महापौर परोक्ष रूप से और पार्षद समाप्त व्यवहार में

VOICE OF DR. KHANDELA



जब महापौर सभापति और अध्यक्ष के लिए चुनाव पार्षद और सदस्य करेंगे तो मान लो उनकी हैसियत कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं होगी

उनको कहा जाएगा कि हाईकमान ने इस व्यक्ति को महापौर आदि बनने के लिए भेजा है इसीलिए आपका काम है जो कुछ हाईकमान ने कहा है उसके अनुसार मतदान कर दो

      जो स्वतंत्र सदस्य के रूप में चुनकर आएंगे वह तो अपना मेहनताना लेंगे पारितोषिक लेंगे लेंगे और जिनके पास में काली कमाई है वह देंगे भी

      क्योंकि देंगे काली कमाई और करेंगे सफेद कमाई यह खेल चलेगा जो सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुए लोग हैं उनको कठपुतलियां चाहिए और यह कठपुतली बनाने का कारखाना खुल गया

      अब जो टिकटों का प्रतिफल के आधार पर इंतजाम करेंगे कच्ची बस्ती में रात को पता नहीं थैलियां लेकर जाएंगे और मतदान अपने पक्ष में करवाने के लिए पता नहीं क्या-क्या करना पड़ेगा उनका सब कुछ बेकार हो जाएगा

 ।।। क्योंकि जो महापौर आएगा वह महा ऊंचे दर्जे का जी हजूरी करने वाला होगा ऊपर वाले की इसलिए वह नीचे वालों से जी हजूरी करवाने की कोशिश करेगा झुंझलाहट में

No comments:

Post a Comment