✍️ इमरान अब्बास | कैराना, शामली (उ.प्र.)
समझो भारत राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की विशेष रिपोर्ट
नगर पालिका कैराना में नाला सफाई को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ठेकेदार आकिल के खिलाफ लगे आरोपों ने न सिर्फ पालिका प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि नगर की जनता में भी गहरा रोष पैदा कर दिया है। लगातार भारी वर्षा और जलभराव के बीच नालों की प्रभावी सफाई की आवश्यकता जहां सबसे अधिक थी, वहीं आरोप है कि पूरा काम “फोटो सेशन” और “कागजी खानापूरी” तक सिमट कर रह गया।
ठेका मंजूरी और सफाई प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
सभासद शगुन मित्तल और कोमल रानी ने अधिशासी अधिकारी को लिखित शिकायत में जो तथ्य उजागर किए हैं, वह पूरे मामले को संदिग्ध बना देते हैं।
उनका दावा है कि—
- नाला सफाई का ठेका बिना बोर्ड बैठक की स्वीकृति के आकिल ठेकेदार को दे दिया गया।
- सफाई के नाम पर केवल दिखावा किया गया, वास्तविक कार्य बेहद कम हुआ।
- नाले जस के तस भरे पड़े हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
JCB मशीन के नाम पर ‘खर्चा’, लेकिन काम नदारद
शिकायत में यह भी कहा गया है कि—- JCB मशीन का खर्चा ₹1000 प्रति घंटा दिखाया गया।
- रिकॉर्ड में 160 दिन तक काम दिखाया गया, जबकि सभासदों के अनुसार 16 दिन भी ठीक से काम नहीं हुआ।
- ठेकेदार ने कई जगहों पर पालिका की मशीनों का ही उपयोग किया, फिर भी काम अधूरा छोड़ दिया गया।
इन तथ्यों ने पूरे ठेका तंत्र पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगा दिए हैं—क्या यह केवल लापरवाही है या इसके पीछे और भी बड़ा खेल?
लाखों रुपये की ठेका राशि, लेकिन परिणाम 'शून्य'?
सभासदों का कहना है कि यह मामला केवल कागजी त्रुटि का नहीं, बल्कि लाखों रुपये की सार्वजनिक धनराशि से जुड़ा हुआ है।उनका आरोप है—
- सफाई कार्य लगभग शून्य है।
- कागजी हेरफेर कर भुगतान लेने की कोशिश की जा रही है।
- यह जनता के हितों से खुली खिलवाड़ है।
इसलिए दोनों सभासदों ने स्पष्ट मांग की है कि—
- ठेकेदार को एक भी भुगतान न किया जाए
- और मामले की निष्पक्ष एवं कठोर जांच कराई जाए।
उन्होंने शिकायत की प्रतियां SDM, DM और कमिश्नर को भी भेजी हैं, जिससे मामला अब प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीरता से उठने लगा है।
स्थानीय जनता में बढ़ता आक्रोश
कैराना में जलभराव, गंदगी और बदहाल नालों को लेकर पहले ही लोग परेशान हैं। अब जब सफाई घोटाले की भनक लगी है, तो जनता में असंतोष और अधिक बढ़ गया है।- लोग पूछ रहे हैं कि जब सफाई के लिए भारी भरकम बजट पास होता है, तो फिर धरातल पर सफाई क्यों नहीं दिखती?
- क्या प्रशासन ठेकेदारों के हाथों में बंधक बन चुका है?
- आखिर इतनी बड़ी गड़बड़ी पर कार्रवाई कब होगी?
यह मामला अब केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि नगर पालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठता हुआ सवाल बन चुका है।
आगामी कदम—नजरें प्रशासन पर
पूरा शहर इस बात पर टिका है कि प्रशासन इस घोटाले पर क्या रुख अपनाता है।क्या—
- ठेकेदार से जवाब-तलब होगा?
- भुगतान रोक दिया जाएगा?
- उच्च स्तर की जांच बैठेगी?
या यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा?
सवाल बहुत हैं—जवाब अभी बाकी है। कैराना की जनता इंतज़ार कर रही है कि सच क्या है और दोषी कौन है।
“समझो भारत” के लिए कैराना से इमरान अब्बास की यह विशेष और विस्तृत रिपोर्ट
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