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भारत रत्न का निर्णय करने वालों की भी तो कोई हैसियत होनी चाहिए

VOICE OF DR. KHANDELA

भारत रत्न का निर्णय करने वालों की भी तो कोई हैसियत होनी चाहिए

कोई किसी को भारत रत्न देने के लायक नहीं समझता लेकिन केवल हर व्यक्ति यहां पर बात करना चाहता है जिससे कि चुनाव के समय वोटों को संग्रहित किया जा सके

     जनता को बेवकूफ बनाने की कला है और जनता बेवकूफ बन रही है जनता को पूछना चाहिए कि किसी को भारत रत्न देने से पहले जो देने वाले हैं उनमें रत्ना होने के कितने गुण हैं 


      उनको चाहिए कि वह बेरोजगारी दूर करें महंगाई को दूर करें पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को नीचे लाने रुपए की विनिमय दर जो घट है उसको रोकने का प्रयास करें विदेशी व्यापार घाटा ₹100000 करोड से अधिक हो गया है प्रति माह उसको कम करें छोटे उद्योग धंधे जो ध्वस्त हो गए हैं उनको पट्टी बनाने का प्रयास करें बैंक के जो फेल होने की कगार पर पहुंच गई हैं उनकी इज्जत करें और उसके बाद में यह बात करें
किसको देना है यह सब बातें उसी को भारत रत्न की घोषणा कर दो और नहीं तो उसका विपरीत कोई व्यक्ति को देना चाहिए जो वादे करता है और करता है बहुत नीचे क्रियान्वयन पता है आपको अंतरराष्ट्रीय 2103 नंबर पर पहुंच गया है और पाकिस्तान हमसे अच्छी स्थिति में है बांग्लादेश और श्रीलंका बहुत अच्छी स्थिति में हैं

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका के उस राजपति से दोस्ती कर रहे हैं जो दुनिया में सबसे कमजोर देश है

VOICE OF DR. KHANDELA



दुनिया में सबसे कमजोर देश आज की तारीख में अमेरिका है
     उत्तरी कोरिया का राष्ट्रपति अमेरिका के राष्ट्रपति को बूढ़ा कहता है तू मेरा क्या कर लेगा कहता है
----ईरान अमेरिका की मिसाइल को गिरा देता है और अमेरिका कुछ नहीं कर पाता
----यमन जैसा छोटा सा देश सऊदी अरब में सब कुछ जाकर तबाह कर देता है उसके 50% खनिज तेल के उत्पादन को कम करवा देता है और अमेरिका कुछ नहीं कर पाता
---चीन समुंदर में आर्टिफिशल टापू बनाकर अपनी सीमा का विस्तार कर लेता है अमेरिका कुछ नहीं कर पाता
---चाइना उसके प्रतिबंधों पर किसी प्रकार की चिंता नहीं करता अमेरिका कुछ नहीं कर पाता
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      अमेरिका को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को कहना पड़ता है अरे भाई अफगानिस्तान में मेरी मदद कर उसके बीच में मध्यस्थता कर

--- भारत के बार-बार मना करने पर भी अमेरिका का राष्ट्रपति  कहता है  मैं तो मध्यस्था करूंगा भारत और पाकिस्तान के बीच में

       ऐसे व्यक्ति से दोस्ती बढ़ाकर भारत की सारी की सारी छवि को मांन को मर्यादा को चीर चीर कर दिया है मोदी ने

      जिसके लिए पूरे देश को पश्चाताप है मोदी किसी रूप में गंभीर नहीं हैं उनको अपना प्रचार चाहिए चुनाव जीतना चाहिए देश बर्बाद हो जाए उनको इसकी चिंता नहीं है अमेरिका में भारत को 6 दिन भारत के प्रधानमंत्री द्वारा उसके पक्ष में प्रचार करने के बाद क्या मिला