कैराना।समाज में पत्रकारिता की भूमिका किसी रीढ़ से कम नहीं—और जब इस मेहनत को सार्वजनिक रूप से सराहा जाए, तो वह पल और भी खास हो जाता है। सेंट आरसी साइंटिफिक कॉन्वेंट स्कूल में ऐसा ही एक प्रेरक दृश्य देखने को मिला, जब कस्बे के वरिष्ठ पत्रकार मरहूम सलीम के पुत्र एवं स्वतंत्र पत्रकार गुलवेज़ आलम को सम्मानित किया गया।
सम्मान का मुख्य क्षण
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया जब विद्यालय के प्रबंधक यशपाल पवार ने गुलवेज़ आलम को पारंपरिक पटका पहनाकर और सम्मान पत्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया।
तालियों की गड़गड़ाहट ने माहौल को और भी जोशीला बना दिया—जैसे पूरे हॉल ने एक सुर में कहा हो कि सच्ची पत्रकारिता आज भी जिंदा है।
पत्रकारिता की जिम्मेदारी—विद्यालय प्रबंधन की दृष्टि से
विद्यालय प्रबंधन ने पत्रकारिता की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि
“सच्चाई, निष्पक्षता और जनहित—इन्हीं स्तंभों पर टिकी पत्रकारिता ही समाज को दिशा देती है।”
उन्होंने यह भी बताया कि गुलवेज़ आलम ने लगातार क्षेत्रीय मुद्दों, जनसमस्याओं और सामाजिक सरोकारों को अपनी स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से प्रमुखता से उठाया है—और यही समर्पण उन्हें सम्मान के योग्य बनाता है।
शिक्षकों की राय: प्रेरणा का स्रोत
शिक्षकों का कहना था कि आज का दौर पत्रकारिता के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद निडर और जिम्मेदार पत्रकार युवा पीढ़ी को यह संदेश देते हैं कि सच लिखना और सच के लिए खड़े रहना कभी पुराना नहीं होता।
स्कूल में आयोजित यह सम्मान समारोह छात्रों के लिए भी एक सीख बन गया—कि समाज सेवा सिर्फ किसी एक मंच तक सीमित नहीं, बल्कि सोच और साहस की मांग करती है।
उपस्थित लोगों की शुभकामनाएँ
कार्यक्रम में विद्यालय स्टाफ, अभिभावक, छात्र-छात्राएँ और कई स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सभी ने गुलवेज़ आलम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उम्मीद जताई कि वे आगे भी इसी तरह समाज के मुद्दों को आवाज देते रहेंगे।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, लेकिन दिलों में पत्रकारिता के सम्मान का भाव देर तक गूंजता रहा।
"समझो भारत" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए — कैराना, शामली (उ.प्र.) से पत्रकार इमरान अब्बास की खास रिपोर्ट
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