ई-चालान के दुरुपयोग और टोल वसूली के खिलाफ 15 मई से देशव्यापी चक्काजाम की चेतावनी
नई दिल्ली से – ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट
देश के सड़क परिवहन उद्योग में उबाल साफ दिखाई दे रहा है। राजधानी नई दिल्ली में आयोजित (AIMTC) की तीसरी राष्ट्रीय गवर्निंग बॉडी बैठक में ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े शीर्ष नेताओं ने ई-चालान प्रणाली और टोल वसूली को लेकर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराते हुए 15 मई 2026 से राष्ट्रव्यापी चक्काजाम की तैयारी का संकेत दे दिया है।
बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने की, जबकि चेयरमैन डॉ. जी. आर. शनमुगप्पा सहित देशभर से आए पदाधिकारियों, राज्य इकाइयों और वरिष्ठ परिवहन प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
राष्ट्रीय परिवहन नीति की मांग
बैठक में यह स्पष्ट कहा गया कि सड़क परिवहन देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन वर्तमान नीतिगत विसंगतियों ने इस क्षेत्र को संकट की स्थिति में ला खड़ा किया है।
मुख्य मांगें रहीं:
- पूरे देश में समान मोटर वाहन कर व्यवस्था
- कंसाइनर द्वारा ट्रांजिट इंश्योरेंस अनिवार्य किया जाए
- परमिट नियमों का सरलीकरण
- डिजिटल अनुपालन के लिए समग्र और व्यावहारिक नीति
नेताओं का कहना था कि यदि लॉजिस्टिक्स लागत कम नहीं की गई तो “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएगा।
ई-चालान प्रणाली पर गंभीर सवाल
ई-चालान को लेकर बैठक में सबसे तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
नेतृत्व का आरोप है कि:
- कई मामलों में केवल स्थिर (स्टैटिक) फोटो के आधार पर चालान जारी किए जा रहे हैं।
- वाहन किसी अन्य राज्य में होने के बावजूद अलग राज्य से चालान जारी हो रहे हैं।
- वैज्ञानिक रूप से सत्यापित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का अभाव है।
- शिकायत निवारण के लिए प्रभावी और समयबद्ध तंत्र नहीं है।
संगठन ने मांग रखी कि हर ई-चालान के साथ सीसीटीवी फुटेज या बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग जैसे प्रमाण अनिवार्य हों। केवल फोटो आधारित चालान को अवैध माना जाए और वाहन को ब्लैकलिस्ट करने की शक्ति केवल न्यायालय के पास हो।
टोल नीति पर पारदर्शिता की मांग
बैठक में टोल टैक्स वसूली को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया गया।चेयरमैन डॉ. शनमुगप्पा ने कहा कि कई स्थानों पर पूंजी लागत वसूल होने के बाद भी 100% टोल वसूला जा रहा है, जबकि पहले नियम के अनुसार रख-रखाव हेतु 40% तक ही टोल लिया जाना चाहिए।
फास्टैग से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों पर भी चिंता व्यक्त की गई। संगठन ने सरकार से पारदर्शी और न्यायसंगत टोल नीति लागू करने की मांग की।
छोटे ऑपरेटरों की आजीविका पर संकट
देश में 80–85% वाणिज्यिक वाहन छोटे ऑपरेटरों और मालिक-चालकों के हाथों में हैं। बढ़ती ईंधन कीमतें, टोल दरें, ई-चालान जुर्माने और जब्ती की कार्यवाही ने उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।
नेतृत्व का कहना है कि यह सिर्फ उद्योग का संकट नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी का सवाल है।
अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे
बैठक में निम्न विषयों पर भी चर्चा हुई:
- बॉर्डर चेकपोस्ट और आरटीओ फ्लाइंग स्क्वाड के उत्पीड़न का विरोध
- बसों में वाणिज्यिक माल ढुलाई पर सुरक्षा और जीएसटी संबंधी चिंता
- ए.आई.एस.-140 आधारित वी.एल.टी.डी. अनिवार्यता को अव्यावहारिक बताया गया
- ऑटोमेटेड फिटनेस स्टेशन (ATS) की अनिवार्यता से हो रही परेशानी
जहां ATS उपलब्ध नहीं हैं, वहां मैनुअल फिटनेस परीक्षण जारी रखने की मांग दोहराई गई।
15 मई 2026: निर्णायक तारीख
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि 15 मई 2026 तक सरकार ने लंबित मुद्दों पर न्यायसंगत समाधान नहीं दिया, तो देशव्यापी अनिश्चितकालीन चक्काजाम और हड़ताल की जाएगी।
संगठन मीडिया के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान भी चलाएगा ताकि आम नागरिक इन व्यवस्थागत समस्याओं को समझ सकें।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में हुई यह बैठक केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि सड़क परिवहन उद्योग की बढ़ती बेचैनी का संकेत थी।
ई-चालान, टोल नीति, फिटनेस नियम और कर संरचना जैसे मुद्दे अब प्रशासनिक फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगे। यदि समाधान नहीं निकला तो 15 मई 2026 देश की सड़कों पर बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
लेखिका: ऊषा महाना
नई दिल्ली
"समझो भारत" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए विशेष रिपोर्ट
#samjhobharat
📞 8010884848
🌐 www.samjhobharat.com
📧 samjhobharat@gmail.com
No comments:
Post a Comment