बिड़ौली/झिंझाना (शामली, उत्तर प्रदेश): पवित्र माह रमजान के तीसरे जुमे के अवसर पर क्षेत्र की सभी मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाज़ियों ने अकीदत और खुसू-खुज़ू के साथ जुमा की नमाज़ अदा की। इस मौके पर मस्जिदों में खास रौनक देखने को मिली और लोगों ने अल्लाह की इबादत में अपना समय बिताया।
जुमा की नमाज़ से पहले मस्जिदों के इमामों और आलिम-ए-दीन ने रमजान की अहमियत, रोज़े के फ़ज़ाइल और दीनी तालीमात पर बयान किया। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना सब्र, शुक्र और कुरान की तिलावत का महीना है। इस महीने में की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
उलमा-ए-किराम ने अपने बयान में कहा कि जो व्यक्ति जानबूझकर रोज़ा छोड़ देता है, वह अगर पूरी ज़िंदगी भी रोज़े रखे तो उस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि नमाज़, ज़कात और हज के सवाब के बारे में इंसानों को जानकारी है, लेकिन रोज़े का असली सवाब केवल अल्लाह ही जानता है। रोज़ा इंसान को बुराइयों से बचने और नेक रास्ते पर चलने की हिदायत देता है।
बयान के बाद खुतबा हुआ और फिर जमाअत के साथ जुमा की नमाज़ अदा की गई। नमाज़ के बाद लोगों ने देश और समाज में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।
बिड़ौली की जामा मस्जिद में मौलाना अजीमुद्दीन, मुस्तफवी मस्जिद में मौलाना ओन मोहम्मद और आइसा मस्जिद में मौलाना आसिफ ने जुमा की नमाज़ अदा कराई।
"समझो भारत" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के लिए
झिंझाना (शामली), उत्तर प्रदेश से पत्रकार शाकिर अली की खास रिपोर्ट
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