मजदूरी से राष्ट्रीय पहचान तक: रामलाल यादव झडस का संघर्ष, पत्रकारिता और सामाजिक चेतना से जुड़ा प्रेरक सफर

‘मूकनायक गौरव रत्न अवार्ड 2026’ से सम्मानित रामलाल यादव ने संघर्षों को बनाया अपनी ताकत, पत्रकारिता और मानवता को समर्पित है उनका जीवन

बाँसवाड़ा (राजस्थान)।

कहते हैं कि इंसान की असली पहचान उसकी दौलत, पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उसके योगदान से होती है। कुछ लोग अपनी परिस्थितियों के सामने हार मान लेते हैं, जबकि कुछ उन्हीं कठिन परिस्थितियों को अपनी कामयाबी की सीढ़ी बना लेते हैं। राजस्थान के बाँसवाड़ा जिले की गढ़ी तहसील के झडस गाँव निवासी रामलाल यादव झडस की जीवन यात्रा भी संघर्ष, आत्मनिर्भरता, सामाजिक जागरूकता और जनहित की पत्रकारिता से जुड़ी ऐसी ही कहानी है।

मजदूरी करके शिक्षा जारी रखने से लेकर औद्योगिक क्षेत्र में सिक्योरिटी ऑफिसर की जिम्मेदारी निभाने, सामाजिक आंदोलनों में भागीदारी करने, पत्रकारिता के माध्यम से जनसमस्याओं को आवाज देने और कबीर पंथ की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़कर महंत की जिम्मेदारी संभालने तक उनका सफर अनेक अनुभवों से होकर गुजरा है।

17 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आयोजित मूकनायक के तृतीय राष्ट्रीय पत्रकार अधिवेशन में उन्हें ‘मूकनायक गौरव रत्न अवार्ड 2026’ से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि उनकी अब तक की सामाजिक और पत्रकारिता यात्रा का एक उल्लेखनीय पड़ाव मानी जा सकती है।

आर्थिक कठिनाइयों में बीता बचपन, मजदूरी के साथ जारी रखी पढ़ाई

रामलाल यादव का जन्म राजस्थान के बाँसवाड़ा जिले के झडस गाँव में एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय सुखरामदास कबीर पंथ से जुड़े हुए थे, जबकि माता गृहिणी थीं।

परिवार की सीमित आर्थिक परिस्थितियों के कारण बचपन से ही उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पढ़ाई के साथ मजदूरी करना और परिवार की जिम्मेदारियों में सहयोग देना उनके जीवन का हिस्सा रहा।

पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियाँ और बढ़ गईं। ऐसे समय में उन्होंने परिस्थितियों से समझौता करने के बजाय मेहनत और आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना।

जीवन के इन्हीं अनुभवों ने उन्हें गरीबों, श्रमिकों, वंचित वर्गों और ग्रामीण समाज की समस्याओं को नजदीक से समझने का अवसर दिया। संभवतः यही वजह रही कि आगे चलकर सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता जैसे विषय उनके विचारों और सार्वजनिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बने।

औद्योगिक क्षेत्र में सेवाएँ और फिर सामाजिक जीवन की ओर रुख

रामलाल यादव ने अपने व्यावसायिक जीवन में लगभग पाँच वर्षों तक निजी क्षेत्र में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने जे.के. ऑर्गेनाइजेशन के औद्योगिक क्षेत्र में सिक्योरिटी ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएँ दीं।

वर्ष 2022 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना अधिक समय सामाजिक गतिविधियों, जनजागरूकता और पत्रकारिता को देना शुरू किया।

उनकी वैचारिक यात्रा पर डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत कबीर और संत रविदास के विचारों का प्रभाव रहा है। वे शिक्षा, समानता, बंधुत्व, सामाजिक न्याय और मानव गरिमा को एक बेहतर समाज की बुनियाद मानते हैं।

उन्होंने बहुजन समाज पार्टी में जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई और बहुजन आंदोलन से जुड़े सामाजिक एवं वैचारिक प्रयासों में भागीदारी की।

उनकी मान्यता है कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब गरीब, मजदूर, किसान, आदिवासी, पिछड़े और वंचित समुदायों को भी समान अवसर तथा सम्मानजनक जीवन प्राप्त हो।

सर्वधर्म समभाव, मानवता और राष्ट्रीय एकता के पक्षधर

रामलाल यादव के विचारों में संत कबीर की मानवतावादी शिक्षाओं और भारतीय संविधान के मूल्यों का विशेष स्थान है।

