कैराना कस्बे के मोहल्ला पीरजादगान में रहने वाले तमशीर उर्फ़ रोहित की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। दर्द और ग़ुस्से से भरी मां मुर्शरत अब अपने बेटे के लिए इंसाफ़ की लड़ाई लड़ रही हैं। आरोप है कि पुलिस न तो FIR दर्ज कर रही है और न ही संदिग्ध को गिरफ्तार, जबकि सीसीटीवी फुटेज में आरोपी काला के होने का दावा किया गया है।
📞 आखिरी कॉल… और फिर गहरी चुप्पी
3 नवंबर की रात तमशीर ने अपनी मां से दो बार बातचीत की।
पहली कॉल—“दुकान से निकल गया हूं”
दूसरी कॉल—“बस रास्ते में हूं”
लेकिन जब रात 11:05 बजे मां ने फिर फोन किया, तो कॉल एक अनजान युवक ने उठाई। उसने खुद को ‘काला’ बताया और कहा—
“आपका लड़का कंडेला बैठा है”
इसके बाद फोन बंद हो गया… और घर में बेचैनी की लंबी रात शुरू हो गई।
🌙 रातभर तलाश… और सुबह का दिल दहला देने वाला संदेश
परिजन पूरी रात तमशीर को ढूंढते रहे। सुबह 5:15 बजे एक फोन आया—
“तुम्हारा भाई टोनी होटल के पास पड़ा है।”
परिवार मौके पर पहुंचा लेकिन पुलिस पहले ही युवक को अस्पताल ले जा चुकी थी।
🏥 डॉक्टरों का बड़ा दावा—‘जहरीला पदार्थ’ दिया गया था
डॉ. मुकेश अस्पताल, शामली में डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि तमशीर को जंगल की जहरीली दवाई दी गई है। हालत बिगड़ने पर उसे हायर सेंटर रेफर किया गया, जहां 4 नवंबर को उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
🎥 CCTV में काला साथ दिख रहा, फिर भी FIR क्यों नहीं?
परिजनों का गंभीर आरोप—
- घटना वाली रात CCTV में काला नाम का युवक तमशीर के साथ चलता दिख रहा है।
- इसकी सूचना पुलिस को दी गई।
- लेकिन एक महीने बाद भी हत्या की FIR दर्ज नहीं।
- आरोपी की कोई गिरफ्तारी नहीं।
परिवार का कहना है कि पुलिस मामले को टालने की कोशिश में है।
👩🦱 मां का रो-रोकर सवाल—“मेरा बेटा कैसे मर गया… कोई क्यों नहीं सुन रहा?”
तमशीर की मां मुर्शरत ने डीआईजी सहारनपुर मंडल को प्रार्थना पत्र भेजकर मांग की है—
- हत्या की FIR दर्ज की जाए।
- आरोपी काला को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
- पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो।
परिजनों ने यहां तक कहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
⚠️ एक मौत… कई सवाल… और न्याय की आस
तमशीर की मौत सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि सिस्टम पर उठता बड़ा सवाल भी है।क्या एक संदिग्ध मौत को ऐसे ही अनदेखा कर दिया जाएगा?
क्या CCTV, बयान और मेडिकल रिपोर्ट के बाद भी FIR दर्ज न होना न्याय प्रणाली पर धब्बा नहीं?
समझो भारत इस प्रकरण को पूरी गंभीरता से उठाता है और पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।
📌 रिपोर्टर: इमरान अब्बास
📍 कैराना, शामली (उ.प्र.)
"समझो भारत" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
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