दरगाह साबिर पाक में अदा हुई कुल शरीफ़ की रस्म

देश में अमन-ओ-आमान और बाढ़ पीड़ितों की सलामती के लिए हुईं विशेष दुआएँ

पिरान कलियर (हरिद्वार)।
सालाना उर्स-ए-पाक के तहत दरगाह साबिर पाक में शनिवार सुबह 10 बजे सबसे अहम रस्म कुल शरीफ़ अदब व एहतराम के साथ अदा की गई। इस रूहानी मौके पर पूरे हिंदुस्तान से आए जायरीनों ने शामिल होकर देश में अमन-ओ-आमान और बाढ़ पीड़ितों की सलामती के लिए नम आँखों से दुआएँ मांगी।

सज्जादानशीन ने अदा कराई रस्म

रस्म-ए-कुल शरीफ़ को सज्जादानशीन शाह अली एजाज साबरी कुद्दुसी ने अदा कराया। इस दौरान साहिबजादा शाह यावर अली, शाह खालिक मियां समेत तमाम सूफी बुजुर्ग मौजूद रहे।
दरगाह साबिर पाक जामा मस्जिद के पेश इमाम ने तिलावत-ए-कुरआन से रस्म की शुरुआत की। इसके बाद शजरा शरीफ पढ़ा गया और मुल्क की तरक्की, भाईचारे और अमन के लिए सामूहिक दुआ की गई।

जायरीनों की भीगी पलकों से दुआ

दुआएँ पढ़ते वक्त माहौल बेहद रूहानी और भावुक हो गया। देश के कोने-कोने से आए जायरीनों ने जब हाथ उठाकर बाढ़ पीड़ितों की सलामती और उनकी परेशानियों के आसान होने की दुआएँ मांगी, तो उनकी आँखें नम हो गईं।

सूफियों और अकीदतमंदों की बड़ी तादाद

कुल शरीफ़ की इस रस्म में प्रमुख तौर पर शाह खालिक मियां, शाह सुहैल मियां, नैयर अजीम फरीदी, यासिर एजाज साबरी, शाह गाजी, नोमी मियां, असद मियां साबरी सहित बड़ी संख्या में सूफी और अकीदतमंद शामिल हुए। यह आयोजन एकता, मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम लेकर आया।

महफिल-ए-शमा और रूहानियत

रस्म के बाद महफिल-ए-शमा आयोजित हुई, जिसमें मुल्कभर से आए कव्वालों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। सूफियाना कलाम और कव्वालियों ने ऐसा रूहानी समां बाँधा कि अकीदतमंद ख़ुशअंदाज़ और सराबोर हो गए।

बाढ़ पीड़ितों के लिए खास दुआ

इस सालाना उर्स की खासियत यह रही कि मुल्क भर में बाढ़ की मार झेल रहे लोगों के लिए विशेष दुआएँ की गईं। जायरीनों ने अल्लाह से रहमत, बरकत और आसानियों की फरियाद की। यह दिखाता है कि दरगाह साबिर पाक सिर्फ रूहानियत का ही नहीं बल्कि इंसानियत और इंसाफ का भी पैग़ाम देती है।


✍️ खास रिपोर्ट:
तसलीम अहमद
समझो भारत राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
📍 पिरान कलियर, हरिद्वार

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