इमाम अली की याद में उठाया गया शबी-ए-ताबूत का जुलूस, अकीदतमंदों ने किया मातम

बिडौली/झिंझाना (जिला शामली, उत्तर प्रदेश)।

रमजान के पाक महीने में हजरत इमाम अली (अ.स.) की शहादत की याद में बिडौली सादात स्थित इमाम बारगाह से शबी-ए-ताबूत का जुलूस निकाला गया। इस अवसर पर मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी के जरिए अपने गम और अकीदत का इजहार किया।

मंगलवार की रात आयोजित मजलिस में मौलाना अब्बास रजा लखनवी ने खिताब फरमाते हुए हजरत इमाम अली (अ.स.) की जिंदगी और उनके आदर्शों पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इमाम अली इंसाफ, सब्र और इंसानियत की मिसाल थे और हमें उनकी जिंदगी से सीख लेकर अपने व्यवहार में अच्छाई लानी चाहिए।

मौलाना ने उस ऐतिहासिक वाकिये का जिक्र किया जब 19 रमजान, सन 40 हिजरी को कूफा की मस्जिद में फज्र की नमाज के दौरान इमाम अली पर हमला किया गया था। बताया जाता है कि जब इमाम अली नमाज के लिए मस्जिद पहुंचे तो उनका कातिल अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम वहीं मौजूद था। नमाज के दौरान सजदे की हालत में उस पर हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए।

मजलिस में यह वाकिया सुनकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। वक्ताओं ने यह भी बताया कि जख्मी होने के बावजूद इमाम अली ने अपने हमलावर के साथ इंसानियत का व्यवहार करने की सीख दी।

मजलिस के बाद इमाम बारगाह से अलम और शबी-ए-ताबूत का जुलूस निकाला गया। अंजुमन सज्जादिया के सदस्यों ने नौहाख्वानी और मातम किया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ मुस्तफवी मस्जिद पर पहुंचकर समाप्त हुआ।

शिया समुदाय में 19 से 21 रमजान तक हजरत इमाम अली (अ.स.) की शहादत की याद में मजलिस और मातमी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान अकीदतमंद उनके जीवन, शिक्षाओं और इंसाफ की मिसालों को याद करते हैं।

इस मौके पर पूर्व प्रधान फजल अली और सैय्यद वसी हैदर की संयुक्त अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ। जुलूस और मजलिस में रजी बाकर, मन्नन मिया, मोहसिन रिजवी, मंसूर शाह, सलीम शाह, बाकिर अली, जिंदा शाह, नफीस शाह, अजीम शाह, मेहताब मेहदी, मिन्हाल मेहदी, आफताब मेहदी, कंबर, गुड्डू मिया, मौलाना ऑन मोहम्मद, हसन अली जैदी, सम्मी शाह, नियाज हैदर और रेहान हैदर सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

(रिपोर्ट: शाकिर अली, बिडौली/झिंझाना, जिला शामली – उत्तर प्रदेश)

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