भोपाल में ट्रांसपोर्ट उद्योग की आवाज़: ए.आई.एम.टी.सी. की मध्य प्रदेश सरकार से अहम बैठक

नई दिल्ली/भोपाल। देश के ट्रांसपोर्ट उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर (ए.आई.एम.टी.सी.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भोपाल का दौरा किया। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और परिवहन मंत्री से विस्तृत चर्चा हुई। बैठक का केंद्र बिंदु था—स्टेज कैरिज बसों में वाणिज्यिक सामान ढुलाई का प्रस्ताव, ऑटोमेटेड फिटनेस स्टेशनों (ए.टी.एस.) की अनिवार्यता, और परिवहन व्यवसायियों से जुड़े अन्य व्यावहारिक मुद्दे।


स्टेज कैरिज बसों में कार्गो ले जाने के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध

भोपाल स्थित में आयोजित बैठक में ए.आई.एम.टी.सी. प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि राज्य परिवहन उपक्रम (एस.टी.यू.) की स्टेज कैरिज बसों में वाणिज्यिक सामान ले जाने की अनुमति दी जाती है, तो इसका सीधा और गंभीर असर ट्रक व्यवसाय पर पड़ेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल  ने अपने तर्क रखते हुए कहा—

  • इससे ट्रक ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान होगा।
  • जीएसटी चोरी की आशंकाएँ बढ़ सकती हैं।
  • यात्रियों की सुरक्षा से समझौता हो सकता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सड़क सुरक्षा देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है, और किसी भी व्यवस्था में यात्री सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।

ए.आई.एम.टी.सी. ने इस प्रस्ताव के विरोध में विभाग को औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा और इसे तत्काल स्थगित करने की मांग की।


ऑटोमेटेड फिटनेस स्टेशन (ए.टी.एस.) और मैनुअल फिटनेस का मुद्दा

बैठक में एक अन्य प्रमुख विषय रहा—ऑटोमेटेड फिटनेस स्टेशनों की अनिवार्यता।

परिवहन व्यवसायियों का कहना है कि प्रदेश में ए.टी.एस. की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है, जबकि मैनुअल फिटनेस लगभग बंद कर दी गई है। इससे—

  • वाहन मालिकों को अनावश्यक देरी,
  • आर्थिक बोझ,
  • और प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया कि जब तक ए.टी.एस. की व्यवस्था पूरी तरह सुलभ और व्यवस्थित नहीं हो जाती, तब तक व्यवहारिक समाधान निकाला जाए।


परिवहन मंत्री से मुलाकात: समस्याओं का विस्तार से प्रस्तुतिकरण

ए.आई.एम.टी.सी. के प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री से भी मुलाकात की।

इस दौरान निम्न मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए—

  • स्टेज एवं कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में अवैध रूप से वाणिज्यिक सामान की ढुलाई
  • वाहन खरीद पर एम.आर.पी. के आधार पर जीएसटी लगाना, जबकि इनवॉइस वैल्यू अधिक तर्कसंगत आधार है
  • आर.टी.ओ. फ्लाइंग स्क्वाड द्वारा सड़क पर कथित उत्पीड़न
  • ट्रकों में वी.एल.टी.डी. की अनिवार्यता से जुड़ा आर्थिक दबाव


राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल ने इन सभी बिंदुओं पर मंत्री से हस्तक्षेप कर समाधान निकालने का आग्रह किया। मंत्री ने धैर्यपूर्वक सभी बातों को सुना और सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।


संयुक्त प्रयास से समाधान की सहमति

बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि ए.आई.एम.टी.सी. और मध्य प्रदेश परिवहन विभाग मिलकर इन विषयों को केंद्र सरकार के स्तर पर भी उठाएंगे, ताकि दीर्घकालिक और संतुलित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

प्रतिनिधिमंडल में मध्य प्रदेश टीम के सदस्य—विजय कालरा, हरीश डाबर, राकेश तिवारी, अमरजीत सिंह बग्गा, सी. एल. मुकाती, चतर सिंह भाटी, कमल पंजवानी, मोहित डाभी और दीपक खंडेलवाल—उपस्थित रहे।


निष्कर्ष: संतुलन, सुरक्षा और पारदर्शिता की मांग

यह दौरा केवल एक औपचारिक बैठक नहीं था, बल्कि ट्रांसपोर्ट उद्योग की जमीनी समस्याओं को नीति-निर्माताओं तक पहुँचाने का गंभीर प्रयास था।

ए.आई.एम.टी.सी. ने स्पष्ट कर दिया है कि वह—

  • ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के हितों की रक्षा,
  • सुरक्षित परिवहन व्यवस्था,
  • और पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रियाओं

के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य और केंद्र स्तर पर इन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, भोपाल में हुई यह बैठक ट्रांसपोर्ट जगत के लिए एक अहम संकेत जरूर मानी जा रही है।


“समझो भारत” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए
नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा महाना की विशेष रिपोर्ट

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