कैराना में किसान की फसल पर खुलेआम डाका, पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल, आईजीआरएस जांच भी विवादों में, बुजुर्ग किसान को बताया गया झूठा

कस्बा कैराना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि दबंगों ने एक किसान की खड़ी फसल पर दिनदहाड़े खुलेआम डाका डाल दिया, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। इससे भी गंभीर बात यह है कि पीड़ित किसान को न्याय दिलाने के बजाय, पुलिस द्वारा आरोपियों को बचाने और किसान को ही झूठा ठहराने का आरोप लगाया गया है।

दिनदहाड़े काट ली गई खड़ी फसल

मोहल्ला आलकलां निवासी इरशाद अली उर्फ कल्लू पुत्र मकसूदा ने बताया कि उनकी कृषि भूमि खसरा संख्या 428, रकबा 0.1854 हेक्टेयर, कैराना बाहर हदूद हल्का नंबर-2 में स्थित है। इसी भूमि पर बोई गई उनकी फसल को कथित रूप से मशरूफ, आस मोहम्मद (पुत्रगण यासीन) तथा महफूज पुत्र इशाक ने जबरन काट लिया।
किसान का आरोप है कि यह घटना पूरी तरह दिनदहाड़े हुई, लेकिन सूचना के बावजूद पुलिस न तो मौके पर पहुंची और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गई।

थाना से आईजीआरएस तक, हर जगह निराशा

पीड़ित किसान ने पहले थाना कैराना में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से उसे टाल दिया गया। इसके बाद न्याय की उम्मीद में उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या 40020625016177 दर्ज कराई।

आरोप है कि जांच अधिकारी उपनिरीक्षक विनोद ने तथ्यों की अनदेखी करते हुए शिकायत का मनमाना निस्तारण कर दिया और आरोपियों को भूमि का साझेदार बता दिया, जबकि खतौनी रिकॉर्ड में विपक्षियों का नाम दर्ज ही नहीं है। यही नहीं, पीड़ित किसान को ही “झूठी शिकायत करने का आदी” करार दे दिया गया।

दूसरी जांच पर भी उठे सवाल

मामले की दोबारा जांच कराए जाने पर उपनिरीक्षक इंतजार अहमद की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई। किसान का आरोप है कि उसकी मौजूदगी, सहमति और हस्ताक्षर के बिना ही जांच रिपोर्ट में समझौता दर्शा दिया गया, जबकि न तो कोई समझौता हुआ और न ही कोई निर्णय लिया गया। यह पूरी प्रक्रिया पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

बुजुर्ग किसान की पीड़ा

उम्रदराज किसान इरशाद अली का कहना है कि उनके कोई पुत्र नहीं हैं, केवल पुत्रियां हैं। इसी वजह से उन्हें कमजोर समझकर लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक आम किसान के साथ ऐसा होगा, तो वह न्याय के लिए आखिर कहां जाए।

निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ित किसान ने उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, या फिर दबंगों और व्यवस्था की मिलीभगत यूं ही किसानों के हक को कुचलती रहेगी।


✍️ विशेष रिपोर्ट
पत्रकार गुलवेज आलम
"समझो भारत" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
कैराना, जिला शामली, उत्तर प्रदेश

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