बिड़ौली/झिंझाना (शामली)।केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून को समाप्त किए जाने के फैसले के विरोध में के कार्यकर्ताओं ने ऊन तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए इस निर्णय को गरीब और मजदूर वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला बताया तथा राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार ललिता चौधरी को सौंपा।
बुधवार को हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि (मनरेगा) गरीब परिवारों के लिए जीवनरेखा है, जिसे समाप्त करना सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
गरीबों के अधिकारों का हनन: कांग्रेस
इस अवसर पर कांग्रेस युवा प्रदेश महासचिव अशवनी शर्मा सींगरा ने कहा कि मनरेगा के तहत हर गरीब परिवार को साल में 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती है, लेकिन भाजपा सरकार द्वारा लाई जा रही नई योजनाओं में ऐसी कोई लिखित गारंटी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गरीबों से उनका संवैधानिक अधिकार छीनने का काम कर रही है।उन्होंने आगे कहा कि 11 जनवरी को वाराणसी में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के साथ जिस तरह का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, वह लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है। कांग्रेस इस तरह की तानाशाही नीति के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।
बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रदेश महासचिव अशवनी शर्मा सींगरा, युवा जिला उपाध्यक्ष नासिर चौधरी, जिला उपाध्यक्ष सुबोध कोरी, युवा जिला प्रवक्ता जुबैर चौधरी, संदीप भाटी, आजम मंसूरी, जिला महासचिव तालिब खान, संजय तोमर, कैफ खान, बिरहम सिंह, राकेश सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि मनरेगा कानून को किसी भी कीमत पर समाप्त न किया जाए और गरीबों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
✍️ “समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए
झिंझाना, शामली (उत्तर प्रदेश) से
पत्रकार: शाकिर अली की खास रिपोर्ट
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