शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक पर्व 27 रजब को शनिवार के दिन बिडौली सादात में पूरी श्रद्धा, आस्था और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। यह दिन नबी-ए-पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ﷺ की मेराज की मुकद्दस यात्रा की याद में मनाया जाता है, जिसे शिया समुदाय विशेष महत्व देता है।
नियाज और इबादत से गूंजे घर-आंगन
पर्व की शुरुआत सुबह नमाज़ के बाद हुई। मोहम्मद साहब ﷺ की याद में नियाज दिलाई गई, जिसमें मिट्टी के बर्तनों में पकाए गए पकवानों को बच्चों और जरूरतमंदों में तकसीम किया गया। मिट्टी के बर्तनों में नियाज दिए जाने के कारण इस पर्व को आमतौर पर “कुंडों का त्योहार” भी कहा जाता है।
महिलाओं की मेहनत, रातभर की तैयारी
इस अवसर पर महिलाओं ने पूरी रात जागकर खीर, पूड़ी, मीठी छोटी रोटियां और अन्य पारंपरिक व्यंजन तैयार किए। शनिवार को शिया समुदाय के लगभग हर घर में विशेष पकवान बनाए गए, जिससे पूरे इलाके में रौनक और पाकीज़गी का माहौल दिखाई दिया।
कुरआन ख्वानी और दुआओं का सिलसिला
सय्यद वसी हैदर व फज़ल अली ने बताया कि पर्व के दौरान घर-घर कुरआन शरीफ की आयतें और फातिहा पढ़ी गई। अकीदतमंदों ने दिल से दुआएं मांगीं। मान्यता है कि 27 रजब के दिन सच्चे दिल से मांगी गई दुआएं अल्लाह तआला कबूल फरमाते हैं। इस मौके पर देश में अमन, भाईचारे और सकून के लिए भी खास दुआएं की गईं।
रमज़ान की आमद का पैगाम
बताया गया कि 27 रजब के लगभग एक माह बाद पाक महीना रमज़ान शुरू होगा, जिसे लेकर समुदाय में पहले से ही धार्मिक उत्साह देखने को मिला।
बड़ी संख्या में अकीदतमंद रहे मौजूद
इस धार्मिक आयोजन में कंबर अब्बास, नफीस शाह, जिन्दा शाह, मोहर्रम अली, बाकिर अली शाह, खालिद शाह, तस्लीम शाह, सलीम शाह, अली मियां, सय्यद मेहताब मेहदी, मंसूर शाह, लियाकत शाह सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर पर्व को सफल बनाया।
“समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए
बिडौली सादात, शामली, उत्तर प्रदेश से पत्रकार ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
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