शामली में शनिवार रविवार को बंद रहेंगे सभी फैक्ट्रियां सप्ताह में 5 दिन केवल 8 घंटे ही संचालित की जाएंगी फैक्ट्री

 


यूं तो पहले भी कई तरीके के आदेश जारी हुए लेकिन आगे से फाइलों तक ही सीमित रहें । हर आदेश बन जाता है अवैध हवाई का जरिया नहीं होती कोई कार्रवाई , उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक टीम शामली में रहकर आदेशों कि कर रही है निगरानी, लेकिन नतीजा फिर भी ठन ठन गोपाल, खुलेआम धड़ल्ले से इंडस्ट्री एरिया सभी नियम कानूनों

की धज्जियां उड़ा रही है फैक्ट्रियां साथ ही साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लगे  गन्ना कोल्हू भी उगल रहे हैं जहरीला दूंगा, एक टेबल से दूसरे टेबल पर इधर से उधर भटकती रहती हैं कार्रवाई की फाइलें नहीं होती कोई कार्यवाही, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुजफ्फरनगर के अंकित सिंह क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा लखनऊ पत्र लिखे जाने के बावजूद भी नहीं हो रही कार्रवाई

लोगों का सांस लेना दूभर करता प्रदूषण कोरोना और उसके नए संक्रमण से अधिक घातक..!!दिन प्रतिदिन बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण ने लोगों का जीना कर रखा मुश्किल..बैठके औपचारिकता मात्र हो रही सिद्ध..आपको बता दें कि जनपद शामली में आज शनिवार रविवार को बंद रहेगी सभी फैक्ट्रियां केवल सप्ताह में 5 दिन 8 घंटे ही चल पाएंगे फैक्ट्रियां लेकिन

वही सबसे बड़ा सवाल क्या ग्रामीण क्षेत्रों में जहरीला  धूवा उगलने वाले गन्ना कोल्हू पर भी सख्ती से लागू हो पाएगा यह नियम क्योंकि यूं तो अधिकारी जरनैटर तक पर भी नियम को लागू करने का दावा कर रहे हैं इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के नियमों को लागू करने के उद्देश्य

से वह सरकार द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले आदेशों का पालन हो रहा है नहीं इस को परखने के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक टीम परमानेंट शामली में रह कर निगरानी कर रही है लेकिन नतीजा वही ठन ठन गोपाल जहरीली हवाऐ और जहरीली होती जा रही है चरम


सीमा पर पहुंच चुका है इतना ही नहीं छेत्री अधिकारी यदि कार्रवाई करना भी चाहते हैं तो लखनऊ में बैठे अधिकारियों से नहीं मिलता सहयोग इसका जीता जागता उदाहरण है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मुजफ्फरनगर द्वारा लखनऊ को 2 दिसंबर को  लिखे गए पत्र

के बावजूद भी आज तक कार्यवाही की नहीं मिली परमिशन यह परेशानी केवल शामली या मुजफ्फरनगर की नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में दिन प्रतिदिन बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण ने लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है! ऐसी घुटन से

निपटना जो घर की खिड़कियों और दरवाजों को बंद करने पर महसूस हो रही हो केवल जनता के स्तर पर साध्य नहीं लगता! इसलिए प्रदेश और केंद्र सरकार से अपेक्षा की जाती है कि संयुक्त प्रयास से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्यावरण को अविलंब प्रदूषण से मुक्त किया जाए! हालांकि उच्चतम न्यायालय लगातार सरकारों का ध्यान इस तरफ

आकर्षित कर रहा है पर इस दिशा में उचित कदम उठाने वाली सरकारें ध्यान नहीं दे पा रहीं हैं! क्योंकि वे अगले वर्ष कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के प्रचार में व्यस्त हैं! न्यायालय के आदेश पर ही कुछ दिनों पूर्व इस भयानक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए कोई प्रभावशाली तरीका ढूंढ़ने के लिए दिल्ली तथा इसके पड़ोसी राज्यों की बैठक हुई थी!

पर बैठक औपचारिकता मात्र ही सिद्ध हुई लगती है! इसमें संदेह नहीं कि लोगों का सांस लेना दूभर करता प्रदूषण कोरोना और उसके नए संक्रमण से अधिक घातक है! पर इसमें प्रचार का लाभ सीमित होने के कारण यह महत्त्वपूर्ण कार्य अभी उपेक्षित प्रतीत हो रहा है! अब केवल देखना यह होगा कि हर बार के आदेश की तरह क्या इस बार यह आदेश भी हवा हवाई साबित होंगे या फिर साफ-सुथरी हवा में सांस लेने का मिलेगा

अवसर या फिर अधिकारियों की भरेगी जेब यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि कथनी और करनी में बड़ा अंतर है इसीलिए जहरीली हवाएं और अधिक जहरीली होती जा रही हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने भी अपने प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़

रखी लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों की कार्यप्रणाली के चलते नहीं हो पाती कोई कार्रवाई और जो अधिकारी कोई कार्रवाई करना भी चाहते हैं उनको नहीं मिलती उच्च अधिकारियों से सपोर्ट इस सबके बीच जहरीली हवाओं

के बीच सांस लेने को मजबूर हो रहा है जनजीवन मानव हो या अन्य कोई भी जीव जंतु हर किसी के लिए घातक होता जा रही है यह जहरीली हवाएं अब देखना होगा कि इन पर कैसे पका वो पाया जाता है।

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