सहारनपुर, 30 अगस्त 2025। हकीकत नगर स्थित धरना स्थल शनिवार को शिक्षकों की महापंचायत से गूंज उठा। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त विद्यालय शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित इस महापंचायत में शिक्षा विभाग के खिलाफ तीखे तेवर देखने को मिले। कंवरपाल सिंह की अध्यक्षता में और अमजद अली एडवोकेट एवं निमेष पवार के संचालन में हुई बैठक में शिक्षक नेताओं ने भ्रष्टाचार को शिक्षा व्यवस्था को खोखला करने वाली सबसे बड़ी बीमारी बताया।
महापंचायत में यह निर्णय लिया गया कि शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचने और दोषी अधिकारियों को बेनकाब करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण टास्क फोर्स समिति का गठन होगा। समिति की कमान ईश्वरचंद्र फौजी को सौंपी गई, जबकि वजाहत अली, विक्रांत शर्मा, मनीष मंगलम, अजय सिंह रावत और पदम खटाना को सदस्य बनाया गया।
रिश्वतखोर लिपिक को पकड़वाने वाले का हुआ सम्मान
महापंचायत का माहौल तब और गरमा गया जब ईश्वरचंद्र फौजी ने डीआईओएस कार्यालय के लिपिक अजय कुमार को रिश्वत लेते हुए विजिलेंस टीम से रंगे हाथ पकड़वाने की घटना सुनाई। इसके बाद उन्हें मंच से फूलमालाओं से लादकर और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। शिक्षकों ने कहा कि "भ्रष्टाचार करने वालों का बहिष्कार और भ्रष्टाचार उजागर करने वालों का सत्कार" अब आंदोलन का नारा होगा।
इसी मंच से पत्रकार इमरान अंसारी को मीडिया प्रभारी घोषित किया गया।
बीएसए का पुतला फूंकने की घोषणा से मचा हड़कंप
खंड शिक्षा अधिकारी के धरना स्थल पर पहुंचते ही शिक्षकों का आक्रोश और बढ़ गया। मंच से ऐलान हुआ कि यदि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) मौके पर नहीं आएंगे तो उनका पुतला दहन किया जाएगा। यह सुनते ही बीएसए के होश उड़ गए और वे तुरंत धरना स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और लखनऊ स्थित महानिदेशक व बेसिक शिक्षा परिषद को संबोधित 16 सूत्रीय मांगपत्र प्राप्त किया।
"अफसर खुद को मालिक, शिक्षक को गुलाम समझते हैं" – डॉ. अशोक मलिक
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक मलिक ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी खुद को मालिक और शिक्षकों को गुलाम समझने लगे हैं। “जब देश का प्रधानमंत्री खुद को जनता का सेवक कहता है तो अधिकारी खुद को जनता का मालिक क्यों मानते हैं?”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निजी विद्यालयों के शिक्षकों का सम्मान नहीं हुआ तो "हम विभाग की ईंट से ईंट बजा देंगे।"
डॉ. मलिक ने यह भी कहा कि विभाग में दोहरे कानून लागू हैं – सरकारी स्कूलों पर अलग और निजी स्कूलों पर अलग। यह न केवल संविधान विरोधी है बल्कि गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों के साथ भी अन्याय है। “असली हकदार राष्ट्रपति और राज्यपाल पुरस्कारों के निजी स्कूलों के शिक्षक हैं, क्योंकि वे हजारों बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं।”
"भ्रष्टाचार की दलदल में डूबा शिक्षा विभाग"
प्रदेश सचिव अमजद अली एडवोकेट और मंडल उपाध्यक्ष मनीष मंगलम ने कहा कि निजी स्कूल लगातार असामाजिक तत्वों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से कठोर स्कूल सुरक्षा एक्ट बनाने की मांग की।
दोनों नेताओं ने कहा कि आरटीई के तहत फीस प्रतिपूर्ति और अभिभावकों की प्रोत्साहन राशि का भुगतान महीनों से लंबित है। यदि सरकार ने इसे तत्काल जारी नहीं किया तो आंदोलन और उग्र होगा।
सरकारी स्कूलों में फर्जी नामांकन का आरोप
जिला अध्यक्ष केपी सिंह, महानगर अध्यक्ष गययूर आलम और महानगर प्रभारी अजय सिंह रावत ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में फर्जी नामांकन चढ़ाए जा रहे हैं और यू-डाइस पोर्टल पर सही डाटा अपलोड नहीं हो रहा। इससे निजी स्कूलों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह यूपी में भी 1800 से 2500 रुपये प्रति छात्र प्रतिमाह फीस प्रतिपूर्ति दी जाए। साथ ही महिला शिक्षकों को मानदेय दिया जाए, ताकि निजी स्कूलों को आर्थिक संकट से उबारा जा सके।
सैकड़ों शिक्षक और महिलाओं की मौजूदगी
महापंचायत में जिले और प्रदेश भर से सैकड़ों महिला और पुरुष शिक्षक शामिल हुए। मंच से वीरेंद्र कुमार पवार, धनंजय शर्मा, अरविंद शर्मा, राशिद जावेद, उस्मान थानवी, प्रवीण गुप्ता, मुजाहिद नदीम, नारायण सिंह, दिनेश रुपड़ी, विजेंद्र चौधरी, महिपाल सिंह, महताब अली, अनिल सचदेवा, अहमद खान, संजय राणा समेत कई नेताओं ने संबोधित किया।
सभा में मौजूद शिक्षकों ने सरकार को दो टूक संदेश दिया कि “यदि शिक्षा विभाग की लूट-खसोट और मनमानी बंद नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन प्रदेशव्यापी हो जाएगा।”
समझो भारत राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए पत्रकार गुलवेज़ आलम की खास रिपोर्ट
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