बिडौली/शामली। गांव बिडौली सादात स्थित हजरत पीर बेहराम शाह रहमतुल्लाह अलैह की मजार पर बुधवार से दूसरे वार्षिक मेले का शुभारंभ हो गया। मेले के पहले ही दिन बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद दरगाह पहुंचे, जहां उन्होंने चादरपोशी कर जियारत की और मुल्क में अमन-चैन व खुशहाली की दुआएं मांगीं। मेले में आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी लोगों की लगातार आमद बनी रही।
दरगाह के सज्जादानशीं के अनुसार यह मेला वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जो प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में आयोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में बिडौली सादात एक समृद्ध और बड़ा नगर माना जाता था तथा उसी दौर से पीर बेहराम शाह की मजार यहां मौजूद है।
स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक वर्ष 1905 में आए भीषण सैलाब ने पूरे इलाके को प्रभावित कर दिया था। उस समय यमुना नदी पर न तो कोई बांध था और न ही पक्के रास्तों की व्यवस्था। चारों ओर पानी भर जाने के बावजूद पीर बेहराम शाह की मजार तक पानी नहीं पहुंचा। इस घटना के बाद लोगों की दरगाह के प्रति आस्था और अधिक मजबूत हो गई।
बताया जाता है कि बाढ़ के बाद ग्रामीणों ने करीब एक किलोमीटर दूर नया गांव बसा लिया, लेकिन मजार आज भी अपने पुराने स्थान पर कायम है। यहां वर्ष में कई बार मेलों का आयोजन किया जाता है, जिनमें हजारों की संख्या में अकीदतमंद शिरकत करते हैं।
मेले में सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति भी सक्रिय नजर आई। श्रद्धालुओं के लिए खानपान, पानी और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल "समझो भारत" के लिए झिंझाना, शामली उत्तर प्रदेश से पत्रकार शाकिर अली की विशेष रिपोर्ट।
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