बच्चों के एडमिशन के लिए अभिभावक पहुंचे हाईकोर्ट


कैराना। जनपद के कुल 4 बच्चों की निशुल्क शिक्षा के तहत अभिभावकों द्वारा रिट दायर की गई थी। अभिभावकों ने हाईकोर्ट के विद्वान अधिवक्ता एडवोकेट चमन आरा और एडवोकेट शबिस्ता परवीन के माध्यम से रिट दायर की थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिसमें पहली सुनवाई 24 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई थी, जिसके तहत बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कोई वैध स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।

रिट पर सुनवाई के दौरान 24 मई को हाईकोर्ट बेंच संख्या 10 के न्यायाधीश ने आदेश दिया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी कैराना बुधवार 29 मई 2024 को कोर्ट को बताएं कि किस वैध कारण से बच्चों को एडमिशन नहीं दिया गया, अन्यथा कोर्ट दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। जिस पर बुधवार 29 मई 2024 को कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।


  जिस पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता एडवोकेट चमन आरा इलाहाबाद हाई कोर्ट और एडवोकेट शबिस्ता परवीन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बताया कि कोर्ट ने बच्चों के एडमिशन के संबंध में आदेश दिया है और शामली जिले के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आदेश दिया है कि वह मामले का संज्ञान लेकर याचिकाकर्ताओं को 1 जून 2024 तक नियमानुसार एडमिशन दिलाएं। चूंकि यह मामला निशुल्क एवं बाल शिक्षा के अधिकार से जुड़ा है और बच्चे का मौलिक अधिकार और संवैधानिक अधिकार है। वहीं यह बात संज्ञान में आई है

कि शैक्षिक सत्र 2024-25 में शामली जिले के कई बच्चों को वार्ड से बाहर एडमिशन दे दिया गया है। कई बच्चे ऐसे हैं जिनका आवेदन पत्र वार्ड में ही अवैधानिक तरीके से निरस्त कर दिया गया है। और सैकड़ों बच्चे ऐसे हैं जिनके वार्ड में स्कूल ही नहीं है। ऐसी स्थिति को देखते हुए क्या इन बच्चों को भी शिक्षा के अधिकार के लिए हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ेगी।

या फिर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा ही उन्हें उनका संवैधानिक अधिकार प्रदान किया जाएगा।  वही इलाहाबाद उच्च न्यायालय की विद्वान अधिवक्ता चमन आरा का कहना है कि मेरे माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग को पूर्व के वर्षों में भी पत्र के माध्यम से इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है लेकिन मामले की गंभीरता का कोई संज्ञान नहीं लिया गया।

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