि , बाँसवाड़ा के सप्तम दीक्षांत समारोह में दिनांक 8 जनवरी को प्रदान की गई।

दीक्षांत समारोह में महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने डॉ. यादव को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में किए गए उनके उल्लेखनीय शोध कार्य के लिए पीएचडी की उपाधि प्रदान की। उनका शोध विषय था—
“राजस्थान में सामाजिक न्याय की दशा एवं दिशा: जनजाति उपयोजना क्षेत्र के संदर्भ में एक अध्ययन”,
जिसमें जनजाति उपयोजना क्षेत्र में निवासरत वंचित समुदायों की सामाजिक न्याय की वास्तविक स्थिति का व्यापक और तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

यह शोध कार्य प्रो. शिप्रा राठौड़, हरदेव जोशी कन्या महाविद्यालय, बाँसवाड़ा के निर्देशन में पूर्ण हुआ। अध्ययन में विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं तथा घुमंतू एवं अर्द्ध-घुमंतू वर्गों की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और अधिकार आधारित स्थिति का गहन मूल्यांकन किया गया है।

शोध निष्कर्षों में यह स्पष्ट हुआ कि संविधान एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं के बावजूद जनजाति उपयोजना क्षेत्र में सामाजिक न्याय की पूर्ण स्थापना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासतौर पर अनुसूचित जाति-जनजाति की महिलाओं और घुमंतू समुदायों की स्थिति सर्वाधिक संवेदनशील पाई गई। शोध में सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक सुझावों, नीतिगत सुधारों और प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया है।


डॉ. पुंजीलाल यादव ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने शोध निर्देशक प्रो. शिप्रा राठौड़, परिवारजनों एवं सहयोगियों को देते हुए कहा कि उनका यह शोध नीति निर्माण, प्रशासनिक निर्णयों तथा सामाजिक न्याय से जुड़े भविष्य के शोध कार्यों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। उल्लेखनीय है कि डॉ. यादव मूल रूप से डूंगरपुर जिले के कुंआ गांव के निवासी हैं और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उनका योगदान निरंतर सराहनीय रहा है।

“समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए
राजस्थान/उत्तर प्रदेश से
पत्रकार रामलाल सिंह यादव की विशेष रिपोर्ट

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