संत कबीर ने अपने विचारों और वाणी के माध्यम से समाज को जाति-पाँति, ऊँच-नीच और धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता का रास्ता अपनाने का संदेश दिया। इसी विचारधारा से प्रेरणा लेते हुए रामलाल यादव सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना को महत्वपूर्ण मानते हैं।

उनके विचार में सर्वधर्म समभाव का अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता मिले और किसी के साथ धर्म, जाति अथवा सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव न हो।

वे राष्ट्रप्रेम को केवल नारों तक सीमित नहीं मानते। उनके अनुसार संविधान का सम्मान करना, देश के प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा करना, सामाजिक एकता बनाए रखना और राष्ट्र के विकास में अपनी जिम्मेदारी निभाना ही सच्चे राष्ट्रप्रेम की पहचान है।

मूकनायक से जुड़कर जनहित की पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका

वर्ष 2024 में स्वतंत्र पत्रकार पूरणमल के माध्यम से रामलाल यादव का संपर्क मूकनायक के राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. ओमप्रकाश वर्मा से हुआ। इसके बाद वे मूकनायक से जुड़े और राजस्थान में संगठन के विस्तार तथा जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने के प्रयासों में सक्रिय हुए।

इतिहास के पन्नों में मूकनायक का विशेष स्थान है। भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने 31 जनवरी 1920 को मूकनायक समाचारपत्र का प्रकाशन प्रारंभ किया था। इस समाचारपत्र का उद्देश्य उस दौर में सामाजिक रूप से वंचित और उपेक्षित समुदायों की आवाज को सार्वजनिक मंच प्रदान करना था।

इसी ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित होकर रामलाल यादव दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, श्रमिकों, महिलाओं और अन्य वंचित समुदायों से जुड़े मुद्दों को पत्रकारिता में प्रमुखता देने की बात करते हैं।

उनका मानना है कि पत्रकारिता केवल समाचार प्रकाशित करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को सामने लाने और जिम्मेदार संस्थाओं से जवाबदेही के सवाल पूछने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

वे तथ्यपरक, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता को लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक मानते हैं।

बिलासपुर में मिला ‘मूकनायक गौरव रत्न अवार्ड 2026’

17 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित एनई इंस्टीट्यूट, रेलवे बिलासपुर में मूकनायक के तृतीय राष्ट्रीय पत्रकार अधिवेशन का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर रामलाल यादव झडस को ‘मूकनायक गौरव रत्न अवार्ड 2026’ से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मूकनायक के प्रधान संपादक तुषार विनायक गायकवाड़, राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. ओमप्रकाश वर्मा, उपसंपादक विजयराम आजाद, महाराष्ट्र के पूर्व सांसद एवं विधायक सुशील भोपचे तथा गुजरात प्रभारी विजय मसुरिया सहित विभिन्न पदाधिकारी और अतिथि मौजूद रहे।

यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद उन्होंने मूकनायक के राष्ट्रीय नेतृत्व और पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका मानना है कि किसी भी सम्मान के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है और पत्रकार को हमेशा जनता के विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करना चाहिए।

कबीर पंथ से जुड़ाव और महंत रामानंद साहेब के रूप में नई पहचान

रामलाल यादव के जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका आध्यात्मिक जुड़ाव भी है।

30 अगस्त 2026 को वाराणसी के काशी लहरतारा क्षेत्र में नांद वंश की कबीर पंथ परंपरा के अंतर्गत पंथ श्री हजूर आचार्य अर्धनाम साहेब से दीक्षा प्राप्त करने के बाद उन्हें 108 महंत पद प्रदान किया गया। इसके बाद वे महंत रामानंद साहेब के नाम से भी पहचाने जाने लगे।

उनकी आध्यात्मिक सोच का आधार संत कबीर की शिक्षाएँ, सत्य, प्रेम, सद्भाव और आत्मज्ञान हैं।

वे धर्म और आध्यात्मिकता को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं मानते, बल्कि इसे मनुष्य के व्यवहार, नैतिकता और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी से जोड़कर देखते हैं।

उनके अनुसार किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसकी जाति, धर्म अथवा सामाजिक पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि उसके विचारों, कर्मों और मानवीय व्यवहार से होनी चाहिए।

राजस्थान के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पत्रकारिता को मजबूत करने का लक्ष्य

रामलाल यादव का एक प्रमुख उद्देश्य राजस्थान के ग्रामीण, आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में जनहित की पत्रकारिता को अधिक प्रभावी बनाना है।

वे चाहते हैं कि गाँवों में रहने वाले आम नागरिकों की समस्याओं को भी व्यापक मंच मिले और स्थानीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, ग्रामीण विकास तथा संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उचित स्थान प्राप्त हो।

