सैकड़ों बच्चों के मुस्तकबिल संवारने वाले मास्टर अहसान अली खां का इंतकाल — गढ़ी पुख़्ता में पसरा मातम, आज बाद नमाज़-ए-जुमा सुपुर्द-ए-ख़ाक

निहायत रंज-ओ-ग़म के साथ इंतकाल की इत्तिला — पूर्व राज्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद जनाब अमीर आलम खां साहब के गुरु रहे मरहूम मास्टर अहसान अली खां

गढ़ी पुख़्ता, जिला शामली।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ यह इत्तिला तमाम अहले बिरादरान और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब तक पहुंचाई जाती है कि मोहल्ला कश्यपपुरी पूर्वी, क़स्बा गढ़ी पुख़्ता, जिला शामली, उत्तर प्रदेश निवासी मशहूर और सम्मानित शख्सियत मास्टर अहसान अली खां वल्द जनाब इरशाद अली खां (बक्शी जी) मरहूम, उम्र तकरीबन 87 वर्ष, आज दिन जुमा, 18 सितंबर 2026 को तड़के करीब 4 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से वफ़ात पा गए।

मरहूम मास्टर अहसान अली खां की वफ़ात की खबर जैसे ही क़स्बे और उनके अज़ीज़-ओ-अक़ारिब तक पहुंची, हर तरफ़ ग़म और मायूसी की लहर दौड़ गई। एक नेक, उसूल-पसंद, कड़क मिज़ाज़ और लेन-देन में पूरी ईमानदारी के लिए मशहूर शख्सियत के इस दुनिया से रुख़्सत हो जाने पर क़स्बे के लोगों ने गहरे दुख का इज़हार किया है।

इल्म की रोशनी बांटने वाले क़ाबिल उस्ताद

मास्टर अहसान अली खां ने अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा तालीम के लिए वक़्फ़ किया। उन्होंने क़स्बे और आसपास के इलाक़े के सैकड़ों बच्चों को दुनियावी तालीम देकर उनके मुस्तकबिल को संवारने और उन्हें कामयाबी की राह पर आगे बढ़ाने में अहम किरदार अदा किया।

बताया जाता है कि मरहूम पूर्व राज्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद जनाब अमीर आलम खां साहब के भी गुरु जी रहे। यही वजह है कि मरहूम की शख्सियत को क़स्बे में एक उस्ताद, बुज़ुर्ग और रहनुमा के तौर पर लंबे अरसे तक सम्मान की निगाह से देखा जाता रहा।

मरहूम मास्टर अहसान अली खां अपने कड़क मिज़ाज़, साफ़गोई, उसूल-पसंदी और लेन-देन में बे-मिसाल ईमानदारी के लिए मशहूर रहे। उन्होंने अपनी ज़िंदगी में उसूलों से समझौता नहीं किया और अपने पीछे अपने अच्छे किरदार तथा तालीम की ऐसी यादें छोड़ गए हैं जिन्हें उनके शागिर्द और चाहने वाले लंबे समय तक याद रखेंगे।

मुज़फ़्फ़रनगर से पुश्तैनी क़स्बे लाई गई मैय्यत

मरहूम पिछले कुछ वर्षों से अपने बेटे शारिक मियां के साथ मुज़फ़्फ़रनगर में रह रहे थे। वफ़ात के बाद परिजन उनकी मैय्यत को उनके पुश्तैनी क़स्बे गढ़ी पुख़्ता ले आए, जहां आज उन्हें उनके चाहने वालों, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और क़स्बे के लोगों की मौजूदगी में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, दो बेटे और चार बेटियों समेत भरा-पूरा परिवार, कुनबा, खानदान और बड़ी संख्या में अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं। वह शारिक मियां और आरिज़ मियां के वालिद-ए-मोहतरम थे।

आज बाद नमाज़-ए-जुमा नमाज़-ए-जनाज़ा व सुपुर्द-ए-ख़ाक

परिजनों के मुताबिक़ मरहूम मास्टर अहसान अली खां की नमाज़-ए-जनाज़ा आज दिन जुमा, 18 सितंबर 2026 को बाद नमाज़-ए-जुमा ठीक दोपहर 2 बजे क़स्बा गढ़ी पुख़्ता में अदा की जाएगी। इसके बाद उन्हें क़स्बे में ही सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरान-ए-मिल्लत से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमाएं, मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

सुपुर्द-ए-ख़ाक के वक़्त दुआ

अल्लाह तआला मरहूम मास्टर अहसान अली खां की मग़फ़िरत-ए-कामिला व मुकम्मल फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, उसे वुसअत और कुशादगी अता फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए।

या अल्लाह! जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो अपनी रहमत के साए में जगह अता फरमा। क़ब्र के सवालात आसान फरमा, उन्हें अज़ाब-ए-क़ब्र से महफ़ूज़ फरमा और उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

या अल्लाह! मरहूम के तमाम नेक आमाल को अपनी बारगाह में क़ुबूल फरमा, उनकी तालीमी ख़िदमात को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया बना दे और जिन बच्चों को उन्होंने इल्म की रोशनी दी, उनकी कामयाबी को मरहूम के लिए नेकी का ज़रिया बना दे।

मिट्टी देते वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ

सुपुर्द-ए-ख़ाक के मौक़े पर अल्लाह का नाम लेकर मिट्टी दी जाए और दिल से दुआ की जाए:

"मिन्हा ख़लक़नाकुम् व फ़ीहा नुईदुकुम् व मिन्हा नुख़रिजुकुम् तारतन उख़रा।"

अर्थात: "हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे और इसी से दोबारा निकालेंगे।"

अल्लाह तआला तमाम मरहूमीन की मग़फ़िरत फरमाए और मास्टर अहसान अली खां को अपनी रहमत के साए में जगह अता फरमाए।

अहले-ख़ाना से ताज़ियत

इस पुरदर्द मौक़े पर क़ायम खबरें की पूरी टीम और पत्रकार ज़मीर आलम मरहूम के तमाम अहल-ए-ख़ाना, बेटों, बेटियों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम शागिर्दों से दिली ताज़ियत का इज़हार करती है।

अल्लाह रब्बुल आलमीन तमाम पसमान्दगान को यह सदमा बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फरमाए और मरहूम की रूह को सुकून व राहत अता फरमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित देश की उर्दू भाषा की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका — "समझो भारत"

ख़ास रिपोर्ट: पत्रकार ज़मीर आलम
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