कोर्ट ने कसा शिकंजा: बेलेबल वारंट जारी होते ही गवाह पहुंचे अदालत, दर्ज कराई गवाही

हरियाणा के पानीपत स्थित सेशन कोर्ट में चल रहे बहुचर्चित मामले में आखिरकार वह मोड़ आ ही गया, जब अदालत की सख्ती के बाद मुख्य गवाह को पेश होना पड़ा। लगातार गैरहाजिरी से नाराज कोर्ट ने 10,000 रुपये का जमानती (बेलेबल) वारंट जारी किया, जिसके बाद गवाह महेंद्र सिंह चावला 2 मार्च को अदालत पहुंचे और अपनी गवाही दर्ज कराई।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मुख्य आरोपी और अन्य आरोपियों से जुड़ा हुआ है। इस केस में कार्तिक उर्फ राजू, तमराज उर्फ ताम्रध्वज उर्फ गोलू, नीरज उर्फ मोनू और नीलम उर्फ मोनू भी आरोपी हैं। सभी आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं और सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किए जा रहे हैं।

मामले में महेंद्र सिंह चावला मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता हैं। उनकी गवाही इस केस में बेहद अहम मानी जा रही है, लेकिन बीते कुछ समय से वे अदालत में पेश नहीं हो रहे थे।

6 फरवरी: मेडिकल आधार पर ली थी छूट

6 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान गवाह ने अपने वकील के माध्यम से अदालत से पेशी में छूट मांगी। आवेदन में बताया गया कि उनके बाएं कंधे में गोली लगने के पुराने घाव के कारण तेज दर्द है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए एक दिन की छूट दे दी और शेष गवाही के लिए 17 फरवरी की तारीख तय की।

17 फरवरी: कोर्ट का सख्त रुख

17 फरवरी को जब दोबारा सुनवाई हुई और सभी आरोपी वीसी से जुड़े, तब महेंद्र चावला ने फिर से कंधे के दर्द का हवाला देते हुए पेशी से छूट की अर्जी दी। इस बार उन्होंने कोई मेडिकल प्रमाण पत्र अदालत में पेश नहीं किया।

अदालत ने पिछली तारीखों का रिकॉर्ड देखा और पाया कि 15 जनवरी 2026 को भी वे स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थित रहे थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ‘सीआरपीसी की धारा 311 के तहत अर्जी खारिज होने के बाद से गवाह जानबूझकर अपनी गवाही से बचते प्रतीत होते हैं।’ इसके साथ ही छूट की अर्जी नामंजूर कर दी गई।

जारी हुआ 10 हजार का बेलेबल वारंट

गवाह के रवैये से नाराज अदालत ने 10,000 रुपये का जमानती वारंट जारी कर दिया। साथ ही 27 फरवरी 2026 के लिए समान राशि का जुर्माना भी तय किया गया।

अदालत की सख्ती का असर साफ दिखाई दिया। 2 मार्च को महेंद्र सिंह चावला पानीपत सेशन कोर्ट में उपस्थित हुए और अपनी गवाही दर्ज कराई।

आगे क्या?

कोर्ट ने आगे की गवाही की प्रक्रिया जारी रखते हुए अगली सुनवाई 5 मार्च के लिए निर्धारित की है।

यह घटनाक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि न्यायालय गवाही जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही को हल्के में नहीं लेता। कानून की प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने के लिए अदालत का यह सख्त रुख न्यायिक व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है।

पानीपत (हरियाणा) से पत्रकार ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट
“समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका

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