उनके अनुसार कई बार दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याएँ बड़े समाचार माध्यमों तक नहीं पहुँच पातीं। ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय पत्रकारों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

वे नए पत्रकारों को तथ्यपरक रिपोर्टिंग, निष्पक्षता, सामाजिक संवेदनशीलता और पत्रकारिता की नैतिक जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा देना चाहते हैं।

युवाओं के लिए शिक्षा और आत्मनिर्भरता का संदेश

रामलाल यादव युवाओं को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता का संदेश देते हैं।

उनका मानना है कि युवाओं को जातिगत भेदभाव, धार्मिक वैमनस्य और सामाजिक नफरत से दूर रहकर ज्ञान, वैज्ञानिक सोच तथा संवैधानिक मूल्यों को अपनाना चाहिए।

वे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के शिक्षा संबंधी विचारों, संत कबीर की मानवतावादी शिक्षाओं और संत रविदास की समतामूलक सामाजिक दृष्टि को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक मानते हैं।

उनके अनुसार किसी भी देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी की शिक्षा, सोच और जिम्मेदारियों पर निर्भर करता है।

वे ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ आर्थिक अभाव के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न रुके, किसी व्यक्ति के साथ जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव न हो और प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।

सम्मान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी, जनसेवा का संकल्प बरकरार

‘मूकनायक गौरव रत्न अवार्ड 2026’ प्राप्त करने के बाद रामलाल यादव ने प्रधान संपादक तुषार विनायक गायकवाड़, राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. ओमप्रकाश वर्मा, उपसंपादक विजयराम आजाद और मूकनायक की राष्ट्रीय टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने इस सम्मान को भविष्य में पत्रकारिता, सामाजिक जागरूकता और वंचित समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की प्रेरणा बताया।

वर्तमान में वे समझो भारत डिजिटल न्यूज़ एवं ऑल इंडिया डिजिटल मीडिया एसोसिएशन में राजस्थान अध्यक्ष एवं ब्यूरो चीफ, IFWJ बाँसवाड़ा के सदस्य, मूकनायक राजस्थान के संपादक, विश्व हिंदी परिषद के प्रदेश सचिव, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक के रूप में विभिन्न गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।

इसके अतिरिक्त वे MD एवं प्रधान संपादक, आवाज टीवी 3 इंडिया न्यूज़ के रूप में भी अपनी पहचान रखते हैं।

झडस गाँव से शुरू हुई उनकी जीवन यात्रा मजदूरी, शिक्षा, औद्योगिक सेवा, सामाजिक आंदोलन, पत्रकारिता और आध्यात्मिक जीवन के अनेक पड़ावों से गुजरकर आज एक नई पहचान तक पहुँची है।

उनका सफर इस बात की याद दिलाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियाँ किसी व्यक्ति के आगे बढ़ने का रास्ता रोक नहीं सकतीं, बशर्ते उसके भीतर सीखने, मेहनत करने और समाज के लिए कुछ करने की इच्छा बनी रहे।

समानता हमारा अधिकार, मानवता हमारा धर्म, संविधान हमारा मार्गदर्शक और राष्ट्र की एकता हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।


संक्षिप्त परिचय : रामलाल यादव झडस

  • पूरा नाम: रामलाल यादव झडस
  • आध्यात्मिक नाम: महंत रामानंद साहेब
  • निवास: गाँव झडस, तहसील गढ़ी, जिला बाँसवाड़ा, राजस्थान
  • पत्रकारिता: मूकनायक राजस्थान के संपादक एवं समझो भारत डिजिटल न्यूज़ के राजस्थान अध्यक्ष एवं ब्यूरो चीफ
  • अन्य जिम्मेदारियाँ: ऑल इंडिया डिजिटल मीडिया एसोसिएशन में राजस्थान अध्यक्ष एवं ब्यूरो चीफ, IFWJ बाँसवाड़ा के सदस्य, विश्व हिंदी परिषद के प्रदेश सचिव
  • अन्य पहचान: MD एवं प्रधान संपादक, आवाज टीवी 3 इंडिया न्यूज़; सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक
  • आध्यात्मिक जुड़ाव: कबीर पंथ के महंत
  • सम्मान: मूकनायक गौरव रत्न अवार्ड 2026
  • प्रमुख सरोकार: शिक्षा, सामाजिक न्याय, जनहित की पत्रकारिता, सर्वधर्म समभाव, राष्ट्रीय एकता और मानवता।

विशेष रिपोर्ट

ज़मीर आलम
प्रधान संपादक
राष्ट्रीय समाचार पत्र/पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल
समझो भारत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत।

देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित।

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