बिडौली (शामली): मोहर्रम के अवसर पर बिडौली सादात स्थित इमाम बारगाह में चौथी मजलिस श्रद्धा, अनुशासन और अकीदत के माहौल में आयोजित की गई। देर रात तक चली इस मजलिस में कर्बला के शहीदों को याद करते हुए नोहाखानी, मजलिस और सीनाजनी की गई। बड़ी संख्या में अज़ादारों ने इसमें भाग लेकर इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना जमन अब्बास ने कर्बला की ऐतिहासिक घटना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत इंसानियत, न्याय, सत्य और उसूलों की रक्षा का प्रतीक है। उनके अनुसार, कर्बला का संदेश हर दौर में इंसान को हक और नाहक के बीच फर्क समझने की प्रेरणा देता है।
मौलाना ने अपने बयान में कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों का भावपूर्ण उल्लेख किया, जिसे सुनकर मौजूद अज़ादार गमगीन हो गए। मजलिस के समापन के बाद अंजुमन-ए-सज्जादिया की ओर से कर्बला के शहीदों की याद में सीनाजनी की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन पाक से हुई। इसके बाद मर्सियाखानी और नोहाखानी का सिलसिला चला, जिसमें स्थानीय अंजुमनों और अज़ादारों ने अपनी अकीदत पेश की। पूरी रात इबादत, ज़िक्र और कर्बला की याद में धार्मिक गतिविधियाँ जारी रहीं।
मजलिस की अध्यक्षता फज़ल अली उर्फ अच्छू मियां ने की। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग, उलेमा और अज़ादार उपस्थित रहे तथा शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण वातावरण में धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ।
मोहर्रम के दौरान आयोजित होने वाली ऐसी मजलिसें केवल धार्मिक परंपरा का हिस्सा ही नहीं हैं, बल्कि त्याग, धैर्य, इंसाफ और मानवता के मूल्यों को याद करने का भी अवसर प्रदान करती हैं। कर्बला का संदेश आज भी समाज को सत्य, नैतिकता और अन्याय के विरुद्ध दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।
— शाकिर अली, विशेष संवाददाता
समझो भारत | शामली, उत्तर प्रदेश
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