हजरत कासिम की शहादत की याद में निकला मातमी जुलूस, अकीदतमंदों ने पेश की श्रद्धांजलि

बिडौली/चौसाना (शामली)। मोहर्रम की आठवीं तारीख के अवसर पर जनपद शामली के चौसाना कस्बे में हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के भतीजे हजरत कासिम (अ.स.) की शहादत की याद में एक मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने भाग लेकर कर्बला के शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया।

जुलूस का शुभारंभ स्थानीय इमामबाड़े से हुआ, जो कस्बे के विभिन्न मार्गों और बाजारों से होकर कर्बला स्थल पर पहुंचकर सम्पन्न हुआ। जुलूस में अलम, ताबूत और जुलजनाह भी शामिल रहे, जिनकी अकीदतमंदों ने जियारत की। इस दौरान सबील-ए-कर्बला का विशेष प्रबंध किया गया तथा श्रद्धालुओं को मीठा शर्बत, चाय और अन्य जलपान वितरित किया गया।

जुलूस से पूर्व आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मोहम्मद वसीम (बहराइच) ने इंसानियत, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, सद्भाव और नेक कार्यों को बढ़ावा देना ही इस्लाम की वास्तविक शिक्षा है।

मौलाना ने कर्बला की घटनाओं का उल्लेख करते हुए हजरत कासिम (अ.स.) सहित अहलेबैत की कुर्बानियों को याद किया और बताया कि कर्बला का संदेश सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए संघर्ष का प्रतीक है। मजलिस के दौरान उपस्थित सोगवारों ने भावुक होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके पश्चात निकाले गए मातमी जुलूस में विभिन्न अंजुमनों के नोहेख्वानों ने कर्बला के शहीदों की याद में नोहे पेश किए। जुलूस में युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी शामिल रहे तथा शांतिपूर्ण वातावरण में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। जुलूस की अध्यक्षता मंजर जैदी ने की। इस अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे।

मोहर्रम का महीना इस्लामी इतिहास में त्याग, बलिदान और मानवता के मूल्यों की याद दिलाने वाला माना जाता है। इसी संदेश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हर वर्ष ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल "समझो भारत" के लिए बिडौली सादात, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) से पत्रकार शाकिर अली की विशेष रिपोर्ट।

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