Showing posts with label रिपोर्ट डॉ0 मानचंद खंडेला जयपुर. Show all posts
Showing posts with label रिपोर्ट डॉ0 मानचंद खंडेला जयपुर. Show all posts

लोकतंत्र असफल क्यों ?

VOICE OF DR. KHANDELA



लोकतंत्र असफल क्यों  ?

      भारतीय लोकतंत्र सर्वश्रेष्ठ व्यवस्थाओं में से एक है लेकिन केवल कागजों में सैद्धांतिक रूप से व्यवहार में नहीं


    . इसके लिए महत्वपूर्ण कारण हैं आम जनता की गुलामी की मानसिकता, शासक को मालिक समझने की भूल, जो पब्लिक सर्वेंट हैं उनको पब्लिक का मालिक बना देने की मजबूरी ,सामान्य जनप्रतिनिधि को असामान्य सम्मान , पार्षद जैसे व्यक्ति को हर मौके पर मालाओं से लाद देने ,
हर कार्यक्रम में उसको महत्व देने, उसकी अक्रमणता, संवेदनहीनता, ज्ञात भ्रष्ट हरकतों को भी उजागर नहीं करने ,उसको हर मामले का ज्ञाता मान लेने, सामाजिक ,धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी उसको उच्चतर स्थान पर बैठाने, उस पर कभी प्रश्न खड़े नहीं करने ,उसके वचनों को साधु संतों के प्रवचनों से भी अधिक महत्व देने, चमचागिरी की हद तक उनके साथ बड़े आदमी जैसा व्यवहार करने
      जबकि हर जनप्रतिनिधि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार पब्लिक का सर्वेंट है
      क्योंकि वह सरकारी खजाने से वेतन, भत्ते, सुविधाएं और सेवानिवृत्ति लाभ उसी प्रकार लेता है जिस प्रकार सरकारी कर्मचारी

     उस पर सरकारी कर्मचारी की तरह की अनुशासनहीनता, अकर्मण्यता, उत्तरदायित्वहीनता, कर्तव्य से दूरी, समयबद्ध तरीके से कार्य निष्पादित नहीं करने जैसे आरोपों में कार्यवाही क्यों नहीं की जानी चाहिए  ?

    यह जनता का अधिकार है कि उस पर कार्रवाई हो लेकिन जनता अगर खुद ही इसके लिए कोई मांग नहीं करें तो व्यवस्था तो नहीं सुधर सकती है

    लोकतंत्र में मान लेना चाहिए लोक तंत्र के हमेशा नीचे रहता है लेकिन दुर्भाग्य से आज तंत्र के नीचे लोक के रहने की मानसिकता स्वीकार कर ली है

महापौर परोक्ष रूप से और पार्षद समाप्त व्यवहार में

VOICE OF DR. KHANDELA



जब महापौर सभापति और अध्यक्ष के लिए चुनाव पार्षद और सदस्य करेंगे तो मान लो उनकी हैसियत कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं होगी

उनको कहा जाएगा कि हाईकमान ने इस व्यक्ति को महापौर आदि बनने के लिए भेजा है इसीलिए आपका काम है जो कुछ हाईकमान ने कहा है उसके अनुसार मतदान कर दो

      जो स्वतंत्र सदस्य के रूप में चुनकर आएंगे वह तो अपना मेहनताना लेंगे पारितोषिक लेंगे लेंगे और जिनके पास में काली कमाई है वह देंगे भी

      क्योंकि देंगे काली कमाई और करेंगे सफेद कमाई यह खेल चलेगा जो सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुए लोग हैं उनको कठपुतलियां चाहिए और यह कठपुतली बनाने का कारखाना खुल गया

      अब जो टिकटों का प्रतिफल के आधार पर इंतजाम करेंगे कच्ची बस्ती में रात को पता नहीं थैलियां लेकर जाएंगे और मतदान अपने पक्ष में करवाने के लिए पता नहीं क्या-क्या करना पड़ेगा उनका सब कुछ बेकार हो जाएगा

 ।।। क्योंकि जो महापौर आएगा वह महा ऊंचे दर्जे का जी हजूरी करने वाला होगा ऊपर वाले की इसलिए वह नीचे वालों से जी हजूरी करवाने की कोशिश करेगा झुंझलाहट में