उत्तर प्रदेश के प्रत्येक आंगनवाड़ी बहनों व उनकी पीड़ा को अपनी पीड़ा समझने वाले प्रत्येक समाजसेवी वह सामाजिक कार्यकर्ता से अनुरोध की उत्तर प्रदेश आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ से जुड़े ---बबीता चौधरी



प्रदेश में आज आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों सहायिकाओं की जो दयनीय हालत है उसमें सरकार एवं विभागीय अधिकारियों की उदासीनता तो प्रमुख है ही लेकिन कहीं ना कहीं हमारी आंगनवाड़ी बहनों की नासमझी का मुख्य रोल है ना जाने कौन-कौन कब-कब किन किन नामों से आंगनवाड़ी संगठन लेकर आ जाते हैं और हमारी आंगनवाड़ी वर्कर समय-समय पर उनके पीछे लग लेती हैं जिससे आंगनबाड़ी आंदोलन टूट कर बिखर जाता है मेरी जानकारी अनुसार मुख्य यही वजह रही है 1975 से लेकर आज तक आंगनबाड़ियों का कोई भला नहीं हो सकता सका  2004 से लेकर आज तक हमने जो अपनी बहनों के लिए संघर्ष किया है मैं यह नहीं कहती कि हमने सबसे बेस्ट संघर्ष किया है लेकिन इतना जरूर कहती हूं कि हमने सदैव उनके हित में संघर्ष किया है कभी उनके हितों से समझौता नहीं किया लड़ाई सड़क की रही हो या फिर निदेशालय कभी भी आंगनवाड़ी को कमजोर नहीं पड़ने दिया और न उनके  अधिकारों से समझौता किया जिसकी वह हकदार  थी सदैव उनके अधिकारों के लिए लड़े कभी किसी भी सरकार, अधिकारी सामने नहीं  झुके  जब 2011 में सरकार ने पुष्टाहार वितरण का सत्यापन का अधिकार प्रधानों को दे दिया गया था हमारे इस संगठन के लोगों के साथ हमारे प्रदेश संयोजक उपेंद्र चौधरी ने जनपद मुजफ्फरनगर की धरती पर 9 दिन अनशन कर उक्त आदेश में संशोधन कराया था प्रधान के साथ-साथ प्रत्येक जनप्रतिनिधि एवं प्रधान अध्यापक सहायक अध्यापक आदि को ऐड करा कर आंगनवाड़ी के स्वाभिमान की रक्षा की थी
 लेकिन जब भी  कुछ मिलने की स्थिति  आती है तो कुछ स्वार्थी, अधिकारियों , स्वार्थी नेताओं ने और कुछ हमारी स्वार्थी बहनों ने संगठनों को कमजोर करने का काम किया
 इसलिए आज मैं प्रदेश की प्रदेश आंगनवाड़ी सहायिका बहन से अनुरोध करती हूं कि

 जो चाहते हैं वाकई आंगनवाड़ी का भला हो समाज में एक सम्मानजनक दर्जा मिले और उनके द्वारा करे जा रहे कार्यों का सही दाम मिले एकजुट होकर अपनी लड़ाई को एक जबरदस्त तरीके से लड़े

 (टुकड़ों में बटे रह कर कभी किसी का भला नहीं हुआ और  जो हुआ एकजुट उसके सामने कोई नहीं डाटा)

इसलिए आप सब एकजुट होकर अपने अधिकारों की  लड़ाई  को आर पार के रूप में उत्तर प्रदेश आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले  लड़े

अब सवाल ये उठता है उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी  कर्मचारी संघ ही क्यों क्योंकि
 उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के पास है श्रीमती राधारानी पांडे जैसा प्रदेश अध्यक्ष का नेतृत्व जिनकी छवि पर आज तक कोई किसी तरह का दाग नहीं सदैव आंगनवाड़ी के लिए काम किया
वहीं  प्रदेश संरक्षक  श्री सतीश कुमार पांडे जी  अध्यक्ष
 इंदिरा भवन जवाहर भवन कर्मचारी महासंघ
 प्रदेश संयोजक उपेंद्र चौधरी जिनकी लिखा पढ़ी का लोहा  डीपीओ ही नहीं निदेशक और सचिवालय तक भी माना जाता है
व  हमारी जिलाध्यक्ष जो  सदैव तत्पर रहती है और आंगनवाड़ी के लिए दिन-रात कार्य करती है
 मैं सिर्फ इतना कहती हूं कि

(एक बात सदैव ध्यान रखना जो बराबरी नहीं कर सकता वह आलोचना करता है
 और जो सामना नहीं कर सकता  वह षड्यंत्र रचता है )

 आप सभी से अनुरोध की प्रदेश के प्रत्येक जनपद में परियोजना स्तर पर उत्तर प्रदेश आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ को मजबूती प्रदान करें संघ मजबूत होगा तो राधा रानी पांडे मजबूत होगी राधा रानी पांडे मजबूत होगी तो आपकी बात को मजबूती से सरकार तक रखने में कामयाब होगी
 श्रीमती राधारानी पांडे का नेतृत्व सतीश कुमार पांडे का मार्गदर्शन उपेंद्र चौधरी की रणनीति वह दिन दूर नहीं कि जिस दिन आप राज्य कर्मचारी का दर्जा मिलेगा
लेकिन सबसे बड़ी समस्या एक ही है

आप लोग आज तक यह नहीं पहचान पाई कि कौन आपका दुश्मन और कौन दोस्त है ज्यादा कुछ ना कहते

मैं सिर्फ इतना ही कहूंगी कि मेरी बहनों तुम ज्यादा नहीं सिर्फ दो ही बात मान लो कौन है दुश्मन तुम्हारा और कौन है दोस्त पहचान लो

जिस दिन आप यह पहचान   लोगी शायद आपको किसी तरह की कोई समस्या नहीं होगी आपका संगठन प्रदेश का नहीं देश का सबसे मजबूत संगठन होगा तो इसलिए आप अनुरोध इस संगठन के सदस्य बने वहीं प्रदेश में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आंगनवाड़ी के परिवार से उन सभी पुरुषों से भी अनुरोध जो वाकई मानते हैं कि आंगनवाड़ियों के साथ नाइंसाफी हो रही है और उनको उनके द्वारा करे जा रहे कार्यों के मुताबिक मानदेय नहीं मिलता और आंगनवाड़ी  हित में कुछ करना चाहते हैं तो सबका स्वागत है आंगनवाड़ी हितों की रक्षा हेतु उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ में  जिलाध्यक्ष कार्यकर्ता को एक ताकत प्रदान करता है
 हमारे साथ ताकत है सतीश कुमार पांडे संरक्षक के नाम की उपेंद्र चौधरी के दिमाग की ताकत है श्रीमती राधारानी पांडे  की साफ छवि व कुशल नेतृत्व की

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