मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रकीर्ण (दाण्डिक अपील उ0प्र0 राज्य बनाम अजमल बेग) में पारित आदेश दिनांकित 20/08/2026 के अनुपालन में एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर श्री संजय कुमार सप्तम के मार्गदर्शन में आज दिनांक 03.10.2026 को तहसील सभागार कक्ष, बिजनौर में दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर श्रीमती स्वाति चंन्द्रा द्वारा व संचालन उपजिलाधिकारी श्रीमती स्मृति मिश्रा द्वारा किया गया। उक्त जागरूकता शिविर में उपस्थित सभी पुरूष व महिलाओं को दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 से अवगत कराया गया। सचिव महोदया द्वारा बताया गया कि दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 भारत में दहेज के लेन-देन को रोकने और इसके खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान करने के लिए बनाया गया एक प्रमुख कानून है। यह अधिनियम 1 जुलाई 1961 से संपूर्ण भारत में लागू हुआ था दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act, 1961) के तहत दहेज लेना, देना या इसके लिए उकसाना एक दंडनीय अपराध है, जिसमें सजा और जुर्माना हो सकता है।
विवाह से पहले, विवाह के समय या उसके बाद कभी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दी जाने वाली या मांगे जाने वाली कोई भी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति (Property or valuable security) दहेज कहलाती है। दहेज की कुप्रथा को समाज से समाप्त करने एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अन्तर्गत अनुचित मुकदमें दायर ना करने की अपील की गयी। ताकि सही मुकदमें न्यायालय के समक्ष आ सके।
उक्त शिविर में श्री विजय कुमार नायाब तहसीलदार, बिजनौर, पराविधिक स्वयं सेवक श्री संजीव कुमार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
@ SAMJHO BHARAT
Nitin Chauhan -7017912134


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